सेक्टर-52 में कई मकानों पर आए एक से ज्यादा आवेदक, आधार कार्ड दिखा मलोया में फ्लैट की कर रहे मांग
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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) सेक्टर-52 और 56 के टीन शेड में रहने वालों को मलोया के स्मॉल फ्लैट देने की तैयारी कर रहा है। इस बीच सीएचबी के कई ऐसे मामले आए हैं, जिनमें एक ही मकान पर दो लोगों ने दावा किया है कि वह वहां रहते हैं। जब हाउसिंग बोर्ड ने एक कमेटी बनाकर जांच की तो पता चला कि एक ही पते पर कई लोगों ने आधार कार्ड बनवा रखा है, इसलिए जब मकान लेने की बारी आई, तो सभी ने दावा कर दिया है।
सेक्टर-52 की टीन शेड कॉलोनी में कॉलोनी नंबर-5 के टूटने के बाद कई परिवार रहने आए थे। यहां पर हाउसिंग बोर्ड की तरफ से इन परिवारों को घर आवंटित नहीं किए गए, बल्कि कॉलोनी टूटने के बाद बहुत से लोग सड़क पर आ गए थे। ऐसे में जिन लोगों को सेक्टर-52 की टीन शेड कॉलोनी में जो मकान खाली दिखाई दिया, उसमें वह रहने लगे। इसलिए यहां किसी के पास अलॉटमेंट लेटर नहीं है।
इस बीच प्रशासन ने अक्तूबर में यहां के लोगों को मलोया में किराये पर मकान देने का एलान किया और टीन शेड कॉलोनी में एक सर्वे कराया। सर्वे में हाउसिंग बोर्ड ने उस व्यक्ति को योग्य माना, जिसके पास उस मकान के पते पर आधार कार्ड है लेकिन समस्या तब आनी शुरू हो गई, जब एक ही मकान पर कई दावेदार सामने आ गए। एक मकान पर एक से अधिक लोग आधार कार्ड लेकर सीएचबी पहुंच गए।
हाउसिंग बोर्ड ने इस मामले को हल करने के लिए तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई, जिसने ऐसे सभी मामलों को सुना और पाया कि एक ही मकान पर कई लोगों ने आधार कार्ड बनाए हुए हैं। अधिकारियों से चर्चा के बाद आखिर में यही फैसला लिया कि जो भी व्यक्ति वर्तमान में टीन शेड कॉलोनी में रह रहा है, उसे ही मलोया में स्मॉल फ्लैट दिया जाएगा।
3000 रुपये किराया बहुत ज्यादा, इसलिए नहीं भरा फॉर्म
सीएचबी केंद्र सरकार की अफॉर्डेबल रेंटल हाउसिंग कांप्लेक्स योजना के तहत इन लोगों को मलोया में स्मॉल फ्लैट आवंटित कर रहा है। यहां रहने के लिए हर महीने 3000 रुपये किराया देना होगा, बिजली और पानी का बिल अलग। सेक्टर-52 में रहने वाले लोगों को पहले कोई किराया नहीं देना पड़ता था।
बिजली और पानी का बिल भी सीमित था। ऐसे में सेक्टर-52 के कुछ लोगों का कहना है कि उनकी कमाई उतनी ज्यादा नहीं है, कि वह हर महीने बिजली-पानी मिलाकर 4000 रुपये दे सकें। शाइन अपने परिवार के साथ पिछले करीब 6 साल से सेक्टर-52 की टीन शेड कॉलोनी में रहती हैं। अमर उजाला से बातचीत में बताया कि वह हर महीने इतना किराया नहीं दे सकती है, इसलिए फॉर्म नहीं भरा है। शाइन ने बताया कि ज्यादातर लोगों ने मलोया जाने की इच्छा जताई है, इसलिए सीएचबी इन मकानों को तोड़ देगा।
अब उनकी मजबूरी है कि उन्हें कहीं और जाना होगा। इसलिए उन्होंने दिल्ली जाने का फैसला लिया है। शाइन ने बताया कि दिल्ली में उनके रिश्तेदार रहते हैं। उन्होंने अपना सामान भी भिजवा दिया है। हालांकि, हाउसिंग बोर्ड के सीईओ यशपाल गर्ग ने कहा कि उनके पास अभी तक किराया ज्यादा होने से संबंधित कोई शिकायत नहीं आई है। किराया तय करने के लिए पूरे एरिया में एक सर्वे कराया था, जिसके बाद ही यह दाम तय किए गए हैं। यह दाम भी मार्केट से कम है।
टीन शेड के 45 लोगों पर सीएचबी पर लाखों का बकाया, कैसे होगा वसूल
हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी फिलहाल भले पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि सेक्टर-52 के सभी लोग हर महीने 3000 रुपये भरने में समर्थ हैं लेकिन हाउसिंग बोर्ड की वेबसाइट पर ही ऐसे कई लोगों की सूची है, जिन पर 70 हजार से लेकर करीब 1 लाख रुपये तक की राशि बकाया है। इस सूची में 45 लोगों के नाम हैं, हालांकि इसमें यह स्पष्ट नहीं है कि यह बकाया राशि किस चीज की है।
दूसरी ओर, धनास की पुनर्वास कॉलोनी में 8,848 स्मॉल फ्लैट्स हैं, जिसका किराया हर महीने 800 रुपये है। करीब 6 साल बाद भी हाउसिंग बोर्ड धनास के हजारों लोगों से 800 रुपये का किराया वसूलने में मशक्कत करनी पड़ रही है। आलम यह है कि यह राशि अब करोड़ों में हो गई है। इसके लिए हाउसिंग बोर्ड कई बार धनास की पुनर्वास कालोनी में शिविर भी लगा चुका है।
अब एजेंसी नहीं, हाउसिंग बोर्ड खुद वसूलेगा फ्लैट्स का किराया
योजना के शुभारंभ के मौके पर प्रशासन ने तय किया था कि स्मॉल फ्लैट्स की देखरेख और लोगों से किराया वसूलने के लिए सीएचबी एक एजेंसी को नियुक्त करेगा, जो लोगों से किराया वसूलने के बाद अपना खर्च निकालकर हाउसिंग बोर्ड को एक तय राशि देगी। अब यह फैसला हुआ है कि इस काम के लिए किसी भी प्राइवेट एजेंसी का सहारा नहीं लिया जाएगा।
हाउसिंग बोर्ड खुद लोगों से हर महीने किराया वसूल करेगा। यह किराया लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से जमा कर सकेंगे। इस पूरे मामले पर हाउसिंग बोर्ड के सीईओ यशपाल गर्ग का कहना है कि जो किराया तय किया गया है, वह लोगों द्वारा जमा किया जाना अनिवार्य रहेगा। मकान मिलने के बाद अगर कोई किराया जमा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।