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पंजाब सरकार का महत्वपू्र्ण फैसला, पॉक्सो एक्ट के तहत नौ और फास्ट ट्रैक अदालतों का होगा गठन

Tue, 16 Feb 2021 01:49 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 16 Feb 2021 01:49 AM IST
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Nine more fast track courts will form under POCSO Act in Punjab
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

पंजाब सरकार ने सोमवार को अंतर-विभागीय बैठक में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए जांच और प्रॉसिक्यूशन अमले को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का फैसला लिया है। इसके तहत बच्चों के शारीरिक शोषण के केसों से निपटने के लिए पॉक्सो एक्ट के तहत नौ और फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और राज्य के सभी 27 पुलिस जिलों में सेक्सुअल असाल्ट रिस्पांस टीमों के गठन का फैसला लिया गया है।

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उच्चस्तरीय ऑनलाइन बैठक के दौरान मुख्य सचिव विनी महाजन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 2016 से 2020 तक महिलाओं और बच्चों से संबंधित लंबित मामलों का पहल के आधार पर निपटारा किया जाए और इन मामलों में उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन शोषण के अपराधों की जांच में तेजी लाने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) तैयार करने के निर्देश दिए।

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डीजीपी दिनकर गुप्ता ने इस दौरान बताया कि पंजाब पुलिस ने शारीरिक शोषण के मामलों से निपटने के लिए सभी 27 पुलिस जिलों में सेक्सुअल असाल्ट टीमें गठित करने की योजना तैयार कर ली है। साथ ही ऐसे मामलों की जांच की निगरानी के लिए साप्ताहिक बैठकें की जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी थानों में हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं और थानों में आने वाली महिला शिकायतकर्ताओं की समस्याएं केवल महिलाकर्मी ही सुनेंगी।

मासिक आधार पर रखी जाएगी नजर
मुख्य सचिव ने लंबित मामलों की महीनावार प्रगति का जायजा लेने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) गृह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कमेटी गठित करने का आदेश दिया और स्वास्थ्य, पुलिस व प्रॉसिक्यूशन विभाग को प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अलावा महिलाओं व बच्चों से जुड़े आपराधिक मामलों की बेहतर जांच के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए।

दुष्कर्म के मामलों के लिए सात फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं कार्यरत
मुख्य सचिव ने गृह विभाग को नौ फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना में तेजी लाने की हिदायत दी, जिसके लिए सरकार की ओर से मंजूरी दे दी गई है और तीन फास्ट ट्रैक कोर्ट पहले ही लुधियाना और जालंधर में चल रही हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में दुराचार के मामलों से निपटने के लिए सात फास्ट ट्रैक कार्ट पहले ही कार्यशील हैं।

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