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सहकारिता विभाग में घोटाला : आईसीडीपी के नोडल अधिकारी नरेश गोयल गिरफ्तार
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सहकारिता विभाग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने बुधवार को संयुक्त रजिस्ट्रार व आईसीडीपी (एकीकृत सहकारी विकास परियोजना) के नोडल अधिकारी नरेश गोयल को गिरफ्तार कर उन्हें रिमांड पर लिया है। एसीबी की पूछताछ में घोटाले को लेकर और भी खुलासे हो सकते हैं।
पिछले कई दिनों से एसीबी की टीमें आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही थी। विभाग के कुछ कर्मियों के मुताबिक नरेश पिछले दो सप्ताह से कार्यालय नहीं आ रहे थे। उनके विदेश फरार होने की आशंका के चलतेे एसीबी ने एयरपोर्ट अलर्ट जारी किया था। एसीबी ने उन्हें घर से गिरफ्तार किया है। नरेश गोयल पर करोड़ों रुपये के गबन के अलावा आरोप है कि उसने घोटाले की मुख्य आरोपी अनु कौशिश समेत अन्य आरोपियों की गबन की राशि को प्रापर्टी में निवेश कराया था। इसके अलावा, नोडल अधिकारी होने के बावजूद कभी भी उन्होंने घोटाले के आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि फर्जी बिलों को धड़ाधड़ पास कराते रहे। जांच के दौरान नरेश गोयल की भूमिका सामने आने के बाद एसीबी ने गिरफ्तारी के लिए सरकार ने 17ए की परमिशन ली थी।
2017 से नोडल अधिकारी थे गोयल, दो बार हटाने की भी सिफारिश
नरेश गोयल 2017 से योजना के नोडल अधिकारी थे। उन्हें बैंक के एमडी होने के साथ-साथ नोडल अधिकारी की अतिरिक्त तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। घोटाला सामने आने के बाद सहकारिता रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से 31 जून, 2023 और 3 अगस्त को गोयल को पद से हटाने की सिफारिश की थी। हालांकि, दोनों बार उच्चस्तरीय अधिकारियों ने इस पर सवाल उठाते हुए फाइल को वापस कर दिया। घोटाला सामने आने पर 5 फरवरी को विभाग ने गोयल को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था। इनके स्थान पर हाउसफेड के एमडी, संयुक्त रजिस्ट्रार योगेश शर्मा को यह जिम्मेदारी दी है।
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सीएम की मंजूरी के बाद 3 अधिकारी किए जा चुके बर्खास्त
इस मामले में मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद तीन अधिकारियों को सहायक रजिस्ट्रार अनु कौशिश, सहायक रजिस्ट्रार रामकुमार और डिप्टी चीफ ऑडिटर योगेंद्र अग्रवाल को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। 6 फरवरी को तत्कालीन सहकारिता मंत्री बनवारी लाल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इनके अलावा, डीआर रोहित गुप्ता, ऑडिट ऑफिसर बलविंदर और कोऑपरेटिव बैंक सोनीपत के जीएम संजय कुमार के साथ साथ छह अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को सरकार पहले ही निलंबित कर चुकी है।
एसीबी का दावा 100 करोड़ रुपये का घोटाला
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने परत दर परत जांच करके दावा किया यह करीब 100 करोड़ रुपये का घोटाला है। इस मामले में अलग-अलग 12 एफआईआर दर्ज हैं। उधर, हरियाणा सरकार ने फैसला लिया कि इस मामले की जांच 1995 से लेकर अब तक की जाएगी। साथ ही बाहरी एजेंसी से विभाग का ऑडिट भी कराया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह साढ़े आठ करोड़ रुपये का घोटाला है।
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चंडीगढ़। सहकारिता विभाग में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने बुधवार को संयुक्त रजिस्ट्रार व आईसीडीपी (एकीकृत सहकारी विकास परियोजना) के नोडल अधिकारी नरेश गोयल को गिरफ्तार कर उन्हें रिमांड पर लिया है। एसीबी की पूछताछ में घोटाले को लेकर और भी खुलासे हो सकते हैं।
पिछले कई दिनों से एसीबी की टीमें आरोपी की तलाश में छापेमारी कर रही थी। विभाग के कुछ कर्मियों के मुताबिक नरेश पिछले दो सप्ताह से कार्यालय नहीं आ रहे थे। उनके विदेश फरार होने की आशंका के चलतेे एसीबी ने एयरपोर्ट अलर्ट जारी किया था। एसीबी ने उन्हें घर से गिरफ्तार किया है। नरेश गोयल पर करोड़ों रुपये के गबन के अलावा आरोप है कि उसने घोटाले की मुख्य आरोपी अनु कौशिश समेत अन्य आरोपियों की गबन की राशि को प्रापर्टी में निवेश कराया था। इसके अलावा, नोडल अधिकारी होने के बावजूद कभी भी उन्होंने घोटाले के आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि फर्जी बिलों को धड़ाधड़ पास कराते रहे। जांच के दौरान नरेश गोयल की भूमिका सामने आने के बाद एसीबी ने गिरफ्तारी के लिए सरकार ने 17ए की परमिशन ली थी।
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2017 से नोडल अधिकारी थे गोयल, दो बार हटाने की भी सिफारिश
नरेश गोयल 2017 से योजना के नोडल अधिकारी थे। उन्हें बैंक के एमडी होने के साथ-साथ नोडल अधिकारी की अतिरिक्त तौर पर जिम्मेदारी दी गई थी। घोटाला सामने आने के बाद सहकारिता रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से 31 जून, 2023 और 3 अगस्त को गोयल को पद से हटाने की सिफारिश की थी। हालांकि, दोनों बार उच्चस्तरीय अधिकारियों ने इस पर सवाल उठाते हुए फाइल को वापस कर दिया। घोटाला सामने आने पर 5 फरवरी को विभाग ने गोयल को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया था। इनके स्थान पर हाउसफेड के एमडी, संयुक्त रजिस्ट्रार योगेश शर्मा को यह जिम्मेदारी दी है।
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सीएम की मंजूरी के बाद 3 अधिकारी किए जा चुके बर्खास्त
इस मामले में मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद तीन अधिकारियों को सहायक रजिस्ट्रार अनु कौशिश, सहायक रजिस्ट्रार रामकुमार और डिप्टी चीफ ऑडिटर योगेंद्र अग्रवाल को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। 6 फरवरी को तत्कालीन सहकारिता मंत्री बनवारी लाल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इनके अलावा, डीआर रोहित गुप्ता, ऑडिट ऑफिसर बलविंदर और कोऑपरेटिव बैंक सोनीपत के जीएम संजय कुमार के साथ साथ छह अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को सरकार पहले ही निलंबित कर चुकी है।
एसीबी का दावा 100 करोड़ रुपये का घोटाला
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने परत दर परत जांच करके दावा किया यह करीब 100 करोड़ रुपये का घोटाला है। इस मामले में अलग-अलग 12 एफआईआर दर्ज हैं। उधर, हरियाणा सरकार ने फैसला लिया कि इस मामले की जांच 1995 से लेकर अब तक की जाएगी। साथ ही बाहरी एजेंसी से विभाग का ऑडिट भी कराया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह साढ़े आठ करोड़ रुपये का घोटाला है।