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रियेलिटी चेक: पीजीआई के लिए दो रैन बसेरे भी पड़े कम, बाहर सो रहे लोग

Fri, 23 Dec 2016 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 23 Dec 2016 11:49 PM IST
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night shelter, people are sleeping outside, chandigarh pgi
Night shelter in chandigarh - फोटो : अमर उजाला
पीजीआई के बाहर बनाए गए दो रैन बसेरा कम पड़ गए हैं। सैकड़ों लोग बाहर सो रहे रहे हैं। दूसरी ओर शहर में बनाए गए कई रैन बसेरे ऐसे भी हैं, जिनमें सोने के लिए लोग ही नहीं हैं। ऐसे में जिस उद्देश्य के लिए ये रैन बसेरे बनाए हैं, वह पूरे नहीं हो रहे। जिस जगह लोगों को इनकी ज्यादा जरूरत है वहां यह उपलब्ध नहीं है। अमर उजाला ने देर रात शहर के कई रैन बसेरों का जायजा लिया।
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पीजीआई के बाहर नेहरू अस्पताल के गेट पर दो रैन बसेरे बनाए गए हैं। जिसमें एक रैन बसेरा महिलाओं के लिए और एक पुरुषों के लिए है। दोनों ही फुल हैं। कुछ महिलाएं रैन बसेरे का पर्दा उठाकर अंदर जगह तलाशती हैं और फिर जगह न होने पर मजबूरन बाहर आकर खुले में सोने की जगह ढूंढती हैं। रैन बसेरा में जगह न मिलने वाले लोगों ने दोनों रैन बसेरों के बीच पेड़ों के नीचे ही आसन लगा रहे हैं। 200 से अधिक लोग पीजीआई के बाहर और अंदर पेड़ों के नीचे ठंड से ठिठुरते मिले। कुछ महिलाओं के साथ तो छोटे-छोटे बच्चे भी थे। पीजीआई इमरजेंसी के बाहर भी दीवार के सहारे 50 से अधिक पुरुष और महिलाएं दुबके मिले।
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वहीं गवर्नमेंट मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल-16 (जीएमएसएच) के बाहर भी रैन बसेरा बनाया गया है। 20 से 25 लोगों की क्षमता वाले इस रैन बसेरे में केवल 3 लोग मिले। इसका कारण यह भी है कि जीएमएसएच-16 में अधिकतर लोकल मरीज होते हैं। इलाज के बाद वह रात को घर लौट जाते हैं। हो सकता है ऐसी भी संभावना है कि लोगों को अभी इसकी जानकारी न हो। वैसे पीजीआई के मुकाबले यहां मरीजों की संख्या कम रहती है।
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सेक्टर-19 में शनि मंदिर के सामने बनाए रैन बसेरा के बाहर खुले में सोते कई बाबा और अन्य व्यक्तियों को देखकर लगा कि यह रैन बसेरा भी फुल है। रैन बसेरे के अंदर दाखिल एक व्यक्ति ही सोता मिला। यह देखकर सवाल उठा कि आखिर रैन बसेरा होने के बाद भी लोग बाहर क्यों सो रहे हैं। रैन बसेरा के केयर टेकर से पूछा तो उसने बताया कि यह बाबा कहने के बाद भी बाहर ही सो रहे हैं। कहने पर केयर टेकर ने एक बार फिर सभी लोगों से जाकर रैन बसेरा में सोने के लिए कहा। लेकिन जवाब मिला कि आसन लगा लिया है कल देखेंगे। वहीं मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि यह लोग खुले में इसलिए सोते हैं, ताकि कोई इन्हें कंबल दे जाए।

समाज कल्याण विभाग ने बनाए हैं रैन बसेरा

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Night shelter in chandigarh - फोटो : अमर उजाला
समाज कल्याण विभाग ने बनाए हैं रैन बसेरा
समाज कल्याण विभाग ने शहर में अलग-अलग जगह लोगों की जरूरत को देखते हुए रैन बसेरा बनाए हैं। इनमें सेक्टर-9 डी की मार्केट के पीछे, 2 रैन बसेरे पीजीआई के बाहर, सेक्टर-20 लक्ष्मी नारायण मंदिर के पास, सेक्टर-22, जीएमसीएच-32 के सामने, सेक्टर-19 में शनि मंदिर के सामने और सेक्टर-27/28 पाल ढाबा के पास लोगों के सोने की व्यवस्था है। रैन बसेरा बनाने से पहले विभाग ने उन जगहों का सर्वे भी कराया जहां अधिक लोग बाहर सोते हैं। इसके बावजूद कई जगह रैन बसेरे फुल हैं तो कई जगह खाली हैं। रैन बसेरे में कोई भी निशुल्क रात गुजार सकता है। इसमें लोगों को बिस्तर और गर्म कंबल भी उपलब्ध कराया जाता है।

दूर से इलाज के लिए आते हैं लोग
बाहर खुले में सो रही मुजफ्फरनगर निवासी मोहसेम ने बताया कि उनका लंबा इलाज पीजीआई से चल रहा है। यहां तक आने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है। इसलिए यहीं रुके हैं। रैन बसेरा में जगह नहीं मिली तो बाहर खुले में ही सोना पड़ रहा है।

शौचालय की दिक्कत 
सहारनपुर के मोहम्मद सलीम ने बताया कि उसकी मां नसीब की रसोली का इलाज पीजीआई से चल रहा है। रैन बसेरा में उन्हें जगह तो मिल गई। लेकिन इनके आस-पास कोई शौचालय नहीं होने से उन्हें परेशानी हो रही है। मरीज को रात के समय लंबी दूरी तय कर अंदर पीजीआई ले जाने में बड़ी दिक्कत होती है।

पीजीआई में एक और रेन बसेरा बनाया जाए
कुल्लू निवासी सुनील ने कहा कि एक रैन बसेरा और बनना चाहिए। पीजीआई के तीमारदारों को रात गुजारने में बड़ी दिक्कत हो रही है। प्रशासन इन लोगों के बारे में सोचे और एक रैन बसेरा ट्रामा सेंटर के पास पार्क में बनवाए। मरीज के पास रहने वाले तीमारदारों को इससे फायदा मिलेगा।
 
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