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Chandigarh News: न दवा न डॉक्टर, आयुष मिशन में मरीजों को कैसे मिलेगा इलाज
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चंडीगढ़। एक तरफ सरकार आयुष पद्धतियों के प्रति लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। लगातार एक के बाद एक योजनाएं शुरू कर आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में विभाग की तरफ से की जा रही अनदेखी से मरीज परेशान हैं। स्थिति यह है कि सरकार की तरफ से आयुष पद्धतियों से जुड़ी दवाएं खरीदने के लिए बजट मिलने के बावजूद उसे खर्च किए बिना वापस कर दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, आयुष केंद्रों में डॉक्टर की उपलब्धता भी न के बराबर है। इस कारण एक-एक डॉक्टर तीन-तीन केंद्र संभालने को मजबूर हैं। इससे आयुष केंद्रों पर इलाज के लिए आने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। आयुष केंद्र में इन कमियों को लेकर जारी रिपोर्ट से इसकी पुष्टि हो रही है।
आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवा की नहीं हुई खरीद
सेंट्रल ऑडिट की तरफ से अप्रैल 2019 से मार्च 2024 के बीच निदेशक आयुष कार्यालय के रिकॉर्ड जांच पर यह हकीकत सामने आई है कि आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी दवाओं की खरीद में गंभीर लापरवाही की गई है। रिपोर्ट के अनुसार सभी आयुष केंद्रों के प्रभारी से 2020-21 के दौरान खरीदी जाने वाली दवाओं के लिए डिमांड देने का अनुरोध किया गया। बार-बार अनुरोध के बावजूद केंद्रों से दवाओं की सूची नहीं दी गई। इस कारण फरवरी 2021 में विभाग ने दवा के खरीद का बजट वापस कर दिया। इसके तहत आयुर्वेदिक में 17.59 लाख और होम्योपैथिक दवाओं की खरीद के लिए मिले 15 लाख रुपये वापस किए गए थे। कारण पूछे जाने पर विभाग की तरफ से ऑडिट महानिदेशक को कोई जवाब नहीं दिया गया।
केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी
ऑडिट की टीम ने केंद्रों की जांच के दौरान पाया कि वहां स्वीकृत पद के अनुसार कर्मचारियों के तैनाती नहीं की गई है। आयुष विभाग में शुरुआती दौर में 60 पद स्वीकृत थे। जिसमें से 14 पद सरकार के निर्देश पर समाप्त कर दिए गए। इसके अलावा मौजूदा समय में आठ पद खाली हैं। इस कारण अधूरे मानव संसाधन के बल पर केंद्रों को संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार विभाग 21 आयुर्वेदिक, 23 होम्योपैथिक और दो यूनानी चिकित्सा केंद्रों सहित 46 यूनिट का संचालन कर रहा है। जिसमें एक पंचकर्म सेंटर भी शामिल है। इन केंद्रों में 46 चिकित्सा अधिकारियों की जरूरत है। जबकि विभाग के पास केवल 25 चिकित्सा अधिकारी ही उपलब्ध हैं, जिसमें पांच नियमित, 10 आउटसोर्स और 10 राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना के तहत तैनाती की गई है। ऐसी स्थिति में चिकित्सा अधिकारियों की कमी के कारण सभी आयुष केंद्रों में नियमित रूप से डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करना बेहद मुश्किल हो रहा है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। इससे मुख्य रूप से मरीज के देखभाल की गुणवत्ता में कमी आएगी।
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आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवा की नहीं हुई खरीद
सेंट्रल ऑडिट की तरफ से अप्रैल 2019 से मार्च 2024 के बीच निदेशक आयुष कार्यालय के रिकॉर्ड जांच पर यह हकीकत सामने आई है कि आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी दवाओं की खरीद में गंभीर लापरवाही की गई है। रिपोर्ट के अनुसार सभी आयुष केंद्रों के प्रभारी से 2020-21 के दौरान खरीदी जाने वाली दवाओं के लिए डिमांड देने का अनुरोध किया गया। बार-बार अनुरोध के बावजूद केंद्रों से दवाओं की सूची नहीं दी गई। इस कारण फरवरी 2021 में विभाग ने दवा के खरीद का बजट वापस कर दिया। इसके तहत आयुर्वेदिक में 17.59 लाख और होम्योपैथिक दवाओं की खरीद के लिए मिले 15 लाख रुपये वापस किए गए थे। कारण पूछे जाने पर विभाग की तरफ से ऑडिट महानिदेशक को कोई जवाब नहीं दिया गया।
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केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी
ऑडिट की टीम ने केंद्रों की जांच के दौरान पाया कि वहां स्वीकृत पद के अनुसार कर्मचारियों के तैनाती नहीं की गई है। आयुष विभाग में शुरुआती दौर में 60 पद स्वीकृत थे। जिसमें से 14 पद सरकार के निर्देश पर समाप्त कर दिए गए। इसके अलावा मौजूदा समय में आठ पद खाली हैं। इस कारण अधूरे मानव संसाधन के बल पर केंद्रों को संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार विभाग 21 आयुर्वेदिक, 23 होम्योपैथिक और दो यूनानी चिकित्सा केंद्रों सहित 46 यूनिट का संचालन कर रहा है। जिसमें एक पंचकर्म सेंटर भी शामिल है। इन केंद्रों में 46 चिकित्सा अधिकारियों की जरूरत है। जबकि विभाग के पास केवल 25 चिकित्सा अधिकारी ही उपलब्ध हैं, जिसमें पांच नियमित, 10 आउटसोर्स और 10 राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना के तहत तैनाती की गई है। ऐसी स्थिति में चिकित्सा अधिकारियों की कमी के कारण सभी आयुष केंद्रों में नियमित रूप से डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करना बेहद मुश्किल हो रहा है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। इससे मुख्य रूप से मरीज के देखभाल की गुणवत्ता में कमी आएगी।
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