तैयार रहें, दोबारा फिर मिलेगा नेपली टू कांसल ट्रैकिंग पर जाने का मौका

ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 03 Oct 2017 01:53 PM IST
nepali to kansal trekking at chandigarh
नेपली टू कांसल ट्रैकिंग
दो अक्तूबर को मन नहीं भरा तो निराश न हों, बल्कि तैयार रहें। नवंबर और​ दिसंबर महीने में फिर से नेपली टू कांसल ट्रैकिंग पर जाने का मौका मिलेगा। अब 11 नवंबर को ट्रैकिंग होगी। इसके लिए वन विभाग बाकायदा रजिस्ट्रेशन भी मांगेगा, इसके बाद 17 दिसंबर को वन विभाग ने ट्रैकिंग की तारीख तय की है। दो अक्तूबर को नेपली टू कांसल की ट्रैकिंग का सफर साढ़े 7 की बजाय साढ़े 9 किमी हो गया, इसके बावजूद एक हजार से ज्यादा लोगों ने बिना थके ट्रैकिंग की।

ट्रैकिंग के बाद लोग थकान कम और अपने आप को फिट ज्यादा महसूस कर रहे थे। ट्रैकिंग करने वालों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल रहीं। हर बार नेपली के एंट्री गेट पर रजिस्ट्रेशन के बाद से दो किमी आगे तक बस से छोड़ा जाता था, लेकिन इस बार यहां से बस की सुविधा नहीं थी। सिर्फ कांसल लाग हाट पहुंचने के बाद बस की सुविधा उपलब्ध रही, जहां बसों से लोग वापस नेपली पहुंचे। ट्रैकिंग सुबह 6.30 बजे वन विभाग के संरक्षक टीसी नोटियाल ने ट्रैकिंग फ्लैग आफ किया।

कुल 10 ग्रुप में एक हजार से ज्यादा लोगों ने इसमें भाग लिया। हर समूह में 90 से 100 लोग थे। वन विभाग ने ट्रैकर्स की खूब सेवा पानी की। मानूसन के कारण पिछले चार माह से ट्रैकिंग बंद थी, इसलिए ट्रैकिंग खुलने का लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। एंट्री गेट पर ही पानी की बोतल, टी शर्ट, कैप और मिश्री के पैकेट दिए। जबकि आधी ट्रेकिंग होने पर जूस और ग्लूकोज भी दिया। जब साढ़े 9 किमी का सफर तय करने के बाद लोग कांसल में लाग हाट पहुंचे तो रिफ्रेशमेंट और फल भी दिए गए।

ट्रैकिंग के समापन पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ। जिसमें वन और पर्यावरण से संबंधित सवाल जवाब लोगों से पूछे और विजेताओं को सम्मानित किया गया। ट्रैकिंग में भाग लेने वाले सेक्टर-38 निवासी मनोज सिहान ने कहा कि ट्रैकिंग की इतनी चाह थी कि उन्हें रात को नींद भी नहीं आई। उन्होंने बताया कि वन विभाग ने अच्छी व्यवस्था की। यहां पर आकर लगता है जैसे पर्यावरण के करीब पहुंच गए हैं। शांत वातावरण के बीच पक्षियों की आवाज सुकून दे रही है। कई वाचर अपने कैमरों से पक्षियों और प्रकृति की तस्वीरें कैद करते दिखे। ट्रैकिंग के रास्ते में जगह जगह एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने जागरूकता बोर्ड भी लगाए हुए थे।

 

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