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HMT के ट्रेनी से बने उद्यमी, आज करोड़ों का कारोबार संभालते हैं
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Mon, 11 Jan 2016 02:07 PM IST
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एचएमटी के ट्रेनी से उद्यमी बने और यूनिट लगा दी। काम चल निकला, मेहनत रंग लाई और आज पंचकूला की आईएजी ऑटोमेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी 100 से ज्यादा इंडस्ट्रीज को ऑटोमेशन पैनल्स मुहैया करा रहे हैं। ये हैं आईएजी ऑटोमेशन कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक बिष्ट के उद्यमी बनने की कहानी।
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एचएमटी पिंजौर में बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी से शुरुआत की। इसके बाद सीमन्स कंपनी ने ऑफर दिया पंचकूला में यूनिट लगाने का। चुनौतियों से सामना किया और सीमन्स कंपनी के सहयोग से ऑटोमेशन पैनल्स बनाने का काम शुरू किया।
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काम चल निकला, मेहनत रंग लाई और आज पंचकूला की आईएजी ऑटोमेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी 100 से ज्यादा इंडस्ट्रीज को ऑटोमेशन पैनल्स मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के प्रोसेस को ऑटोमेट करने के लिए ये कंट्रोल पैनल इस्तेमाल किए जाते हैं।
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एचएमटी में बतौर ट्रेनी से की शुरुआत
दीपक बिष्ट ने बताया कि 1972 में बीएचयू से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 1973 में एचएमटी पिंजौर में बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी ज्वाइन किया था। उन्होंने बताया कि एचएमटी में रहते रहते उन्होंने जर्मनी, यूके और हॉलैंड पर न केवल ट्रेनिंग कर जानकारियां भी हासिल की। वहीं इस दौरान दीपक बिष्ट एचएमटी में विभिन्न पदों पर भी रहे।
सीमन्स के ऑफर के बाद छोड़ी जॉब
दीपक बिष्ट ने बताया कि वर्ष 1998 में सीमन्स कंपनी ने उनकी काबिलियत को भांपकर पंचकूला में कंपनी की पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से ऑटोमेशन पैनल्स की फैक्ट्री लगाने का ऑफर दिया। उन्होंने बताया कि इस दौरान एचएमटी पिंजौर की हालत भी ठीक नहीं चल रही थी।
ऐसे में उन्होंने एचएमटी में ज्वाइंट जनरल मैनेजर के पद पर रहते हुए जॉब छोड़ दी और उसी वर्ष पंचकूला में सात कर्मचारियों के साथ सीमन्स कंपनी के सहयोग से ऑटोमेशन पैनल्स बनाने का काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में सिर्फ बीएचईएल और गेट्स कंपनी को ही ऑटो मेशन पैनल्स उपलब्ध कराते थे। काम का विस्तार करने के लिए वर्ष 2005 में हरिद्वार में सीमन्स के ही सहयोग से दूसरी यूनिट लगाई। वे अब 100 से ज्यादा इंडस्ट्रीज को पैनल्स उपलब्ध करा रहे हैं।
वर्ष 2004 में शुरू किया ट्रेनिंग सेंटर
दीपक बिष्ट ने बताया कि उन्होंने एचएमटी में जॉब के दौरान उन्हें एक बात बेहद महसूस हुई कि जॉब के लिए आने वाले इंजीनियर्स को जानकारी का अभाव था। ऐसे में उन्होंने वर्ष 2004 में इंजीनियर्स के लिए कंपनी के एक कमरे में ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की। वर्ष 2008 में जीटीजेड, आईएजी ऑटोमेशन प्राइवेट लिमिटेड और सीमन्स के सहयोग से बड़े स्तर पर ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि अब तक देश-विदेश के करीब 800 स्टूडेंट्स को ट्रेंड कर चुके हैं और इनमें से करीब 40 फीसदी उसी ट्रेनिंग के बल पर जॉब्स भी पा चुके हैं।
हाइड्रो और सोलर पर काम करने पर विचार
ट्राइसिटी में करीब सभी इंडस्ट्रीज को ऑटोमेशन पैनल्स उपलब्ध करवा रहे दीपक बिष्ट ने बताया कि वे ऑटोमेशन पेनल्स के साथ साथ भविष्य में हाइड्रो और सोलर पर काम करने का विचार कर रहे हैं। साथ ही इंडस्ट्री बेस ज्यादा बढ़ाने के लिए भी काम करेंगे।
सीमन्स के सहयोग से लगाई दो यूनिट
1998- पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2
2005- हरिद्वार में सिडकुल इंडस्ट्रियल एरिया
ये करते हैं मैन्युफैक्चर
-ऑटो मेशन कंट्रोल पैनल्स
- पॉवर पैनल्स
- एसी/डीसी ड्राइव पैनल्स
- पीएलसी एंड प्रोसेस कंट्रोल पैनल्स
सालाना टर्नओवर- करीब 25 करोड़ रुपये
रोजगार- करीब 80 कर्मचारी
प्रोफाइल
कंपनी- आईएजी ऑटोमेशन प्राइवेट लिमिटेड
दीपक बिष्ट, मैनेजिंग डायरेक्टर
स्कूलिंग- गवर्नमेंट स्कूल, मंडी, हिमाचल (1965)
प्री इंजीनियरिंग- डीएवी कॉलेज, जालंधर (1965)
इंजीनियरिंग- बीएचयू, बनारस (1972)
सदस्य- आईएटीसी ट्रेडिंग इन्फोर्मेशन सेंटर
सदस्य- सोसाइटी फॉर मैरीटोरियस स्टूडेंट्स
न्यू कमर्स के लिए टिप्स
- अनुभवी लोगों की सलाह जरूर लें
- काम में स्पष्टता और स्थिरता होना जरूरी
- शॉर्ट टर्म की बजाय लॉन्ग टर्म में काम करें