{"_id":"5aeeceb34f1c1b042e8b737f","slug":"navjot-sidhu-press-conference-on-government-lands","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में हुए सनसनीखेज खुलासे, नवजोत सिद्धू बोले-","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में हुए सनसनीखेज खुलासे, नवजोत सिद्धू बोले-
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 06 May 2018 03:15 PM IST
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नवजोत सिद्धू
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मोहाली जिले में कब्जाई सरकारी जमीन की कुल कीमत सूबे पर चढ़े कर्ज से ज्यादा है। यह सनसनीखेज खुलासा पंजाब कैबिनेट सब कमेटी ने किया है। यह जानकारी शनिवार को में सरकारी जमीनों और संपत्तियों की देखरेख करने के लिए बनाई कमेटी के प्रमुख और स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने सब कमेटी की मीटिंग के बाद जारी प्रेस बयान में किया।
निकाय मंत्री ने बताया कि सब कमेटी ने राज्य के सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य सरकारी संस्थानों से उनकी संबंधित सरकारी जमीनों का रिकार्ड मंगाया है। इसके साथ ही कमेटी की तरफ से जस्टिस एसएस सारों और पूर्व डीजीपी चंद्रशेखर की दखल वाले अलग-अलग विभागों के नुमाइंदों को लेकर माहिरों की कमेटी बनाने का फैसला किया गया है, जो सब कमेटी को अपनी राय देगी।
उन्होंने बताया कि सब कमेटी की मीटिंग में ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री सुखबिंदर सिंह भी उपस्थित थे। मीटिंग में हुए खुलासों के मुताबिक अकेले मोहाली जिले में जितनी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है, उसका मूल्य पंजाब पर चढ़े कुल कर्ज (2 लाख 10 हजार करोड़) से अधिक है। इसी तरह यदि पूरे राज्य में अवैध रूप से कब्जाई गई सरकारी जमीनों की पहचान करवाई जाए तो पंजाब आर्थिक तौर पर खड़ा हो सकता है।
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उन्होंने बताया कि बैठक में जस्टिस कुलदीप सिंह की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई, जिनकी रिपोर्ट में पूर्व डीजीपी चंद्रशेखर की तरफ से किए खुलासों की भी पुष्टि हुई है। पूर्व डीजीपी चंद्रशेखर ने खुलासा किया कि करौड़ा गांव में 22 हजार कनाल और नाडा में 16113 कनाल जमीन बर्बाद की जा रही है।
कब्जे छुड़ाने के लिए कमेटी देगी राय
सिद्धू ने कहा कि सरकारी जमीनों को कब्जों से मुक्त करवाने संबंधी जस्टिस सारों के नेतृत्व में माहिरों की कमेटी इस सब-कमेटी को राय देगी। इस कमेटी में पूर्व डीजीपी चंद्र शेखर, गोवंश सेवा सदन के प्रधान जोगिंद्र पाल, सभी 10 नगर निगमों के मेयरों के अलावा राजस्व, जल संसाधन प्रबंधन, स्थानीय निकाय, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, वन, लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें), वक्फ़ बोर्ड का भी एक-एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
ऐसे होते हैं सरकारी जमीनों पर कब्जे
मोहाली। हरेक शहर व गांव में लोगों की भलाई के लिए सरप्लस लैंड रखी जाती है। जिसे शामलात जमीन कहते हैं। लेकिन भूमाफिया प्रशासनिक अधिकारियों व पंचायत की मिलीभगत से इन जमीनों पर अवैध कब्जे कर लेते हैं। मोहाली जिले में रसूखदार लोगों द्वारा किए जाने वाले कब्जों को खाली करवाने में हिम्मत प्रशासन ने नहीं दिखाई। यह कब्जे छोटे प्लॉटों से लेकर एकड़ जमीन पर हुए हैं। जिले में नयागांव, मुल्लांपुर, डेराबस्सी, जीरकपुर, लालडू, लांडरां, बनूड़ में शामलात जमीन पर अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। इनकी कीमत करोड़ों रुपये है। कई मामलों में शामलात जमीन पर रजिस्ट्ररी है। इसके अलावा पंचायत विभाग की जमीन को लीज पर भी दे दिया जाता है।
सरकार व पंचायतों को मिलेगा फायदा
