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केदारनाथ आपदा: एक परिवार, मुसीबतों का पहाड़

Fri, 13 Jun 2014 04:16 PM IST
अशोक शर्मा/अमर उजाला, समालखा
अशोक शर्मा/अमर उजाला, समालखा Updated Fri, 13 Jun 2014 04:16 PM IST
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no relief to kedarnath tragedy victim family

केदारनाथ में कुदरत के कहर को एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन आज भी मच्छरौली के पूर्व सैनिक रामफल परिवार का दर्द और गम कम नहीं हुआ। उस पर प्रदेश सरकार की बेरुखी से पैदा होने वाली टीस उस दर्द को कम नहीं होने देती। रामफल केदारनाथ जाकर वापस नहीं लौटा, लेकिन मुसीबतों का पहाड़ उसके परिवार पर ऐसा गिरा कि वे आज तक संभल नहीं पाए।

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हरियाणा सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया, लेकिन अभी तक पीड़ित परिवार को कुछ नहीं मिला। उत्तराखंड सरकार द्वारा घोषित मुआवजे के बारे में तो कुछ जानकारी ही नहीं है।
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मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं बनने के कारण एक्स सर्विसमैन रामफल को मिलने वाली सुविधाओं से भी परिवार वंचित है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि पैसों की तंगी के चलते परिवार बच्चों का स्कूल में एडमिशन भी नहीं करा पाया।
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16 जून से लापता है रामफल

no relief to kedarnath tragedy victim family

गांव मच्छरौली निवासी पूर्व सैनिक रामफल 10 जून को घर से केदारनाथ दर्शन के लिए गए थे और 16 जून को प्रकृति के तांडव में न जाने वे कहां खो गए कि आज तक उनका कुछ पता नहीं चल सका।

परिजनों ने कई बार वहां पर जाकर रामफल को ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। अखबारों में भी उसकी गुमशुदगी की सूचना दी गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

रामफल के वापस नहीं लौटने पर तो जैसे उसके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ ही टूट गया।  रामफल के बेटे संजय ने बताया कि पिता को काफी तलाश किया, लेकिन उनके बारे में कुछ पता नहीं चल सका।

तब से उसकी मां कृष्णा देवी बीमार चल रही है। बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है। घर में अजीब सा सन्नाटा पसरा रहता है, लेकिन उन्होंने किसी तरह समय से समझौता कर लिया है।

पेंशन से चल रहा था दस सदस्यों का गुजारा

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संजय ने बताया कि उनका दस सदस्यों का परिवार है। इसमें उसकी मां कृष्णा देवी सहित उसका और उसके भाई का परिवार व बच्चे शामिल हैं। उसके पिता रामफल सेना से रिटायर हुए थे। परिवार का गुजारा उनकी पेंशन से चलता था।

केदारनाथ त्रासदी के बाद वह वापस नहीं लौटे तो परिवार के लिए गुजारा करना मुश्किल गया है। दोनों भाई भी मेहनत-मजदूरी कर इतना नहीं कमा पाते कि परिवार का सही से गुजर बसर हो सके। उन्हें कर्जा लेकर घर चलाना पड़ रहा है।

आर्थिक तंगी के चलते ही परिवार के बच्चों को वह स्कूल में एडमिशन तक नहीं दिलवा सके। मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण पिता को मिलने वाली पेंशन व अन्य सुविधाएं फिलहाल बंद पड़ी हैं।

कोई नहीं सुनता, धक्के खाने को मजबूर

no relief to kedarnath tragedy victim family

संजय ने बताया कि वह पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रशासन और सरकार से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वह सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटकर थक चुका है।

मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण पिता को मिलने वाली सुविधाएं बंद हो गई हैं। कई बार उन्हें मृत्यु प्रमाणपत्र जमा करवाने के लिए पत्र मिल चुके हैं, जिससे उनका वन रैंक वन पेंशन व अन्य सुविधाएं चालू हो सकें, लेकिन उनकी कोई नहीं सुनता।

रामफल की विधवा कृष्णा देवी ने बताया कि उन्हें पता चला है कि प्रदेश सरकार ने सहायता राशि का चेक जिला उपायुक्त कार्यालय में भेजा है, लेकिन उन्हें आज तक चेक नहीं मिला। उत्तराखंड सरकार से भी उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला है।

सरकार से लगाई गुहार

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पीड़ित परिवार ने प्रदेश सरकार से गुहार लगाते कहा कि उन्हें सहायता राशि जल्द दी जाए ताकि उनके परिवार की हालत सुधर सके।

इसके साथ उन्होंने पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भी सरकार से अपील की है ताकि उनके पिता को मिलने वाली पेंशन सहित अन्य सुविधाएं परिवार को मिल सकें और वह अपना गुजारा चला सकें।

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