‘नटी विनोदनी’ में दिखा वेश्या का दर्द, खूबसूरत दुनिया से अंधेरे में ढकेलता समाज
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टैगोर थिएटर में चल रहे थिएटर फेस्टिवल के अंतिम दिन नाटक ‘नटी विनोदनी’ का मंचन किया गया। इसे मोहाली के सुचेतक रंगमंच की तरफ से पेश किया गया।
नाटक की शुरुआत एक ऐसी लड़की से होती है जो कि कोलकाता से है और एक वेश्यालय में पली-बढ़ी है। वह फिल्म अभिनेत्री बनना चाहती है। इसके लिए वह कोशिश करती है और एक दिन सफल भी हो जाती है।
इसके बाद वह फिल्मों और रंगमंच की एक जानी-मानी हस्ती बन जाती है। जब सफलता उसके पैर चूमने लगती है तो वह वेश्यालय को छोड़ अपनी जिंदगी अलग से शुरू करना चाहती है।
'जो काम उसकी मां ने किया, वही काम बेटी भी करे'
इसके लिए वह जब भी प्रयास करती है, उसमें विफल हो होती है। वह जिस तरफ भी जाती है, उसे एक अभिनेत्री के साथ वेश्या के काम से जरूर जोड़ा जाता है। पूरे नाटक में वह सोचती रहती है कि जब समाज तरक्की कर चुका है व वेश्यालय को छोड़कर उसकी अलग पहचान बन चुकी है।
फिर भी लोग यही सोचते हैं कि जो काम उसकी मां ने किया, वही काम बेटी भी करे। नाटक का निर्देशन अनीता शब्दीश ने किया। उन्होंने बताया कि इस नाटक के माध्यम से मुख्य तौर पर समाज की सोच को दिखाने का प्रयास किया गया है।
वेश्यालय में जाने वाली महिलाएं कहीं न कहीं समाज की घटिया सोच का परिणाम हैं। यदि वेश्या के परिवार से कोई आगे बढ़ना चाहता है तो समाज प्रोत्साहित करने के बजाय उसे पीछे की ओर ढकेलता है। इसी मानसिकता को इस नाटक के माध्यम से दिखाया गया है।