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Hindi News ›   Chandigarh ›   No Synthetic Track in Flying Sikh Milkha Singh City Chandigarh

'भाग मिल्खा भाग' कैसे कहोगे, फ्लाइंग सिख के शहर में कोई सिंथेटिक ट्रैक ही नहीं, कोचों की भी कमी

Mon, 13 May 2019 01:47 PM IST
खुशबू गोयल संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 13 May 2019 01:47 PM IST
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No Synthetic Track in Flying Sikh Milkha Singh City Chandigarh
फाइल फोटो
एथलेटिक्स में इंटरनेशनल मैप पर भारत को लाने वाले फ्लाइंग सिख के नाम से जाने वाले ओलंपियन मिल्खा सिंह के खुद के शहर में एक भी सिंथेटिक ट्रैक नहीं है। यह बात काफी हैरानी की है, मिल्खा सिंह की पत्नी भी यूटी खेल विभाग की डायरेक्टर रहीं हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में इसे बनाने की कोशिश भी की थी, लेकिन फंड की कमी के चलते यह बात नहीं बन पाई।
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नतीजा आज भी शहर में एथलीट बिना सिंथेटिक ट्रैक के अभ्यास में जुटे हैं। कुछ समय पहले जब ओलंपियन और स्प्रिंट स्टार पीटी ऊषा चंडीगढ़ पहुंचीं थीं तो वे भी इस बात को लेकर काफी हैरान थीं कि चंडीगढ़ जैसी माडर्न सिटी के पास एक भी सिंथेटिक ट्रैक नहीं है। खेल विभाग विभाग की ओर से 5 साल पहले सिंथेटिक ट्रैक बनाने की योजना बनाई थी।
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पहले यह सेक्टर 7 स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में बनाया जाना था, लेकिन उसके बाद इसे सेक्टर 46 स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में बनाए जाने की बात कही गई थी। दोनों जगह सिंथेटिक ट्रैक बनाने की योजना अभी तक सफल नहीं हो पाई।
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भारत में इन जगहों पर है सिंथेटिक ट्रैक

भारत के कई राज्यों में सिंथेटिक ट्रैक बिछे हुए हैं। वहां के एथलीट इस ट्रैक के जरिए मेडल बटोरने में लगे हैं। बिरसा मुंडा एथलेटिक स्टेडियम (रांची), जीएमसी बालयोगी एथलेटिक स्टेडियम (हैदराबाद, तेलंगाना), अंगुल स्टेडियम (ओडिसा), इंदिरा गांधी एथलेटिक स्टेडियम (सरूसजाई, गुवाहाटी, असम), इंदिरा गांधी स्टेडियम (अलवर, राजस्थान) के अलावा कई राज्य हैं जो सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक का प्रयोग कर रहे हैं।

सिंथेटिक ट्रैक से खिलाड़ियों को फायदा
सिंथेटिक ट्रैक एथलेटिक्स के खिलाड़ियों के लिए काफी महत्व रहता है। इंटरनेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं का आयोजन इसी ट्रैक पर होता है। यह खिलाड़ियों के लिए बहुत लाभदायक होता है। दौड़ते हुए अगर कोई खिलाड़ी असंतुलित होकर गिर जाए तो उसे कोई खास इंजरी नहीं होती। चंडीगढ़ में दो जगह पर एथलेटिक्स के खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। इनमें सेक्टर 7 स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में सिंडर ट्रैक है।

वहीं सेक्टर 46 स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में खिलाड़ी ग्रासी ट्रैक पर ही अभ्यास करते हैं। सिटी की 100 और 200 मीटर की एथलीट सिमरन कौर एसडी कॉलेज 32 की स्टूडेंट हैं। वे सेक्टर 46 स्थित स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में ग्रासी ट्रैक पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। इनके अनुसार इंटरनेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं के लिए सिंथेटिक ट्रैक की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

कोचों की कमी से जूझते खिलाड़ी

सिटी में एथलेटिक्स कोचों की कमी से खिलाड़ियों को काफी नुकसान पहुंच रहा है। सेक्टर 7 में सीनियर एथलेटिक्स कोच एसके जोशी के रिटायर्ड होने के बाद आउटसोर्सिंग के जरिए एक कोच रखा है। वहीं, सेक्टर 46 में सीनियर एथलेटिक्स कोच के हाल ही में रिटायरमेंट के बाद यहां कोई कोच नहीं हैं

मैंने अपने कार्यकाल में सिटी के एथलीटों के लिए सिंथेटिक ट्रैक बनाने के लिए कई बार कोशिश की थी, लेकिन उस समय फंड की कमी के चलते यह योजना सफल नहीं हो पाई।
- निर्मल मिल्खा सिंह, पूर्व यूटी खेल विभाग की डायरेक्टर

सिंथेटिक ट्रैक को लेकर इंजीनियरिंग विभाग ने अनुमानित बजट तैयार किया है, लेकिन आचार संहिता लगने के कारण सारे कार्य रुके हुए हैं। कोचों की कमी भी चुनाव के बाद पूरी की जाएगी।
- तेजदीप सिंह सैणी, डायरेक्टर खेल विभाग
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