कोरोना से संकट: नॉन कोविड मरीजों के लिए भी आफत बना कोरोना, बिना इलाज के बढ़ने लगा मर्ज
अस्पतालों द्वारा टेलीकंसल्टेशन के लिए जारी किए गए नंबर लगाते-लगाते मरीज परेशान हैं।अचानक मरीजों का दबाव बढ़ने के कारण ज्यादातर नंबर व्यस्त बताए जाते हैं।
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चंडीगढ़ में कोरोना के मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण अस्पतालों की ओपीडी पूरी तरह बंद कर दी गई है। ऐसे में नॉन कोविड मरीजों के इलाज पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। अस्पतालों द्वारा टेलीकंसल्टेशन के लिए जारी किए गए नंबर लगाते-लगाते मरीज परेशान हैं।
अचानक मरीजों का दबाव बढ़ने के कारण ज्यादातर नंबर व्यस्त बताए जाते हैं। ऐसी स्थिति में नॉन कोविड मरीजों का मर्ज गंभीर होता जा रहा है। मरीजों का कहना है कि कोरोना के कारण उनका इलाज बंद कर गलत किया जा रहा है। उनके मर्ज के इलाज के लिए भी अस्पताल में अलग से व्यवस्था की जानी चाहिए।
कई मामले आ रहे सामने
केस- 2
हल्लोमाजरा निवासी तजिंदर सिंह के साथ भी इसी तरह की परेशानी है। तजिंदर को मधुमेह है। इन दिनों उनकी परेशानी काफी बढ़ गई है। वह जीएमसीएच- 32 में डॉ. मनदीप सिंगला की स्पेशल क्लिनिक में इलाज करवाते हैं, लेकिन ओपीडी सेवा पूरी तरह बंद हो जाने से उनका इलाज भी बाधित हो गया है। उनकी स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। तजिंदर सिंह का कहना है कि कोविड के कारण अन्य मरीजों को नजरअंदाज किया जाना गलत है।
जीएमएसएच- 16 की ओपीडी भी बंद
कोरोना संक्रमण की रफ्तार से स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। अगर मौजूदा समय में उसकी चेन को तोड़ने के लिए समुचित उपाय नहीं किए गए तो फिर नियंत्रण पाना असंभव होगा। इसे ध्यान में रखते हुए ही ओपीडी बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान भी इमरजेंसी व ट्रॉमा के मरीजों को पूर्व की ही तरह इलाज उपलब्ध होता रहेगा। -डॉ अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य