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निर्भया...सत्य परेशान हुआ पर पराजित नहीं

Sat, 21 Mar 2020 02:12 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2020 02:12 AM IST
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Nirbhaya ... Satya is upset but not defeated
चंडीगढ़। सात साल, तीन माह और चार दिन बाद आखिरकार निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया। इस सुबह के लिए देशभर के जाने कितने लोग इंतजार कर रहे थे। शुक्रवार को जब इस संबंध में शहर के लोगों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि न्याय में देर लगी, लेकिन देर सवेर देश की बेटी को न्याय मिला। शायद अब देश में स्थिति सुधरे। लड़कियों के साथ होने वाली रेप व अन्य घटनाओं पर रोक लग सके। इस पूरे घटनाक्रम से समाज एक सबक लेकर लड़कियों को समानता से अपने साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का मौका दे। अमर उजाला टीम ने इस पूरे मामले में शहर के लोगों से चर्चा की।
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फोटो :: सुशील के ट्रैक से ::::
फांसी का दिन ऐतिहासिक
फोटो-
निर्भया बलात्कार मामले में आरोपियों को फांसी देने वाला दिन पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है। निर्भया व उसकेपरिवार के अलावा पूरे देश के लिए न्याय की जीत है। यह मामला पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए न्यायपालिका की प्रतिज्ञा का एक आदर्श है।
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- प्रो. राजिंदर कौर, यूआईएलएस पीयू
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देर से ही सही न्याय तो मिला
फोटो
एक मां ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया। देर से ही सही लेकिन न्याय मिला है। रेप जैसे मामलों में तत्काल सजा का प्रावधान होना चाहिए। कोई देरी की रणनीति न अपना सके। इस फांसी की सजा से लोगों में डर बनेगा ताकि कोई ऐसी हरकतें न कर सकें।
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- डॉ. तिलक राज, असिस्टेंट प्रोफेसर, यूबीएस पीयू
पूरी मानव जाति के लिए न्याय
फोटो-
निर्भया कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। ऐसे में दोषियों को सजा तो कठोर से कठोर मिलनी ही चाहिए थी, जो न्यायालय ने दी। इस फांसी की सजा से निर्भया को ही नहीं बल्कि पूरी मानव जाति को न्याय मिला है। इसका बड़ा संदेश समाज में जाएगा।
- डॉ. पूजा जायसवाल, सहायक प्रोफेसर, आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ मोहाली
न्यायालय पर सबको भरोसा
फोटो-
निर्भया कांड जघन्य था, इसके दोषियों को कुछ समय बाद ही फांसी दे देनी चाहिए थी लेकिन देरी हुई। सात साल लग गए। हालांकि न्यायालय पर सबको भरोसा है, उन्होंने जो निर्णय लिया वह ठीक रहा। इस फांसी की सजा से समाज में एक संदेश गया है, जो अन्य लोगों को राह दिखाएगा। वह गलत काम करने से पहले सोचेंगे।
- डॉ. रोहित के शर्मा, रसायन विज्ञान विभाग, पीयू
नोट ::: फोटो मोनिका के ट्रेक से
बेटी के साथ मां को भी मिला इंसाफ
फोटो-
दोषियों को सजा मिलने से एक बेटी के साथ मां को भी इंसाफ मिला है। सात साल से निर्भया की मां न्याय के लिए संघर्ष कर रहीं थीं। फांसी से आरोपियों के मन में डर पैदा होगा। बेटियां तभी आगे बढ़ेंगी यदि वह सुरक्षित होंगी। इस सजा से समाज को नया संदेश जाएगा।
- सुनिता धवन, प्रधान महिला सशक्त्तिकरण कमेटी
एक मां होने के नाते आज खुश हूं
इस घटना के बाद बेटियों में डर का माहौल बन गया था। निर्भया के परिवार को आज राहत मिली है। दुष्कर्म के सभी मामलों का जितना जल्दी हो सके निपटान किया जाना चाहिए। दोषियों को फांसी होने से एक मां होने के नाते मैं इससे बहुत खुश हूं। आगे भी ऐसे दोषियों को नहीं बख्शा जाना चाहिए।
- जसविंदर कौर, डायरेक्टर सोशल वेलफेयर बोर्ड
कानून सख्त होगा तभी रहेंगी बेटियां सुरक्षित
एक कहावत है किबेटियां सबकी साझी होती हैं। निर्भया भी सबकी बेटी थी। देश के कानून, निर्भया की मां और वकील की मेहनत को मैं सलाम करती हूं। देश की बेटियां सुरक्षित रहें, यह तभी संभव होगा जब सख्त कानून होगा। इस सजा से पूरे देश को न्याय मिला है।
- नेहा अरोड़ा, प्रधान आरडब्ल्यूए सेक्टर-38
फैसलों में देरी से बढ़ती है आरोपियों की हिम्मत
फोटो-
एक मां जब अपनी बेटी को घर से बाहर भेजती है तो उसके मन में कहीं न कहीं डर होता है। जिस दिन यह डर पूरी तरह से निकल जाएगा, उस दिन निर्भया को असली मुक्ति मिलेगी। आरोपियों की हिम्मत अदालत के फैसले में देरी होने से बढ़ती है। निर्भया को देर से ही सही लेकिन न्याय मिला।
- दीपाली, डायरेक्टर रोयल अकेडमी सेक्टर-40
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नोट ::: फोटो कविता के ट्रैक से
देरी से ही सही न्याय मिला
फोटो-
