वाड्रा केस पर नरम पड़ी खट्टर सरकार, 5 कारण
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मनोहर लाल खट्टर सरकार ने वाड्रा लैंड डील मामले में नरम रुख अपनाते हुए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद कैबिनेट की बैठक भी हो चुकी है, लेकिन यह तय नहीं हो सका है कि जांच के बिंदु क्या होंगे। सरकार के नवनियुक्त मंत्री जो इस मामले में खुलकर बोल रहे थे, वे अब कानून के दायरे में जांच करवाने की बात कह रहे हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान के बाद मंगलवार को प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने भी वही बात दोहराई है। शर्मा ने कहा है कि सरकार किसी मामले में बदले की भावना से कार्रवाई नहीं करेगी। इस मामले में जो भी कार्रवाई होगी, वह कानून के दायरे में रह कर की जाएगी।
यह पूछे जाने पर कि सरकार ने अभी तक इस मामले में जांच के बिंदु भी तय नहीं किए हैं, शर्मा ने कहा कि अभी सरकार बनी है थोड़ा समय लगेगा। भाजपा अपने चुनावी मंच से इस मुद्दे पर खुलकर बोलती रही है। कैबिनेट मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और अनिल विज ने शपथ ग्रहण के बाद ही बयान दिया था कि सरकार वाड्रा लैंड डील मामले की जांच करवाएगी।
हालांकि, भाजपा ने यह इशारा किया है कि अगली कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी, लेकिन यह अगली कैबिनेट में ही तय होगा कि सरकार इस संदर्भ में कितनी गंभीर है।
लैंड डील मामले में जांच की घोषणा की थी
हरियाणा में सरकार बनाते ही सीएम खट्टर ने गांधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वाड्रा डील मामले में जांच की घोषणा की थी। भाजपा आलाकमान ने पहले ही सत्ता में आने पर वाड्रा लैंड डील मामले में जांच की घोषणा कर दी थी।
राज्य की नई सरकार में रविवार को शपथ लेने के कुछ घंटों के भीतर ही कैबिनेट मंत्रियों अनिल विज और कैप्टन अभिमन्यु ने ऐलान कर दिया था कि पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भूमि घोटालों की व्यापक जांच के लिए भाजपा सरकार जल्द ही आदेश जारी करेगी।
सभी भूमि घोटालों की जांच होगी
भाजपा नेता कैप्टन अभिमन्यु पहले ही पत्रकार वार्ता कर स्पष्ट कर चुके थे कि राज्यों के भूमि संबंधी मामलों में जांच के मामले में केंद्र सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता, लिहाजा हरियाणा में भाजपा सरकार बनते ही इस मामले की जांच करवाई जाएगी।
कैप्टन अभिमन्यु, कैबिनेट मंत्री ने बताया था कि हुडडा सरकार के कार्यकाल में हुए सभी भूमि घोटालों की जांच करवाई जाएगी। इसमें वाड्रा लैंड डील मामला भी शामिल है।
अनिल विज ने कहा कि किसानों से करीब 70 हजार एकड़ जमीन लेने के बाद भारी लाभ लेकर बेची गई। उन्होंने कहा था कि दोषी पाए जाने पर चाहे रॉबर्ट वाड्रा हों या भूपेंद्र सिंह हुड्डा किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
कैबिनेट मंत्री ने कहा था कि पिछले दस साल में हुए सभी घोटालों की जांच भाजपा सरकार करवाएगी। वाड्रा लैंड डील मामला भी इन्हीं में से एक है। हम इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को भी नहीं बख्शेंगे।
अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी
हरियाणा की नई भाजपा सरकार ने कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा से जुड़े जमीन सौदों की आपराधिक जांच कराएगी।
फर्जीवाड़ा साबित होने पर वाड्रा की न केवल संपत्ति जब्त होगी, बल्कि जमीन सौदे में शामिल अन्य कंपनियों और सौदे को गलत तरीके से मंजूरी देने वाले अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी।
