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चंडीगढ़: पार्किंग ठेका कंपनी से एमओयू खारिज होगा या नहीं, कल होगा अहम फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 28 Jun 2018 09:37 AM IST
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पेड पार्किंग को ठेके पर चलाने वाली कंपनी आर्य इंफ्रा के साथ एमओयू खारिज किया जाएगा या कि नहीं। इसका फैसला 29 जून को होने वाली सदन की बैठक में तय होगा। नगर निगम कमिश्नर केके यादव ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। यह रिपोर्ट सदन में कमिश्नर की ओर से पेश की जाएगी। कमिश्नर के अनुसार इस रिपोर्ट में सारे तथ्य रख दिए जाएंगे। रिपोर्ट में बता दिया जाएगा कि एमओयू खारिज करने से नगर निगम का कितना वित्तीय नुकसान होगा और आगे क्या स्थिति रहेगी। इस रिपोर्ट में यह भी बताया जाएगा कि आगे क्या कानूनी पेच आ सकते हैं।
मालूम हो कि नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध कमेटी की पिछले माह हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि कंपनी को तीन माह का नोटिस देकर एमओयू खारिज किया जाए। मेयर भी यही चाहते हैं। यह फैसला पिछले माह सदन की बैठक में होना था लेकिन उस समय कमिश्नर केके यादव को ज्वाइन किए हुए एक दिन ही हुआ था। ऐसे में उन्होंने अगली सदन की बैठक तक का समय मांग लिया था।
ऐसे में अब कमिश्नर की इस मामले में रिपोर्ट आ रही है जबकि पार्षदों का कहना है कि कंपनी के साथ एमओयू खारिज करने का अधिकार पहले से अधिकारियों के पास है, ऐसे में सदन में क्याें लाया जा रहा है जबकि पार्षद एमओयू खारिज करने का फैसला सदन में नहीं लेना चाहता क्योंकि पार्षदों को लगता है कि एमओयू खारिज होने पर जो वित्तीय नुकसान होगा, आगे जाकर उसकी रिकवरी पार्षदों पर डाल दी जाएगी। ऐसा पिछले कार्यकाल में एक बार हो भी चुका है जबकि अधिकारी अपने स्तर पर निर्णय न लेकर सदन पर यह मामला डालना चाहते हैं।
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कंपनी ने निगम को दिया है 10 करोड़ का नोटिस
आर्य इंफ्रा कंपनी ने नगर निगम को 10 करोड़ का लीगल नोटिस दिया हुआ है। नोटिस के अनुसार हर शहर में स्मार्ट पार्किंग को प्रमोट करने के लिए अलग से बजट होता है लेकिन नगर निगम ने इसके लिए अलग से बजट नहीं बनाया है। इससे शहर में अवैध और नो पार्किंग बढ़ रही है जिस कारण कंपनी को फाइनेंशियल नुकसान हो रहा है। पेड पार्किंगों के भीतर कई सड़कें टूटी हुई है जबकि 40 प्रतिशत लाइटें नहीं चल रही हैं।
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मालूम हो कि नगर निगम की वित्त एवं अनुबंध कमेटी की पिछले माह हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि कंपनी को तीन माह का नोटिस देकर एमओयू खारिज किया जाए। मेयर भी यही चाहते हैं। यह फैसला पिछले माह सदन की बैठक में होना था लेकिन उस समय कमिश्नर केके यादव को ज्वाइन किए हुए एक दिन ही हुआ था। ऐसे में उन्होंने अगली सदन की बैठक तक का समय मांग लिया था।
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ऐसे में अब कमिश्नर की इस मामले में रिपोर्ट आ रही है जबकि पार्षदों का कहना है कि कंपनी के साथ एमओयू खारिज करने का अधिकार पहले से अधिकारियों के पास है, ऐसे में सदन में क्याें लाया जा रहा है जबकि पार्षद एमओयू खारिज करने का फैसला सदन में नहीं लेना चाहता क्योंकि पार्षदों को लगता है कि एमओयू खारिज होने पर जो वित्तीय नुकसान होगा, आगे जाकर उसकी रिकवरी पार्षदों पर डाल दी जाएगी। ऐसा पिछले कार्यकाल में एक बार हो भी चुका है जबकि अधिकारी अपने स्तर पर निर्णय न लेकर सदन पर यह मामला डालना चाहते हैं।
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कंपनी ने निगम को दिया है 10 करोड़ का नोटिस
आर्य इंफ्रा कंपनी ने नगर निगम को 10 करोड़ का लीगल नोटिस दिया हुआ है। नोटिस के अनुसार हर शहर में स्मार्ट पार्किंग को प्रमोट करने के लिए अलग से बजट होता है लेकिन नगर निगम ने इसके लिए अलग से बजट नहीं बनाया है। इससे शहर में अवैध और नो पार्किंग बढ़ रही है जिस कारण कंपनी को फाइनेंशियल नुकसान हो रहा है। पेड पार्किंगों के भीतर कई सड़कें टूटी हुई है जबकि 40 प्रतिशत लाइटें नहीं चल रही हैं।