{"_id":"59086bed4f1c1b55418b456c","slug":"muslim-people-not-doint-vaccination-of-childrens-at-haryana","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों का टीकाकरण नहीं करा रहे लोग, अब मुस्लिम धर्मगुरुओं के सहारे है सरकार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों का टीकाकरण नहीं करा रहे लोग, अब मुस्लिम धर्मगुरुओं के सहारे है सरकार
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 02 May 2017 04:52 PM IST
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टीके को लेकर भ्रांतियां न फैलाए
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देखने में आया है कि हरियाणा में लोग टीकाकरण नहीं करा रहे हैं। इसके लिए अब खट्टर सरकार मुस्लिम धर्मगुरुओं का मुंह ताक रही है। हरियाणा के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों मेवात और हथीन में टीकाकरण का सौ फीसदी लक्ष्य हासिल करने के लिए खट्टर सरकार को ताकत लगानी पड़ रही है। लाख कोशिशों के बावजूद मुस्लिम समुदाय के लोग अपने बच्चों का एमएमआर वैक्सीन टीकाकरण कराने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
खसरा, गलघोंटू और जर्मनी खसरा के लिए लगाए जाने वाला ये टीका नूंह में मात्र 13 व हथीन में 17 प्रतिशत बच्चों को ही लग पाया है। जबकि, प्रदेश के अन्य जिलों में 90 से 95 फीसदी तक इसका टीकाकरण हो चुका है। मेवात जिले और पलवल के हथीन में अधिकांश बच्चों में ये टीकाकरण करने के लिए सरकार अब मुस्लिम धर्मगुरुओं का सहारा लेने जा रही है। मंगलवार को मौलवियों, वक्फ बोर्ड के चेयरमैन, सदस्यों और मुस्लिम समुदाय की एनजीओ का टीकाकरण के लिए समर्थन जुटाने को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रबंध निदेशक पी अमनीत कुमार मेवात में होंगी।
वे यहां पर मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ ही समुदाय के प्रभावशाली लोगों के साथ बैठक कर एमएमआर वैक्सीन टीकाकरण के फायदे बताएंगी। टीके से नपुंसक होने की भ्रांति को लोगों के मन से निकालने का प्रयास किया जाएगा। चूंकि, तमिलनाडु और केरल में एमएमआर वैक्सीन टीकाकरण के विरोध का वीडियो वायरल होने के बाद मेवात और हथीन में भी अभिभावक इसे बच्चों को नहीं लगवा रहे हैं।
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ये भी समझाएंगी प्रबंध निदेशक
मुस्लिम समुदाय को ये भी बताया जाएगा कि बच्चों को में टीबी, हेपेटाइटिस बी, पोलियो, गलघोंटू, काली खांसी, टेटनस, खसरा, दिमागी बुखार, रोटा वायरस, डायरिया एवं निमोनिया के टीके लगाना जरूरी है। इन्हें न लगवाने से जान जाने का 100 प्रतिशत खतरा रहता है।
टीके के बाद बुखार आना सामान्य बात : अमनीत
एनएचएम की प्रबंध निदेशक अमनीत पी कुमार ने कहा कि टीकाकरण से नपुंसक होने की अटकलों में कोई वास्तविकता नहीं है। टीके से बच्चों को बुखार आता है, चूंकि इसमें शामिल वैक्सीन शरीर के भीतर जाकर रोगों से लड़कर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
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खसरा, गलघोंटू और जर्मनी खसरा के लिए लगाए जाने वाला ये टीका नूंह में मात्र 13 व हथीन में 17 प्रतिशत बच्चों को ही लग पाया है। जबकि, प्रदेश के अन्य जिलों में 90 से 95 फीसदी तक इसका टीकाकरण हो चुका है। मेवात जिले और पलवल के हथीन में अधिकांश बच्चों में ये टीकाकरण करने के लिए सरकार अब मुस्लिम धर्मगुरुओं का सहारा लेने जा रही है। मंगलवार को मौलवियों, वक्फ बोर्ड के चेयरमैन, सदस्यों और मुस्लिम समुदाय की एनजीओ का टीकाकरण के लिए समर्थन जुटाने को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रबंध निदेशक पी अमनीत कुमार मेवात में होंगी।
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वे यहां पर मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ ही समुदाय के प्रभावशाली लोगों के साथ बैठक कर एमएमआर वैक्सीन टीकाकरण के फायदे बताएंगी। टीके से नपुंसक होने की भ्रांति को लोगों के मन से निकालने का प्रयास किया जाएगा। चूंकि, तमिलनाडु और केरल में एमएमआर वैक्सीन टीकाकरण के विरोध का वीडियो वायरल होने के बाद मेवात और हथीन में भी अभिभावक इसे बच्चों को नहीं लगवा रहे हैं।
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ये भी समझाएंगी प्रबंध निदेशक
मुस्लिम समुदाय को ये भी बताया जाएगा कि बच्चों को में टीबी, हेपेटाइटिस बी, पोलियो, गलघोंटू, काली खांसी, टेटनस, खसरा, दिमागी बुखार, रोटा वायरस, डायरिया एवं निमोनिया के टीके लगाना जरूरी है। इन्हें न लगवाने से जान जाने का 100 प्रतिशत खतरा रहता है।
टीके के बाद बुखार आना सामान्य बात : अमनीत
एनएचएम की प्रबंध निदेशक अमनीत पी कुमार ने कहा कि टीकाकरण से नपुंसक होने की अटकलों में कोई वास्तविकता नहीं है। टीके से बच्चों को बुखार आता है, चूंकि इसमें शामिल वैक्सीन शरीर के भीतर जाकर रोगों से लड़कर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।