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ब्यास में शीरा फेंकने का मामला पहुंचा दिल्ली, पंजाब-राजस्थान और केंद्र सरकार तलब

Thu, 24 May 2018 10:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 24 May 2018 10:20 AM IST
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ngt notice to punjab, ranjasthan and central government, poisonic sheera in beas
कोर्ट
चड्ढा शुगर मिल द्वारा ब्यास नदी में जहरीला शीरा फेंकने से जलीय जीवों की मौत का मामला दिल्ली पहुंच गया है, वजह बने आप नेता। नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा व अन्य आप विधायकों द्वारा इस संबंध में दायर याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस जावेद रहीन ने खुद संज्ञान लिया है। ट्रिब्यूनल ने केंद्र, पंजाब, राजस्थान सरकारों, केंद्रीय व पंजाब के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को वीरवार सुबह साढ़े दस बजे का नोटिस जारी कर तलब किया है।
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जस्टिस जावेद द्वारा संज्ञान लेने के बाद एनजीटी इस मामले में अब खुद शिकायतकर्ता बन गया है। आप विधायकों ने अपनी याचिका में कहा था कि नदियों, नहरों और ड्रेनों में गंभीर प्रदूषण की रिपोर्टों ने पंजाब को हिला दिया है। इसकी शुरुआत कीड़ी अफगाना स्थित चड्ढा शुगर मिल्स द्वारा ब्यास नदी में जहरीला पदार्थ फेंकने से हुई। इससे हजारों के तादाद में मछलियां मर गईं, डॉल्फिन और घड़ियालों की जिंदगी भी खतरे में पड़ गई है। हरिके पत्तन पर सतलुज और ब्यास मिलते हैं।
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यहीं से सरहिंद नहर और राजस्थान फीडर निकलते हैं। यहां से पंजाब के दक्षिण इलाकों और राजस्थान को पीने और सिंचाई के लिए पानी जाता है। अब राजस्थान फीडर के जरिए वहां भी जहरीला पानी पहुंचने की खबरें आ चुकी हैं।याचिका में कहा गया है कि चड्ढा शुगर मिल की घटना के अलावा राज्य की सभी नदियों, नहरों, ड्रेनों में औद्योगिक  व मेडिकलवेस्ट, अन-ट्रीटेड सीवरेज डिस्चार्ज फेंका जा रहा है। पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह की शुगर मिल द्वारा भी नजदीकी ड्रेन में जहरीले केमिकल फेंके जा रहे हैं।
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इससे लोगों में कैंसर, हैपेटाइटिस समेत कई गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। दक्षिण पंजाब में भूजल में हैवी मेटल, यूरेनियम की बड़ी मात्रा है, इसलिए वहां के लोग सरहिंद कैनाल का पानी पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लुधियाना के बुड्ढा नाला में जहरीला इंडस्ट्रियल वेस्ट डाला जाता है, जोकि सतलुज में मिल जाता है। ज्यादातर औद्योगिक इकाइयां प्रदूषण कंट्रोल के मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। सियासी दबाव के कारण प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड कोई कार्रवाई नहीं करता।


याचिका में ट्रिब्यूनल से मांग की गई कि तुरंत दखल देकर इंडस्ट्री पर प्रदूषण कानून सख्ती से लागू करवाए जाएं। पंजाब को निर्देश दिए जाएं कि अवशेष नहरों, नदियों में न फेंके। साथ ही चड्ढा शुगर मिल प्रबंधकों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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