ऐसे में वाड्रा के साथ-साथ रियल एस्टेट कंपनी डीलएफ पर भी कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा सरकार इन सौदों की सीबीआई से जांच कराने पर भी विचार कर रही है।
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने शनिवार को बताया कि प्रथमदृष्टया ही कई सौदे में अनियमितता बरता जाना साफ तौर पर दिखता है। खासतौर से वाड्रा को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि भूमि के बेचे जाने के बाद उसका लैंड यूज बदलना और आचार संहिता लागू होने से पहले वाड्रा-डीएलएफ जमीन सौदे को आनन फानन मंजूरी देना ऐसे ही मामले हैं।
ऐसे सौदे जांच के क्रम में न केवल रद्द होंगे, बल्कि वाड्रा समेत ऐसी अनियमितता में शामिल अन्य रियल एस्टेट कंपनियों की सौदे से जुड़ी संपत्ति जब्त की जाएगी।
सीबीआई से जांच करा सकती है सरकार
सूत्र के मुताबिक इस मिलीभगत में शामिल अधिकारियों पर भी गाज गिरनी तय थी। अगर आपराधिक जांच के क्रम में जरूरी हुआ तो नई सरकार इन सौदों की सीबीआई से जांच कराने से भी नहीं चूकेगी। महज लैंड यूज बदले जाने के कारण इन सौदों से हरियाणा सरकार को 3.9 लाख करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है।
मालूम हो राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद वाड्रा से जुड़े जमीन सौदे की जांच शुरू की गई थी। भाजपा का दावा है कि इस जांच में जमीन सौदे में कई अनियमितताएं पाई गई हैं। अब जबकि हरियाणा में भी सत्ता परिवर्तन हो गया है और नई सरकार रविवार को कार्यभार संभाल रही है, तब कार्यभार संभालने से पहले ही जमीन सौदों की आपराधिक जांच पर सहमति बन गई है।
हरियाणा में वाड्रा सहित कई अन्य रियल एस्टेट कंपनी पर 21 हजार एकड़ कृषि भूमि खरीदने के बाद सरकार से मिलीभगत कर इनका लैंड यूज बदलवाने का आरोप है। लोकसभा चुनाव के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सौदे को चुनावी मुद्दा बनाया था।
वाड्रा ने कोई गलती नहीं की
कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कहना है कि राबर्ट वाड्रा का चुनाव में नाम लेकर शोषण किया जा रहा है। उनका कहना है कि उनके नाम का हर चुनाव में मिसयूज किया जा रहा है और चुनाव के बाद यह मुद्दा समाप्त हो जाता है। उनका दोष सिर्फ इतना है कि नेहरु गांधी परिवार के बिटियां के साथ उनकी शादी हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव में वाड्रा का नाम खूब उछाला जा रहा है कि जबकि वाड्रा ने कोई गलती नहीं की है। कानून के तहत उन्होंने जमीन खरीदी और बेची है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता रवि प्रकाश प्रसाद ने कहा है कि वाड्रा को जेल भेज दो लेकिन वह यह भाजपा से पूछना चाहते है कि किस कानून के तहत उन्हें जेल भेजा जा सकता है? उनका कहना है कि अगर भाजपा को कोई दिक्कत है तो वह अदालत में क्यों नहीं केस डालते हैं।
वाड्रा ने जमीन का सीएलयू चेंज करवाया
दिग्विजय सिंह कहते हैं कि कि देश भर में 21 हजार एकड़ जमीन का सीएलयू बदला गया है लेकिन भाजपा को वाड्रा की 3 एकड़ जमीन का ही इश्यू याद है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में तो भाजपा की सरकार है वहां पर भी लोकसभा चुनाव में वाड्रा को लेकर काफी शोर डाला गया लेकिन अभी तक वहां की सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है।
दिग्विजय सिंह ने उक्त बातें शुक्रवार को सेक्टा-27 में प्रैसवार्ता के दौरान कहीं। दिग्विजय सिंह ने बार्डर एरिया में हुए सीजफायर के मामले में कहा कि जो पाकिस्तान और भारतीय सेना के बीच जो फ्लैग मीटिंग होनी थी वह खारिज नहीं होनी चाहिए क्योंकि चर्चा से ही हल निकलता है और पहले भी फ्लैग मीटिंग होती रही है। भाजपा हमेशा ही राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर राजनीति करती है जबकि ऐसे मामलों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।
