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इधर नवजोत सिद्धू की गुमशुदगी के बोर्ड लगे, उधर वे परिवार संग घर लौटे, आक्रामक हैं पत्नी के तेवर

Mon, 22 Jul 2019 02:02 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर/बठिंडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर/बठिंडा Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 22 Jul 2019 02:02 PM IST
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navjot sidhu missing boards in bathinda, navjot kaur sidhu, captain amrinder singh
नवजोत सिद्धू की गुमशुदगी के बोर्ड - फोटो : अमर उजाला
एक ओर, नवजोत सिद्धू की गुमशुदगी के बोर्ड लग गए हैं। दूसरी ओर, वे अपने परिवार के साथ घर लौट आए और उनकी पत्नी के तेवर आक्रामक नजर आ रहे हैं। बठिंडा में परसराम नगर चौक पर पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की गुमशुदगी वाला बोर्ड भी लगाया गया। पूर्व पार्षद विजय का कहना था कि नवजोत सिद्धू चुनाव के समय पंजाब के बहुत बडे़ हितैषी बन रहे थे।
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जब सरकार ने उन्हें बिजली विभाग दिया तो तब उन्होंने लोगों का फायदा नहीं किया, बल्कि सूबे से ही गायब हो गए। कैबिनेट से इस्तीफा देकर उन्होंने पंजाबवासियों के साथ धोखा किया है। सिद्धू की गुमशुदगी संबंधी लगाए गए बोर्ड पर पूर्व पार्षद ने कहा कि सिद्धू को पूर्व पार्षद विजय कुमार के पते पर पहुंचाने वाले को 2100 रुपये इनाम और पाकिस्तान की निशुल्क यात्रा करवाने का लालच दिया गया है।
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सुरक्षा कर्मी वापस भेजे, मीडिया से बनाई दूरी

चंडीगढ़ का सरकारी आवास खाली करने के बाद पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू अपनी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू और बेटी राबिया के साथ रविवार शाम करीब सात बजे होली सिटी कॉलोनी स्थित अपने घर लौट आए। सिद्धू अपनी निजी गाड़ी में घर पहुंचे। सिद्धू के साथ उनके सुरक्षा कर्मचारी भी थे। घर के पिछले दरवाजे से सिद्धू की गाड़ी अंदर गई। जैसे ही सिद्धू की गाड़ी घर के भीतर गई, सुरक्षा कर्मचारियों ने घर का प्रवेश द्वार बंद कर दिया।

इससे पहले सेवादारों ने घर के चार में से तीन प्रवेश द्वार पहले से ही बंद कर दिए थे। वहीं सिद्धू ने घर पहुंचते ही अपनी सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों को वापस भेज दिया। इस दौरान सिद्धू से बातचीत के लिए मीडिया कर्मियों ने बार-बार कोशिश की, लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं आया। सिद्धू के घर लौटने से पहले ही उनके समर्थक पार्षद वहां मौजूद थे। हालांकि कांग्रेस का कोई भी विधायक व वरिष्ठ नेता सिद्धू के घर नहीं पहुंचा।

डॉ. सिद्धू कैप्टन सरकार के विरुद्ध हो सकती है मुखर

अपने अब तक के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती से जूझ रहे नवजोत सिद्धू इन हालातों से कैसे निकलते हैं, इस पर राजनीतिक पंडितों की नजरें टिकी हुई हैं। 2004 में क्रिकेटर से नेता बने सिद्धू के सामने कई बार राजनीतिक संकट पैदा हुआ। भाजपा के सांसद के नाते सिद्धू का राजनीतिक विरोध अकाली नेताओं विशेष कर बादल परिवार के साथ भी रहा।

सिद्धू के स्वभाव में नहीं है कि वह इतनी जल्दी हार मान कर चुपचाप बैठ जाएं। सिद्धू उसी पुरानी नीति पर अमल करते हुए अपनी पत्नी डॉ. नवजोत सिद्धू के माध्यम से कैप्टन सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल सकते हैं। जब सिद्धू भाजपा से नाराज थे तो डॉ. सिद्धू ने अकाली-भाजपा सरकार को कई बार कटघरे में खड़ा किया था। सिद्धू 15 साल से राजनीति कर रहे हैं लेकिन अपनी बाणी से लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाले सिद्धू अपने भीतर लीडरशिप की क्वालिटी पैदा नहीं कर सके।

जब सिद्धू ने भाजपा को अलविदा कहा, तब भी भाजपा का कोई नेता, यहां तक की वार्ड स्तर के वर्कर भी सिद्धू के साथ नहीं थे। सिद्धू के साथ कांग्रेस के वही वर्कर गए जो उनकी राजनीति शुरू होने के बाद उनके साथ जुड़े थे। आज सिद्धू जब घर पहुंचे तब भी कांग्रेस का कोई बड़ा नेता उनके साथ नहीं था। सिद्धू समर्थक कुछ पार्षद घर में मौजूद थे। जिस विधानसभा हलके से सिद्धू ने 42 हजार मतों से चुनाव जीता उस इलाके के लोग और कार्यकर्ता भी सिद्धू का साथ देने नहीं आए।

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