Punjab News: बोरवेल में फंसे सुरेश की नहीं बची जान, 44 घंटे बाद निकाला गया, 80 फुट की गहराई में मिले
रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने से पहले एनएचएआई के अधिकारियों ने कहा था कि सुरेश 20 फुट मिट्टी के नीचे दबा है, हालांकि अब तक 70 से 80 फीट तक खोदाई हो चुकी है। एनडीआरएफ की टीम ने 38 घंटे में तीन बार रेस्क्यू करने की कोशिश की लेकिन मिट्टी खिसकने से हर बार नाकाम रहे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
करतारपुर-कपूरथला रोड पर स्थित गांव बसरामपुर में निर्माणाधीन दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे में मशीन ठीक करने बोरवेल में उतरे मैकेनिक को 44 घंटे बाद बाहर निकाला गया। उन्हें सिविल अस्पताल जांलधर पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शनिवार रात आठ बजे फंसे हरियाणा के जींद निवासी सुरेश को सोमवार शाम 3:55 बजे बाहर निकाला गया। सत्यवान ने कहा कि गड्ढे से निकालने के बाद उन्हें भाई को देखने भी नहीं दिया गया।
सुरेश को 55 वर्षीय साथी पवन कुमार, एनडीआरएफ के गुलशन और मनोज ने गड्ढे से बाहर निकाला। इससे पहले दो बजकर 50 मिनट पर भी टीम रेस्क्यू करने नीचे गई थी, तब सुरेश रेत में बुरी तरह से फंसा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पता चलेगा कि मौत कब और कैसे हुई है। सुरेश के हाथ पर चोट के निशान मिले हैं, जिसे डॉक्टर खुदाई के दौरान लगे होने की आशंका जता रहे हैं।
सुरेश यादव निवासी करसौला, थाना जुलाना जिला जींद (हरियाणा) के रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरफ, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, प्रशासन और कंपनी के कर्मचारियों ने 44 घंटे काम किया। इस दौरान एक बड़ी और सात छोटी क्रेन से 70 से 80 फुट गहरा गड्ढा और 500 फुट आसपास की मिट्टी को हटाया गया।
एनडीआरएफ की चार कोशिशें बेकार, पांचवीं में निकाला
जालंधर के गांव बसरामपुर में एनडीआरएफ, एनएचआई और प्रशासन की टीमें लगातार बोरवेल में फंसे हरियाणा के जिला जींद निवासी सुरेश यादव को रेस्क्यू करने में जुटी थीं। सोमवार सुबह छह बजे के करीब सुरेश साथी पवन के हाथ आया पर फिर गड्ढे में ज्यादा मिट्टी गिरने से राहत कार्य रुक गया। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने से पहले एनएचएआई के अधिकारियों ने कहा था कि सुरेश 20 फुट मिट्टी के नीचे दबा है लेकिन जब खोदना शुरू किया तो 70 से 80 फीट पर जाकर तलाश खत्म हुई।

जब लगा कि सुरेश तक पहुंच गए तो मिट्टी से भर जाता था गड्ढा
शनिवार रात से शुरू रेस्क्यू ऑपरेशन में जब बचाव टीमों को लगा कि वह सफल होने वाले हैं तब मिट्टी ने खलल डाला। जब भी गड्ढे की मिट्टी लगभग निकल जाती और ऑपरेशन के लिए टीमें तैयार होती थी तो मिट्टी फिर से भर जाती थी। सुबह छह बजे के करीब सुरेश उन्हें दिखाई दिया तो वह एनडीआरएफ टीम के साथी के साथ नीचे उतरे और बेल्ट में हुक फंसा दिया। तभी अचानक से मिट्टी सरकी और साथी सुरेश फिर 20 फुट दूर हो गया।