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प्रेमचंद की 'बूढ़ी काकी' में दिखी असली भारत की तस्वीर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 06 Feb 2014 02:02 PM IST
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चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में प्रेमचंद की कहानी पर आधारित नौटंकी देखने को मिली। मिनिस्टरी ऑफ कल्चर और गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एंड डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर, हरियाणा की ओर से आयोजित नौटंकी के दूसरे दिन बुधवार को बूढ़ी काकी नौटंकी खेली गई।
गरीबी को अकसर अपनी कहानियों में जगह देने वाले मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी को नौटंकी के रूप में राज कुमार श्रीवास्तव ने लिखा और इसे अतुल यादवंशी ने निर्देशित किया।
नौटंकी को अपने ही अंदाज में नट और नटी ने शुरू किया। जहां एक गांव की कहानी बताई जाती है। गांव का एक घर और उसमें रहने वाला एक परिवार, जिसमें एक बूढ़ी काकी भी है।
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परिवार की ओर से अक्सर नजरअंदाज कर देने वाली काकी को पेट भर खाना भी नहीं मिलता और जब घर में शादी होती है तो सब भर पेट खाते हैं, लेकिन काकी भूखी रह जाती है। रात को भूख जब ज्यादा लगने लगती है तो काकी कुटिया से उठ कर बारातियों द्वारा फेंके गए जूठे पत्तल में पड़ा खाना खाने लग जाती है। यह देख परिवार वालों का दिल पसीज जाता है और वह काकी से माफी मांगते है।
नौटंकी में गांव को बखूबी दिखाया है। काकी के रोल में सोनम सेठ का अभिनय शानदार रहा काकी द्वारा अंत में जूठे पत्तल से खाना असल में दिल पसीज देता है। नौटंकी में सबसे खूबसूरत बात लाइट रही, क्योंकि रंग बिरंगे परिधानों में लाइट, उसे जीवंत कर देती है।
नौटंकी में स्टेज का बेहद अच्छा इस्तेमाल किया गया। बड़े स्टेज पर एक तरफ काकी की कुटिया और एक तरफ शादी के लिया लगाया गया टेंट। शादी में महिला संगीत में आर्टिस्ट के साथ दर्शक भी गाने लगे, जो नौटंकी को दर्शकों के साथ जोड़ने में भी कामयाब रहा।
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गरीबी को अकसर अपनी कहानियों में जगह देने वाले मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी को नौटंकी के रूप में राज कुमार श्रीवास्तव ने लिखा और इसे अतुल यादवंशी ने निर्देशित किया।
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नौटंकी को अपने ही अंदाज में नट और नटी ने शुरू किया। जहां एक गांव की कहानी बताई जाती है। गांव का एक घर और उसमें रहने वाला एक परिवार, जिसमें एक बूढ़ी काकी भी है।
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परिवार की ओर से अक्सर नजरअंदाज कर देने वाली काकी को पेट भर खाना भी नहीं मिलता और जब घर में शादी होती है तो सब भर पेट खाते हैं, लेकिन काकी भूखी रह जाती है। रात को भूख जब ज्यादा लगने लगती है तो काकी कुटिया से उठ कर बारातियों द्वारा फेंके गए जूठे पत्तल में पड़ा खाना खाने लग जाती है। यह देख परिवार वालों का दिल पसीज जाता है और वह काकी से माफी मांगते है।
नौटंकी में गांव को बखूबी दिखाया है। काकी के रोल में सोनम सेठ का अभिनय शानदार रहा काकी द्वारा अंत में जूठे पत्तल से खाना असल में दिल पसीज देता है। नौटंकी में सबसे खूबसूरत बात लाइट रही, क्योंकि रंग बिरंगे परिधानों में लाइट, उसे जीवंत कर देती है।
नौटंकी में स्टेज का बेहद अच्छा इस्तेमाल किया गया। बड़े स्टेज पर एक तरफ काकी की कुटिया और एक तरफ शादी के लिया लगाया गया टेंट। शादी में महिला संगीत में आर्टिस्ट के साथ दर्शक भी गाने लगे, जो नौटंकी को दर्शकों के साथ जोड़ने में भी कामयाब रहा।