चंडीगढ़ में बने फिल्मसिटी, किरण ने चला पहला कदम
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सांसद किरण खेर ने यूटी प्रशासन से शहर में फिल्म सिटी के लिए जमीन मांगकर प्रशासन को उधेड़बुन में डाल दिया है। खेर चाहती हैं कि चंडीगढ़ में फिल्म सिटी बने।
चंडीगढ़ के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फाइनल कर रहे अधिकारी अभी तक फिल्म सिटी के लिए मास्टर प्लान में जगह का प्रावधान नहीं कर पाए हैं।
चंडीगढ़ में लगभग सात साल पहले फिल्म सिटी की परियोजना बनी थी और विवादों में घिरी यह परियोजना के रद होने के कारण प्रशासन के अधिकारी शहर में फिल्म सिटी के लिए सांसद के आग्रह को न स्वीकार कर पा रहे हैं और न ही इसे खारिज कर पा रहे हैं।
ऐसे में अलग से फिल्म सिटी के लिए जमीन तय करने की जगह प्रशासन शहर के इंस्टीट्यूशनल एरिया में छोटे स्वरूप में फिल्म सिटी तैयार करने पर विचार कर रहा है।ं
पाटिल के कार्यकाल में पूरा नहीं हो सकता खेर का सपना
प्रशासन के अधिकारी भी मानते हैं कि खेर का फिल्म सिटी का सपना मौजूदा प्रशासक शिवराज पाटिल के कार्यकाल में तो पूरा होना असंभव है। नए प्रशासक के आने के बाद ही अगर खेर चाहें तो इस परियोजना पर नए सिरे से काम शुरू हो सकता है।
खेर को जब चंडीगढ़ से लोकसभा चुनाव की टिकट मिली थी तब उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान यह कहा था कि वह चंडीगढ़ में फिल्म सिटी बनवाना चाहती हैं।
इसके बाद 30 जुलाई को यूटी गेस्ट हाउस में प्रशासक की सलाहकार समिति की बैठक के दौरान किरण खेर ने कहा था कि प्रशासन को फिल्म सिटी के लिए जमीन देनी चाहिए।
ध्यान रहे कि चंडीगढ़ में पिछले कुछ सालों में कई नामी फिल्मों की शूटिंग हुई है। बॉलीवुड के कई फिल्म निर्माता चंडीगढ़ और इसके आसपास की लोकेशन को पसंद कर रहे हैं।
सात साल पहले बनी थी फिल्म सिटी परियोजना
चंडीगढ़ में फिल्म सिटी की परियोजना पूर्व प्रशासक डॉ.एसएफ रोड्रिग्स के कार्यकाल में सात साल पहले तैयार की गई थी। फिल्मसिटी परियोजना के तहत फिल्म स्टूडियो, मल्टीमीडिया पार्क, मल्टीमीडिया एंटरटेनमेंट सेंटर और मल्टीमीडिया कॉलेज और शोध केंद्र स्थापित किया जाना था।
फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार हुई इस परियोजना को 1 मार्च, 2007 को काफी विवाद के बाद पार्श्वनाथ डेवलपर्स को सौंपा गया था। बाद में विवाद बढ़ने यह प्रोजेक्ट रद कर दिया गया था।
केंद्र को 10 तक सौंपना है मास्टर प्लान
यूटी प्रशासन को केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) को 10 अगस्त तक मास्टर प्लान का फाइनल ड्राफ्ट सौंपना है। बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में प्रशासन से 10 अगस्त तक मास्टर प्लान फाइनल कर उसे मंत्रालय को सौंपने के निर्देश दिए गए।