निर्भया को देरी से ही सही न्याय मिला है। हमारे न्यायिक प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत है। रेप जैसी घटनाओं में जल्दी सुनवाई होनी चाहिए, जिससे लोगों का कानून में विश्वास बना रहे। देश की अदालतों में जजों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही समय सीमा भी न्याय के लिए निर्धारित की जानी चाहिए।
- निखिल नर्मेता, एनएसयूआई अध्यक्ष, पीयू
जब सुबूत हों तो न्याय जल्द मिले
फोटो-
रेप जैसी घटनाओं में, जिसमें फॉरेंसिक रिपोर्ट और सारे सुबूत पुलिस और अदालत के पास हों। ऐसे मामलों में एक महीने के अंदर सुनवाई होनी चाहिए। मुझे लगता है हैदराबाद मामले में जो एनकाउंटर हुआ, वो भी गलत है, जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। जांच के आधार पर ही दोषी को सजा होनी चाहिए।
- पाहुल, जिला अध्यक्ष, एनएसयूआई चंडीगढ़
सुनवाई जल्द होनी चाहिए
फोटो-
मैं निर्भया की माता का आभार व्यक्त करना चाहती हूं, जिन्होंने सात साल लंबी लड़ाई लड़ी है। मुझे दुख है कि समाज में आज भी दोषियों की पैरवी करने वाले वकील मौजूद हैं। इसके साथ ही कोर्ट में रेप और छेड़छाड़ केलंबित मामलों में जल्द सुनवाई होनी चाहिए। रेप की घटनाओं में सुनवाई के दिन तय होने चाहिए ताकि जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
- दीक्षा भनोट, प्रदेश सहमंत्री, एबीवीपी पंजाब
मानसिकता बदलनी होगी
फोटो-
निर्भया और उसके परिवार को सात साल बाद न्याय मिला है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले ने ऐसे मामलों में न्याय की उम्मीद जगाई है। इसके अलावा लोगों को भी सामाजिक जिम्मेदारी निभानी होनी और लड़कियों के प्रति अपनी मानसिकता बदलनी होगी। लंबित मामलों में जल्द सुनवाई होनी चाहिए।
- चिरांशु रतन, प्रदेश मंत्री, एबीवीपी
फोटो मोनिका के ट्रैक से वीणा जी ने भेजे हैं:::::
ऐसे मामलों में हो तत्काल इंसाफ
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दोषियों को फांसी देना देश के लिए खुशी की बात है। न्याय मिलने में 7 साल लग गए यह दु:खद है। ऐसे मामलों में तत्काल इंसाफ मिलना चाहिए। अब न्याय के लिए इतना लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए त्वरित न्याय प्रक्रिया बनाई जानी चाहिए।
-डॉ उत्तम ठाकुर, अध्यक्ष पीजीआई रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन
न्याय प्रणाली में सख्त प्रावधान
फोटो-
देर से ही सही पर इंसाफ हुआ है। निर्भया के प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं। लचर न्याय व्यवस्था लगातार कचोटती रही है। कम से कम ऐसे मामलों में तो कानून में न्याय के सख्त प्रावधान होने चाहिए। न्याय समय से मिलना चाहिए।
- शोभना पठानिया, अध्यक्ष जीएमएसएच नर्सेज़ वेलफेयर एसोसिएशन
आज असंख्य माताओं को मिली शांति
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निर्भया की मां के देश की उन असंख्य माताओं को शांति मिली होगी जिनकी बेटियां ऐसी घटनाओं की शिकार हुई हैं। सरकार को ऐसे मामलों में ऑन स्पॉट न्याय का कानून बना देना चाहिए, जिससे अपराधियों में खौफ उत्पन्न हो। समाज में इस फांसी से संदेश कड़ा गया है।
- नम्रता टांगड़े, फिजियोथेरिपिस्ट जीएमएसएच
न्याय मिलने में गुजरे सात साल
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ऐसे मामलों में इंसाफ मिलने में सात दिन का समय भी नहीं लगना चाहिए था लेकिन देखते ही देखते सात साल गुजर गए। अगर खुलेआम अपराध करने वालों को सजा देने में इतना समय लग गया तो छिपे अपराधियों को कितने साल में सजा मिलेगी।
डॉ. विकास शर्मा, नेशनल स्किन हॉस्पिटल
न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी करना गलत
फोटो--
न्याय मिलने से एक बार फिर यह साबित हुआ है कि बुरे काम का बुरा नतीजा। अपराधियों को यह बड़ा संदेश मिलेगा कि हर अपराध की सजा मिलती जरूर है। बाकी फैसले में दरी पर देश की न्याय व्यवस्था को लेकर कोई टिप्पणी करना ठीक नहीं।
-डॉ. राजेश धीर, आईएमए अध्यक्ष चंडीगढ़
फोटो== रिशु के ट्रैक से :::
न्याय की जीत हुई है
यह बहुत ही सराहनीय फैसला है। भले ही फांसी होने में सात साल बीत गए पर अंत में न्याय की जीत हुई है। रेप या ऐसे अपराधों पर सरकार को कोई सख्त कानून लाना चाहिए। ताकि सजा देने में सात साल न लग जाए। इन दोषियों को फांसी देकर जनता का न्यायालय पर विश्वास और भी बढ़ गया है।

- रोहन कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता
न्यायिक व्यवस्था में खामियों पर विचार जरूरी
आज का फैसला बहुत ही सही था पर देर से हुआ। यह दर्शाता है कि जो भी न्यायिक व्यवस्था में खामियां हैं, उनके ऊपर विचार करना चाहिए। इतने साफ और स्पष्ट केस में भी इंसाफ होने में सात साल लगना न्यायिक व्यवस्था की बहुत बड़ी कमी है। इसके अलावा पांचवां आरोपी जो कि नाबालिग था उसे भी सजा होनी चाहिए।
- रविकांत ओझा, ज्योतिषाचार्य
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