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सिद्धू की सक्रियता बढ़ी : क्या नई पार्टी बनाएंगे 'गुरु', पंजाब में चुनाव से पहले नए समीकरण के संकेत
Wed, 14 Apr 2021 01:25 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 14 Apr 2021 01:25 PM IST
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नवजोत सिंह सिद्धू।
- फोटो : फाइल
पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू आखिरकार पंजाब में अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में जुट गए हैं। इसका पहला संकेत उन्होंने मंगलवार को बरगाड़ी के गांव जवाहर सिंह वाला में दिया, जहां उन्होंने कोटकपूरा व बहिबल कलां गोलीकांड की एसआईटी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। इसके साथ ही सिद्धू ने यह संकेत दे दिए हैं कि वे अब कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार की नाकामियों को जनता के सामने रखने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा एसआईटी की जांच रिपोर्ट को रद्द किए जाने पर भी सवाल उठाते हुए राज्य सरकार को घेरा है।
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कैप्टन अमरिंदर सिंह से मतभेद और कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद सियासी तौर पर चुप्पी साधे रहे नवजोत सिद्धू हाल ही में कैप्टन के साथ हुई दो बेनतीजा मुलाकातों के बाद ट्विटर पर इशारों-इशारों में अपने और कैप्टन के संबंधों पर उंगली उठाते रहे हैं। इसके बाद जैसे ही उन्होंने पटियाला में रैली की, उससे साफ हो गया है कि उन्होंने कांग्रेस से दूर होने का मन बना लिया है और आने वाले कुछ महीनों में वे अपनी पार्टी बना सकते हैं।
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दरअसल, इस बार सिद्धू ने सियासी सक्रियता बढ़ाने के लिए किसान आंदोलन के साथ खुद को जोड़ने की कवायद शुरू की है। इसके जरिए वे जहां केंद्र की भाजपा सरकार को निशाने पर ले रहे हैं, वहीं कैप्टन सरकार पर भी सवाल उठा रहे हैं। इस बीच यह भी पता चला है कि शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) ने अब नवजोत सिद्धू का साथ देने की नई नीति पर काम शुरू कर दिया है। डेमोक्रेटिक के नेताओं ने सिद्धू को अपनी पार्टी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिसमें अन्य छोटे दलों का उन्हें सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया।
उल्लेखनीय है कि कैप्टन के साथ मतभेद के बावजूद सिद्धू ने कभी भी कांग्रेस पार्टी को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश नहीं की थी। न ही उन्होंने खुल कर कैप्टन का किसी मसले पर विरोध किया था। लेकिन बदलते परिदृश्य में यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने सामने कोई बड़ी चुनौती न होने का भ्रम पाल चुकी पंजाब कांग्रेस के लिए सिद्धू ही सबसे बड़े चुनौती बनकर उभर सकते हैं। माना जा रहा है कि वे विधानसभा चुनाव में कैप्टन के मुकाबले में उतर सकते हैं।
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