क्या है लैंड डील का पूरा मामला
गुड़गांव की शिकोहपुर तहसील में मौजूद खसरा नंबर 730 की पांच बीघा 13 बिसवा जमीन का इंतकाल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा के नाम किया गया था, जिसे उन्होंने बाद में डीएलएफ को ट्रांसफर कर दिया।
लेकिन इस डील को वरिष्ठ आईएएस डॉ. अशोक खेमका ने चकबंदी महानिदेशक पद पर रहते हुए 15 अक्तूबर 2012 को रद्द कर दिया था।
इस पर प्रदेश सरकार ने खेमका का तबादला करने के अलावा उन्हें अन्य मामले में चार्जशीट कर दिया। लंबे अरसे बाद, अब इस मामले में खेमका के फैसले को रद्द करते हुए डीसी गुड़गांव द्वारा उक्त डील को मंजूरी दे दी गई।
2008 में सामने आया मामला
ये मामला दरअसल 2008 का है। प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा की कम्पनी स्काई लाइट्स हॉस्पिटैलिटिज ने 2008 में गुड़गांव की शिकोहपुर तहसील में मौजूद खसरा नंबर 730 की पांच बीघा 13 बिसवा जमीन (साढ़े तीन एकड़) ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से फर्जी कागजात के आधार पर खरीदी थी।
जमीन का सौदा साढ़े सात करोड़ में दिखाया गया। रजिस्ट्री में कॉरपोरेशन बैंक के चेक से भुगतान दिखाया गया। इसके बाद वाड्रा ने तत्कालीन हरियाणा सरकार से जमीन पर कॉलोनी बनाने का लाइसेंस लेकर 2008 में ही उसे 58 करोड़ रुपये में डीएलएफ को बेच दिया।
चकबंदी महानिदेशक पद पर रहते हुए अशोक खेमका की 21 मई 2013 को दी रिपोर्ट के मुताबिक जांच में पता चला कि जमीन खरीदने के लिए वाड्रा ने साढ़े 7 करोड़ रुपये की कोई पेमेंट की ही नहीं थी। रिपोर्ट में आरोप है कि वाड्रा ने 50 करोड़ रुपये लेकर डीएलएफ को सस्ते में लाइसेंसशुदा जमीन दिलवाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका अदा की।
ये सब फर्जीवाड़ा
अशोक खेमका के वकील अनुपम गुप्ता ने कहा कि ये सब फर्जीवाड़ा था। डीएएलएफ को कॉलोनी बनाने के लिए लाइसेंस चाहिए था, इसके लिए उसको कई सौ करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते लेकिन वाड्रा ने बिचौलिए की भूमिका निभा कर यह काम सिर्फ 50 करोड़ रुपये में करवा दिया।
इस डील को राज्य के चकबंदी महानिदेशक पद पर रहते हुए अशोक खेमका ने रद्द कर दिया था, उसके तत्काल बाद उनका तबादला कर दिया गया था। उन्हें अन्य मामले में चार्जशीट कर दिया।
अशोक खेमका ने 21 मई 2013 को राज्य सरकार की जांच कमेटी को दिए जवाब में ये रिपोर्ट दी थी। इसी रिपोर्ट में खेमका ने सभी रहस्यों से परदा उठाते हुए वाड्रा की कंपनी पर फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे।
जमीन सौदे में कुछ गैरकानूनी नहीं
इधर विभाग का कहना है कि जमीन सौदे से लेकर कॉलोनी के लाइसेंस देने तक में कुछ भी गैरकानूनी नहीं हुआ, वहीं, इंस्पेक्टर जनरल रजिस्ट्रेशन रहते हुए वाड्रा लैंड डील रद्द करने वाले खेमका आरोपों पर अब भी डटे हैं।
इधर हरियाणा सरकार ने इस डील पर एक जांच कमेटी बना दी थी लेकिन खेमका को इस कमेटी पर भरोसा नहीं था। उनकी दलील थी कि जांच कमेटी के तीन अफसरों में एडीशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी कृष्ण मोहन और एस एस जालान हैं।
खेमका के मुताबिक वाड्रा जमीन सौदे के वक्त कृष्ण मोहन खुद राजस्व विभाग के प्रमुख थे, जबकि जालान वाड्रा की कंपनी को कॉलोनी काटने का लाइसेंस देने वाले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के प्रमुख थे।