1965 से पाकिस्तान की जेल में बंद है सैनिक, परिवार ने सिद्धू से कहा- बाजवा बात मानते हैं रिहा करवा दो
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पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर पाकिस्तान के दौरे पर हैं। उनके इस दौरे पर एक सैनिक के परिवार ने गुहार लगाई है। परिवार का कहना है कि सिद्धू की बात अगर पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा मानते हैं तो युद्धबंदियों को रिहा करवा दो। पंजाब के गुरदासपुर जिले में बरनाला नाम का गांव है। यहां पर सिपाही सुजान सिंह का परिवार रहता है। परिवार पिछले 54 साल से सुजान सिंह की वापसी की उम्मीद का दिया जलाए हुए है। जब-जब भी भारत-पाक के रिश्तों में कुछ सुधार होता है तो इस परिवार की उम्मीद बढ़ जाती है। सोमवार को श्री डेरा बाबा नानक स्थित करतारपुर कॉरिडोर का शिलान्यास उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा करने से सुजान सिंह के परिवार को भी एक आस जगी है।
उनके भाई महिंदर सिंह और भाभी बिमला देवी ने बताया कि कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण समारोह में शामिल होने के लिए दूसरी बार पाकिस्तान जा रहे हैं। उन्होंने अपील की कि सिद्धू साहिब आप पहली बार पाकिस्तान गए थे, तो वहां के सेना प्रमुख जनरल बाजवा को गले लगाकर उनके कान में यह कहा था कि करतारपुर का रास्ता खोल दिया जाए।
अब आप दूसरी बार पाकिस्तान जा रहे हो तो इस बार जनरल बाजवा को आप जब जफ्फी डालो तो उनके कान में यह कह देना कि 1965 और 1971 के 54 युद्धबंदियों की रिहाई का रास्ता भी खोल दें। उनका कहना है कि सिद्धू कहते हैं कि उनके कहने पर ही पाक सरकार ने कॉरिडोर का रास्ता खोलने का फैसला लिया है। अगर जनरल बाजवा और पाक प्रधानमंत्री इमरान खां सिद्धू के इतने ही प्यारे हैं तो अपने इस दौरे में वे देश के 54 युद्धबंदियों की खबर भी साथ लेकर आएं।
बेटे के गम में मां और चार भाई चल बसे
सिपाही सुजान सिंह के भाई महिंदर सिंह ने बताया कि उनके भाई ने 1965 के भारत-पाक युद्ध में पाक सैनिकों को धूल चटाई थी। इसके बाद पाक सेना द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। बेटे के गम में मां संतो देवी ने खाना पीना छोड़ दिया और कुछ समय बाद चल बसीं। इसके बाद युद्धबंदी भाई के इंतजार में उनके चार भाई भी संसार को अलविदा कह गए।
1970 में मिली थी पाक जेल में बंद होने की खबर
महिंदर सिंह ने बताया कि उनका भाई 1957 में भारतीय सेना की 14वीं फील्ड रेजीमेंट में भर्ती हुआ था। जब भारत पाक युद्ध का एलान हुआ तो उनके विवाह को छह महीने ही हुए थे। युद्ध समाप्ति की घोषणा के बाद भी जब उनका भाई नहीं लौटा तो परिवार को किसी अनहोनी का भय सताने लगा। 1970 में उन्हें पाकिस्तान जेल में बंद होने की जानकारी जेल से लिखे खत से मिली। इसके बाद छह जुलाई 1970 को अमृतसर के साहोवाल गांव के दो कैदी पाक जेल से रिहा होकर वतन लौटे तो उन्होंने अमृतसर में सुपरिंटेंडेंट को लिखित में बताया कि भारतीय सेना का वायरलेस ऑपरेटर सुजान सिंह सियालकोट जेल के इंटेरोगेशन सेल में बंद है।
वहां पर उस पर जुल्म ढहाए जा रहे है। वह तब से अपने भाई को पाकिस्तान से रिहा करवाने के लिए भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं। इस मौके पर शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि जब तक पाक जेलों में बंद 54 जंगी सिपाहियों की रिहाई नहीं होगी, तब तक भारत-पाक रिश्तों पर जमीं बर्फ नहीं पिघलेगी।