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नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी आएंगे चंडीगढ़, बाल शोषण और तस्करी वजह

Wed, 06 Sep 2017 03:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 06 Sep 2017 03:41 PM IST
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Nobel peace Laureate Kailash Satyarthi to visit chandigarh for a campaign
कैलाश सत्यार्थी का शताब्दी व्याख्यान - फोटो : अमर उजाला
नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी चंडीगढ़ आ रहे हैं और इस दौरे की वजह है बाल विवाह, बाल यौन शोषण और तस्करी के प्रति जागरुकता फैलाना। चंडीगढ़ अब 12 अक्तूबर को बाल यौन-शोषण और तस्करी के खिलाफ लड़ने की प्रतिज्ञा लेगा। चंडीगढ़ यह शपथ कैलाश सत्यार्थी दिलाएंगे।
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कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन की भारत यात्रा के साथ 12 अक्तूबर को चंडीगढ़ पहुंचेंगे। कन्याकुमारी से 11 सितंबर को शुरू होकर यह यात्रा 12 अक्तूबर को चंडीगढ़ पहुंचेगी। इसके बाद यह देहरादून होते हुए दिल्ली जाएगी। यह यात्रा स्वामी विवेकानंद के शिकागो में 1893 में दिए गए यादगार भाषण की वर्षगांठ मनाते हुए 11 सितंबर को कन्याकुमारी के विवेकानंद मेमोरियल से शुरू की जाएगी।
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चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में हरियाणा स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के लॉ आफिसर अविनाश गुप्ता और पंजाब यूनिवर्सिटी के गांधीवादी एवं शांति अध्ययन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में बड़े पैमाने पर बच्चों के लैंगिक शोषण और उनकी तस्करी हो रही है। उन्होंने बताया कि कई ऐसे मामले हैं जिसमें नाबालिग लड़कियों का बलात्कार उनके ही परिवार के सदस्यों या करीबी दोस्तों ने किया है।
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उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य है कि ऐसे भारत का निर्माण किया जाए जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार दोनों राज्यों में बाल विवाह एक चिंता का विषय है। पंजाब में 2011 की जनगणना के दौरान दो लाख से ज्यादा बच्चों की शादी और हरियाणा में करीब 2.5 लाख बच्चों की शादी, विवाह की कानून द्वारा निर्धारित उम्र से पहले कर दी गई।

रिपोर्ट में उल्लेख है कि पॉस्को 4 एवं 6 (बच्चों के साथ लैंगिक हिंसा) के अंतर्गत दर्ज 98 प्रतिशत मामलों में दोषी व्यक्ति बाल पीड़ित का जानने वाला था। इस मौके पर फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि कैलाश सत्यार्थी ने पीड़ितों या उनके परिवारों को बोलने से रोकने के लिए समाज में मौजूद भय के बारे में चिंता जताई। यह भय अपराधियों को आजादी से घूमने एवं और भी अधिक घृणित अपराधों के लिए प्रेरित करता है।

इस मौके पर मौजूद अविनाश गुप्ता ने कहा कि बच्चों के साथ हिंसा एवं नशाखोरी से जुड़े मुद्दे समाज को प्रताड़ित कर रहे हैं। भारत को संस्थागत एवं कानूनी सुधारों पर जोर देने की बेहद सख्त जरूरत है ताकि बच्चों को अन्यायपूर्ण घटनाओं से बचाया जा सके। गौरतलब है कि कैलाश सत्यार्थी पिछले 36 वर्षों से दुनिया भर के बच्चों की स्वतंत्रता, सुरक्षा और बचाव के लिए अभियान चला रहे हैं।


1998 में उन्होंने बाल श्रम के खिलाफ  वैश्विक मार्च का नेतृत्व किया जिसने आईएलओ को बाल मजदूरी के सबसे खराब स्वरूप के खिलाफ  अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्ताव पारित करने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2001 में उन्होंने शिक्षा यात्रा शुरू की, जिसके बाद शिक्षा के अधिकार को भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों में शामिल किया गया।
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