पंजाब: सांसद प्रताप बाजवा ने सीएम चन्नी को लिखा पत्र, बटाला को अलग जिला बनाने की मांग
बठिंडा के बाद बटाला पंजाब का सबसे पुराना शहर है, जिसकी स्थापना 1465 में की गई थी। जनसंख्या के पक्ष से भी यह पंजाब का आठवां सबसे बड़ा शहर है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कांग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी को पत्र लिखकर बटाला को गुरदासपुर से अलग कर नया जिला बनाने की मांग की है। इससे पहले कैप्टन सरकार में मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखकर मांग की थी कि ऐतिहासिक और विरासती शहर बटाला को राज्य का 24वां जिला बनाया जाए ताकि इस अहम शहर का उपयुक्त विकास हो सके। दोनों मंत्रियों ने कैप्टन से यह भी मांग की थी कि ऐतिहासिक कस्बों फतेहगढ़ चूड़ियां और श्री हरगोबिंदपुर या घुमाण को इस नए जिले की नई सब-डिवीजन बनाया जाए।
यह भी पढ़ें- पंजाब विधानसभा: बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में बढ़ोतरी के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास
बटाला में हुआ था श्री गुरु नानक देव जी का विवाह
बटाला ऐतिहासिक शहर है। पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी का विवाह बटाला में माता सुलक्खनी जी के साथ 8 जुलाई 1487 में हुआ था। उनकी याद में यहां गुरुद्वारा डेरा साहिब और गुरुद्वारा कंध साहिब सुशोभित हैं। छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद जी अपने पुत्र बाबा गुरदित्ता जी का विवाह करने के लिए भी बटाला ही आए थे और उनकी याद में शहर के बीच गुरुद्वारा सत करतारिया सुशोभित है।
महाराजा रणजीत सिंह के राज के दौरान लाहौर और अमृतसर के बाद बटाला सिख राज का एक अहम शहर था। इस राज के समय की विरासती इमारतें आज भी मौजूद हैं, जिनमें महाराजा शेर सिंह का महल और जल महल (बारांदरी) विशेष हैं। ऐतिहासिक काली द्वारा मंदिर और सती लक्ष्मी देवी समाधि के अलावा इस शहर के नजदीक ही अचल साहिब का वह ऐतिहासिक स्थान है, जहां भगवान शिव जी के पुत्र देवता कार्तिकेय की याद में अचलेश्वर धाम सुशोभित है। अचल साहिब जी के स्थान पर ही श्री गुरु नानक देव जी ने सिद्धों के साथ बातचीत की थी।