सरकारी जमीनों पर से अवैध कब्जों का मुक्त कराने के लिए लंबे समय से लड़ रहे रनजीत सिंह गाजीपुर ने कहा कि कब्जे का यह खेल काफी पुराना है। लोग करोड़ों रुपये की पंचायती जमीन पर लंबे समय से कब्जा करके बैठे हैं। अगर सरकार व अधिकारी नीयत साफ कर अकेले जिले मोहाली में ही पंचायती और शामलात जमीनों से कब्जे मुक्त करवा ले तो जहां करोडों रुपये की जमीन मिलेगी। वहीं, पंचायतों और नगर परिषदों की आमदनी भी बढ़ेगी।
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निकाय मंत्री ने बताया कि सब कमेटी ने राज्य के सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य सरकारी संस्थानों से उनकी संबंधित सरकारी जमीनों का रिकार्ड मंगाया है। इसके साथ ही कमेटी की तरफ से जस्टिस एसएस सारों और पूर्व डीजीपी चंद्रशेखर की दखल वाले अलग-अलग विभागों के नुमाइंदों को लेकर माहिरों की कमेटी बनाने का फैसला किया गया है, जो सब कमेटी को अपनी राय देगी।
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उन्होंने बताया कि सब कमेटी की मीटिंग में ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री सुखबिंदर सिंह भी उपस्थित थे। मीटिंग में हुए खुलासों के मुताबिक अकेले मोहाली जिले में जितनी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है, उसका मूल्य पंजाब पर चढ़े कुल कर्ज (2 लाख 10 हजार करोड़) से अधिक है। इसी तरह यदि पूरे राज्य में अवैध रूप से कब्जाई गई सरकारी जमीनों की पहचान करवाई जाए तो पंजाब आर्थिक तौर पर खड़ा हो सकता है।
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उन्होंने बताया कि बैठक में जस्टिस कुलदीप सिंह की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई, जिनकी रिपोर्ट में पूर्व डीजीपी चंद्रशेखर की तरफ से किए खुलासों की भी पुष्टि हुई है। पूर्व डीजीपी चंद्रशेखर ने खुलासा किया कि करौड़ा गांव में 22 हजार कनाल और नाडा में 16113 कनाल जमीन बर्बाद की जा रही है।
कब्जे छुड़ाने के लिए कमेटी देगी राय
सिद्धू ने कहा कि सरकारी जमीनों को कब्जों से मुक्त करवाने संबंधी जस्टिस सारों के नेतृत्व में माहिरों की कमेटी इस सब-कमेटी को राय देगी। इस कमेटी में पूर्व डीजीपी चंद्र शेखर, गोवंश सेवा सदन के प्रधान जोगिंद्र पाल, सभी 10 नगर निगमों के मेयरों के अलावा राजस्व, जल संसाधन प्रबंधन, स्थानीय निकाय, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, वन, लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें), वक्फ़ बोर्ड का भी एक-एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
ऐसे होते हैं सरकारी जमीनों पर कब्जे
मोहाली। हरेक शहर व गांव में लोगों की भलाई के लिए सरप्लस लैंड रखी जाती है। जिसे शामलात जमीन कहते हैं। लेकिन भूमाफिया प्रशासनिक अधिकारियों व पंचायत की मिलीभगत से इन जमीनों पर अवैध कब्जे कर लेते हैं। मोहाली जिले में रसूखदार लोगों द्वारा किए जाने वाले कब्जों को खाली करवाने में हिम्मत प्रशासन ने नहीं दिखाई। यह कब्जे छोटे प्लॉटों से लेकर एकड़ जमीन पर हुए हैं। जिले में नयागांव, मुल्लांपुर, डेराबस्सी, जीरकपुर, लालडू, लांडरां, बनूड़ में शामलात जमीन पर अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। इनकी कीमत करोड़ों रुपये है। कई मामलों में शामलात जमीन पर रजिस्ट्ररी है। इसके अलावा पंचायत विभाग की जमीन को लीज पर भी दे दिया जाता है।
सरकार व पंचायतों को मिलेगा फायदा
सरकारी जमीनों पर से अवैध कब्जों का मुक्त कराने के लिए लंबे समय से लड़ रहे रनजीत सिंह गाजीपुर ने कहा कि कब्जे का यह खेल काफी पुराना है। लोग करोड़ों रुपये की पंचायती जमीन पर लंबे समय से कब्जा करके बैठे हैं। अगर सरकार व अधिकारी नीयत साफ कर अकेले जिले मोहाली में ही पंचायती और शामलात जमीनों से कब्जे मुक्त करवा ले तो जहां करोडों रुपये की जमीन मिलेगी। वहीं, पंचायतों और नगर परिषदों की आमदनी भी बढ़ेगी।