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8 सौ रुपये से कारोबार शुरू किया, आज चमड़े के नामी एक्सपोर्टर
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला कैंट(हरियाणा)
Updated Mon, 18 Jan 2016 01:16 PM IST
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कालेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद वेद प्रकाश पसीचिया ने जैसे-तैसे कर आठ सौ रुपये का इंतजाम किया और चमड़े के पुश्तैनी काम को नया रूप देने में जुट गए। वह कच्चे चमड़े की क्वालिटी सुधारते और उसे लैदर गार्मेंट का काम करने वालों को बेचते।
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मेहनत और लगन से काम बढ़ता गया। पसीचिया आज एक बड़े लैदर एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट वाईकिंग गारमेंट्स के मालिक हैं। यूरोप के अधिकतर देशों और अमेरिका में वेद प्रकाश की फैक्टरी में तैयार लैदर ही जाता है। उनके क्वालिटी प्रोडक्टस के लिए केंद्र सरकार उन्हें एमएसएमई के स्पेशल अवार्ड से सम्मानित करने जा रही है।
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पिता से मांगे थे दस हजार
वेद प्रकाश के दादा लौधी राम आजादी से पहले से ही चमड़े का काम करते थे। पिता सुशील चंद भी इसी पेशे में रहे। 1980 में वेद प्रकाश पसीचिया ने डीएवी कॉलेज से बीए करने के बाद कुछ अलग करने की ठानी।
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पिता से दस हजार रुपये मांगे ताकि नया बिजनेस शुरू कर सकें। पिता ने इतने रुपये देने में असमर्थता जाहिर की। किसी तरह आठ सौ रुपये जुटा कर उन्होंने फाइन लेदर तैयार करने का काम शुरू किया। वक्त के साथ कारोबार बढ़ता गया। उन्होंने लैदर की पांच अलग किस्में बाजार में उतारीं।
उम्मीद से तिगुना मिला
एक बार चंडीगढ़ में कुछ सप्लायरों के माध्यम से अमेरिका के एक कारोबारी उनकी लैदर यूनिट में आए और बड़ा संख्या में लैदर पीस की डिमांड की, मगर शर्त यह थी क्वालिटी जांच वह अपने विशेषज्ञ से करवाएंगे। इस जांच के बाद अमेरिकी कारोबारी ने न सिर्फ माल पसंद किया बल्कि कीमत भी उनकी उम्मीद से तीन गुना ज्यादा दी।
अमेरिका माल जाने लगा तो सिलसिला और आगे बढ़ा। आज उनका माल जापान, कनाडा, इंग्लैंड, न्यूयार्क, जर्मनी, फ्रांस, पोलेंड, डेनमार्क, नीदरलैंड, हॉलेंड समेत तमाम यूरेपियन कंट्री में जाता है। दुनिया में इटली की लैदर का डंका है मगर अंबाला का लैदर अब दुनिया की मार्केट में उसे टक्कर दे रहा है।
पत्नी भी देती हैं पूरा साथ
कारोबार में पत्नी निर्मला पसीचिया मैनेजमेंट में पूरा सहयोग करती हैं। निर्मला को भी केंद्र सरकार की ओर से महिला उद्यमी के रूप में एमएसएमई अवार्ड मिल चुका है। बेटे धमेंद्र पसीचिया ने भी कारोबार की कमान संभाल ली है। एक्सपोर्ट का अधिकतर काम वह ही संभाल रहे हैं।
पुरस्कार
वर्ष 2007 में एमएसएमई के प्रेजिडेंट अवार्ड से सम्मानित।
वर्ष 2013 में पत्नी निर्मला पसीचिया को एमएसएमई प्रेजिडेंट अवार्ड।
वर्ष 2013 में दूसरी बार लघु उद्योग की प्रगति के लिए प्रेजिडेंट अवार्ड।
लघु उद्योग की प्रगति के लिए मुख्यमंत्री से सात बार सराहना पत्र।
हरियाणा सरकार से राष्ट्र रत्न, विकास रत्न, उद्योग रत्न सम्मान।
सामाजिक सरोकार निभाने में आगे
वेद प्रकाश सामाजिक सरोकार निभाने में भी आगे हैं। उनकी यूनिट की ओर से मानव कल्याण शिक्षा केंद्र चलाए जा रहे हैं। जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई में मदद दी जाती है। उन्हें वजीफा और आर्थिक मदद भी की जाती है।