फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   msme haryana, light engineering industry success story

MSME: अंबाला ने दी थी देश को पहली अपनी मिक्सी

Sat, 23 Jan 2016 04:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला Updated Sat, 23 Jan 2016 04:16 PM IST
विज्ञापन
msme haryana, light engineering industry success story

अंबाला ने देश को पहली मिक्सी दी थी। सन 1966 में अंबाला सिटी के बाबू राजेंद्र नाथ ने पहली मिक्सी बनाकर उसे दिल्ली की मार्केट में उतारा था। अगले साल दक्षिण भारत की भी एक कारीगर ने अपनी मिक्सी भी मुकाबले में उतार दी। लेकिन तब तक अंबाला की मिक्सी बाजार में अपना रुतबा कायम कर चुकी थी।

विज्ञापन


बाबू राजेंद्र नाथ से ही सीखकर कई कारीगरों ने अपनी मिक्सी बनानी शुरू की और आज वे भी मिक्सी उद्योग में अपनी अलग इकाई चला रहे हैं। इस तरह सन 1997 तक अंबाला के मिक्सी उद्योग ने पूरे देश में अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया था। अंबाला सिटी में ही करीबन 200 मिक्सी इकाइयां स्थापित हो गईं।
विज्ञापन


आज भी मिक्सी उद्योग का सलाना टर्नओवर 700 करोड़ के करीब है। लेकिन बाद में सरकार की बेरुखी से ये इंडस्ट्री बिखरकर रह गई। इस दौरान केंद्र सरकार ने हिमाचल और उतराखंड के लिए स्पेशल व्यापारिक पैकेज निकाला, जिसमें दोनों पहाड़ी राज्यों में इंडस्ट्री स्थापित करने वालों को करों में काफी राहत मिलनी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


बस, इसी का फायदा उठाकर अंबाला की मिक्सी इंडस्ट्री भी हिमाचल के विभिन्न शहरों में पलायन कर गई। आज अंबाला में उद्यमियों के आफिस और छोटी-मोटी वर्कशाप मौजूद है, मगर बड़े कारखाने हिमाचल में ही स्थापित है।

बड़ी कंपनियों भी मानती है लोहा
आज देश के हर राज्य में अंबाला की मिक्सी  डिस्ट्रीब्यूटर मौजूद है। बकायदा बजाज जैसी बड़ी कंपनी ने अंबाला की मिक्सी इंडस्ट्री के साथ टाईअप किया और 26 साल तक बजाज कंपनी को अपनी मिक्सी सप्लाई की। उसके बाद कई बड़ी कंपनियों ने अंबाला से ही अपनी मिक्सी तैयार करवाई, आज भी फिलिप्स जैसी कंपनी भी अपनी मिक्सी व जूसर ग्राइंडर अंबाला से ही तैयार करवी रही है।

उद्योग की चुनौतियां
-इस उद्योग के लिए अंबाला सिटी में पर्याप्त जगह ही नहीं है
-इंस्पेक्टरी राज, करों की एडजस्टमेंट न होना, कागजी औपचारिकता और पाबंदियां दिक्कत पैदा कर रही हैं।
-माल बेचने के लिए क्लाइंट द्वारा सी फार्म उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया अब बहुत जटिल है, पहले ये आसानी से मिल जाता था, अब तीन माह की प्रक्रिया है, तब तक तैयार माल अधर में ही लटका रहता है
-बड़ी इंडस्ट्री यदि छोटी मिक्सी इंडस्ट्री से कोई काम करवाती है, तो उसकी पेमेंट ही महीनों रोके रखती है
-अंबाला में एक बड़ी जमीन इस उद्योग को दी जाए और करों में राहत दी जाए।

अपना घर किसे पंसद नहीं है। अपनी मर्जी से हरियाणा छोड़कर ये इंडस्ट्री हिमाचल में नहीं बसी है। हिमाचल और उतराखंड ने करों में राहत दी, तभी उद्यमी वहां गए हैं। सरकार इस उद्योग से जुड़े लोगों से बात करें, इस उद्योग की महत्ता को समझे और उद्यमियों को राहत दे तो मिक्सी की औद्योगिक इकाइयां हरियाणा में भी फिर से अपना वर्चस्व स्थापित करके  हजारों हाथों को रोजगार दे सकती है।

-बाबू राजेंद्र नाथ, मिक्सी मैन एवं पूर्व प्रधान हरियाणा चैंबर ऑफ कामर्स

हैरानी होती है कि देश में कभी अंबाला के मिक्सी उद्योग का नाम था, लेकिन आज अंबाला में इसकी गिनी-चुनी इकाइयां ही रह चुकी है। हरियाणा सरकार इस उद्योग के लिए पॉलिसी बनाए। दूसरा बड़ी और सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों के लिए कानून व नियम भी अलग-अलग बनाएं। बड़ी इंडस्ट्री के कानून छोटे उद्योगों पर लागू नहीं होने चाहिए।
-ध्रुव जैन, मैनेजिंग डायरेक्टर, गोपी मिक्सी, अंबाला

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed