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मल्टीलेवल पार्किंग न चलने पर मेयर सूद ने 'अपनों' को दिखाए तल्ख तेवर
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Thu, 11 Aug 2016 01:02 AM IST
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नगर निगम कमिश्नर बी पुरुषार्था और मेयर अरुण सूद की प्रेसवार्ता
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चंडीगढ़ मेयर अरुण सूद ने नाम लिए बिना अपने पार्टी नेताओं और पार्षदों को भी मल्टीलेवल पार्किंग न चलने के लिए जिम्मेदार ठहराया। मेयर ने कहा कि जब साहिब सिंह और इंपायर स्टोर पार्किंग को बंद करके मल्टीलेवल पार्किंग चलाई जा रही थी तो उस समय राजनीतिक कारणों से कांग्रेस समेत अन्य ने विरोध किया। उनका कहना है कि जो लोग उस समय विरोध कर रहे थे, वे गलत थे। मेयर ने कहा कि राजनीतिक कारणों से 50 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को ताक पर रख दिया गया।
इन्होंने किया था विरोध
मालूम हो कि तीन माह पहले कांग्रेस के साथ साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन, सीनियर डिप्टी मेयर देवेश मोदगिल सहित कुल 8 पार्षद इस फैसले के खिलाफ हो गए थे। इसके बाद ये दोनों पार्किंग खोलने का निर्णय मजबूरी में निगम ने लिया था। मेयर ने कहा कि इससे व्यापारियों को भी फायदा नहीं मिला। उनका कहना है कि अगर उस समय ये दोनों पार्किंग न खुलतीं तो अब तक सेक्टर-17 का स्मार्ट सिटी के तहत होने वाला काम भी शुरू हो जाता।
वेलफेयर का काम ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि खर्च भी पूरा न हो
कमिश्नर बी पुरुषार्था का कहना है कि कहा कि यह सच है कि निगम कमाई करने वाली कंपनी नहीं है लेकिन वेलफेयर के लिए कोई काम ऐसा भी नहीं होना चाहिए, जिससे खर्च भी पूरा न हो। उन्होंने बताया कि सेक्टर-17 में अभी तीन और मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण होना है ऐसे में हर मल्टीलेवल पार्किंग का घाटा हर माह 8 लाख रुपये काफी ज्यादा है। कमिश्नर ने हैरानी जताते हुए कहा कि शहरवासी मल्टीलेवल में 5 रुपये अदा करने से डर रहे हैं। 50 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए वह अपने 5 रुपये बचाकर इधर-उधर नो पार्किंग और रोड बर्म में वाहन पार्क कर रहे हैं।
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इन्होंने किया था विरोध
मालूम हो कि तीन माह पहले कांग्रेस के साथ साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन, सीनियर डिप्टी मेयर देवेश मोदगिल सहित कुल 8 पार्षद इस फैसले के खिलाफ हो गए थे। इसके बाद ये दोनों पार्किंग खोलने का निर्णय मजबूरी में निगम ने लिया था। मेयर ने कहा कि इससे व्यापारियों को भी फायदा नहीं मिला। उनका कहना है कि अगर उस समय ये दोनों पार्किंग न खुलतीं तो अब तक सेक्टर-17 का स्मार्ट सिटी के तहत होने वाला काम भी शुरू हो जाता।
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वेलफेयर का काम ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि खर्च भी पूरा न हो
कमिश्नर बी पुरुषार्था का कहना है कि कहा कि यह सच है कि निगम कमाई करने वाली कंपनी नहीं है लेकिन वेलफेयर के लिए कोई काम ऐसा भी नहीं होना चाहिए, जिससे खर्च भी पूरा न हो। उन्होंने बताया कि सेक्टर-17 में अभी तीन और मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण होना है ऐसे में हर मल्टीलेवल पार्किंग का घाटा हर माह 8 लाख रुपये काफी ज्यादा है। कमिश्नर ने हैरानी जताते हुए कहा कि शहरवासी मल्टीलेवल में 5 रुपये अदा करने से डर रहे हैं। 50 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए वह अपने 5 रुपये बचाकर इधर-उधर नो पार्किंग और रोड बर्म में वाहन पार्क कर रहे हैं।
