अच्छी खबर: उत्तर भारत का सबसे बड़ा तैरता सौर ऊर्जा प्लांट चंडीगढ़ में तैयार, हर साल मिलेगी 35 लाख यूनिट बिजली
चंडीगढ़ सेक्टर-39 में लगे फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक पावर प्लांट पर 12 करोड़ का खर्च आया है। यह हर साल 35 लाख यूनिट सौर ऊर्जा उत्पन्न करेगा। इसके अलावा इससे हर साल 47.75 करोड़ लीटर पानी की बचत होगी।
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उत्तर भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक पावर प्लांट चंडीगढ़ में बनकर तैयार हो गया है। सेक्टर-39 स्थित वाटर वर्क्स के टैंक नंबर-1 और 2 पर बना 2500 किलोवाट का यह सौर पावर प्लांट न सिर्फ हर साल 35 लाख यूनिट सौर ऊर्जा पैदा करेगा बल्कि 47.75 करोड़ लीटर पानी का वाष्पीकरण भी कम करेगा। इस प्लांट का उद्घाटन जल्द हो सकता है।
शहर में इससे पहले करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से धनास की लेक के एक हिस्से में 500 किलोवाट का फ्लोटिंग एसपीवी पावर प्लांट लगाया गया था। इस प्लांट से जो बिजली पैदा होती है, उससे लेक के अंदर लगा फाउंटेन चलता है लेकिन सेक्टर-39 में लगा प्लांट इससे पांच गुना बड़ा है। इस परियोजना पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह हर साल 35 लाख यूनिट सौर ऊर्जा उत्पन्न करेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य तरीके से इतनी बिजली पैदा करने में 2415 मीट्रिक टन कार्बन डाईऑक्साइड (सीओ2) हमारे वातावरण में पहुंचती, जिसे खत्म करने के लिए हर साल 2,61,780 पेड़ लगाने पड़ते। ऐसे में यह प्लांट पर्यावरण की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगा।
यह प्लांट पूरी तरह से तैयार है और एक जुलाई से शुरू भी हो गया है। इस परियोजना से हर साल 47.75 करोड़ लीटर पानी की बचत होगी, इससे 26,250 लोगों की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।
70 फीसदी प्रशासन और 30 फीसदी राजस्व नगर निगम को मिलेगा
वाटर वर्क्स सेक्टर-39 में स्थापित तैरते हुए इस पावर प्लांट से मिलने वाले राजस्व का 70 प्रतिशत हिस्सा प्रशासन के सरकारी खजाने में जाएगा और शेष 30 फीसदी हिस्सा नगर निगम को दिया जाएगा। दरअसल, चंडीगढ़ एक लैंडलॉक शहर है और शहर में सोलर एनर्जी के लिए रूफटॉप सोलर या फ्लोटिंग एसपीवी पावर प्लांट ही विकल्प है। इन परियोजनाओं को चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) द्वारा डिजाइन करके पूरा किया गया है।
आईटी पार्क की पार्किंग में बन रहा एक मेगावाट का सोलर प्लांट
शहर में सबसे बड़ा सोलर प्लांट आईटी पार्क की पार्किंग में लगाया जा रहा है। यहां पर करीब एक मेगावाट का सोलर प्लांट लगाने का काम अब लगभग पूरा हो होने वाला है। आईटी पार्क की पार्किंग में इन सोलर पैनल्स के नीचे गाड़ियां भी खड़ी हो सकेंगी। पार्किंग के आधे हिस्से में यह प्लांट लगाया गया है और बाकी के हिस्से को खाली छोड़ा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे गाड़ियों की भी सुरक्षा होगी और सोलर से बिजली भी बनाई जा सकेगी। यूटी प्रशासन ने सेक्टर-42 की न्यू लेक की पार्किंग एरिया में भी शेड बनाकर 800 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया है। इसके अलावा कई सरकारी स्कूलों की पार्किंग में शेड बनाकर सोलर प्लांट लगाए गए हैं। सारंगपुर के बोटैनिकल गार्डन की पार्किंग में भी सोलर प्लांट लगाया गया है।