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करियाने की दुकान बना दिया मल्टीलेवल पार्किंग को
Multilevel Parking
- फोटो : amar ujala
जो स्टैंड लिया था वह ठीक था
बी पुरुषार्था ने कहा कि मल्टीलेवल पार्किंग को शुरू करने के बाद साहिब सिंह और इंपायर स्टोर की पार्किंग को बंद करने का जो स्टैंड लिया था, वह सही था, यह अब साबित हो गया है। मेयर ने बताया कि मल्टीलेवल के उद्घाटन होने के 15 दिन तक प्रतिदिन 500 कारें पार्क होती थीं, लेकिन व्यापारियों के विरोध के बाद जब दोनों पार्किंग खुल गईं तो इसका रिस्पांस ढीला हो गया। उन्होंने बताया कि एक दिन तो 30 कारें भी पार्क हुईं हैं।
अपनी असफलता कांग्रेस पर थोप रहे मेयर
कार चालक से 3500 रुपये का जुर्माना वसूलना अलोकतांत्रिक है। निगम के पास 500 रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाने का अधिकार ही नहीं है। कांग्रेस ने तो पॉलिसी पर चर्चा के लिए कमिश्नर को विशेष सदन की बैठक भी बुलाने को कहा था। मेयर को कांग्रेस का फोबिया हो गया है, इसलिए वह अपनी हर असफलता कांग्रेस पर थोप रहे हैं। मेयर को अपनी पार्टी के पार्षदों का ही समर्थन नहीं मिल रहा है। ऐसे में वह नगर निगम क्या चलाएंगे। पूर्व मेयर राजबाला मलिक इस समय भाजपा में हैं। राजबाला मलिक के कार्यकाल में मल्टीलेवल पार्किंग का प्रोजेक्ट पास हुआ है, ऐसे में मेयर राजबाला मलिक से ही पूछें तो अच्छा है।
प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष
करियाने की दुकान बना दिया मल्टीलेवल पार्किंग को
मेयर ने मल्टीलेवल पार्किंग को करियाने की दुकान बना दिया है। कभी खोल देते हैं, तो कभी बंद कर देते हैं। अगर मेयर को यह प्रोजेक्ट खराब लगता था तो इसका उद्घाटन गवर्नर से क्यों करवाया?
सुभाष चावला, पूर्व मेयर और कांग्रेसी नेता
बी पुरुषार्था ने कहा कि मल्टीलेवल पार्किंग को शुरू करने के बाद साहिब सिंह और इंपायर स्टोर की पार्किंग को बंद करने का जो स्टैंड लिया था, वह सही था, यह अब साबित हो गया है। मेयर ने बताया कि मल्टीलेवल के उद्घाटन होने के 15 दिन तक प्रतिदिन 500 कारें पार्क होती थीं, लेकिन व्यापारियों के विरोध के बाद जब दोनों पार्किंग खुल गईं तो इसका रिस्पांस ढीला हो गया। उन्होंने बताया कि एक दिन तो 30 कारें भी पार्क हुईं हैं।
अपनी असफलता कांग्रेस पर थोप रहे मेयर
कार चालक से 3500 रुपये का जुर्माना वसूलना अलोकतांत्रिक है। निगम के पास 500 रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाने का अधिकार ही नहीं है। कांग्रेस ने तो पॉलिसी पर चर्चा के लिए कमिश्नर को विशेष सदन की बैठक भी बुलाने को कहा था। मेयर को कांग्रेस का फोबिया हो गया है, इसलिए वह अपनी हर असफलता कांग्रेस पर थोप रहे हैं। मेयर को अपनी पार्टी के पार्षदों का ही समर्थन नहीं मिल रहा है। ऐसे में वह नगर निगम क्या चलाएंगे। पूर्व मेयर राजबाला मलिक इस समय भाजपा में हैं। राजबाला मलिक के कार्यकाल में मल्टीलेवल पार्किंग का प्रोजेक्ट पास हुआ है, ऐसे में मेयर राजबाला मलिक से ही पूछें तो अच्छा है।
प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष
करियाने की दुकान बना दिया मल्टीलेवल पार्किंग को
मेयर ने मल्टीलेवल पार्किंग को करियाने की दुकान बना दिया है। कभी खोल देते हैं, तो कभी बंद कर देते हैं। अगर मेयर को यह प्रोजेक्ट खराब लगता था तो इसका उद्घाटन गवर्नर से क्यों करवाया?
सुभाष चावला, पूर्व मेयर और कांग्रेसी नेता