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Chandigarh News: बिना मंजूरी 3 प्रमुख चौक पर लगे 20 से ज्यादा हरे पेड़ काट डाले, डीडीआर दर्ज

Tue, 30 Apr 2024 05:08 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Apr 2024 05:08 AM IST
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More than 20 green trees at 3 major squares were cut down without permission
चंडीगढ़। शहर के तीन प्रमुख चौक पर लगे 20 से 25 साल पुराने 20 से अधिक हरे युक्का के पेड़ बिना मंजूरी काट दिए गए। इससे सेक्टर-26 मंडी, सेक्टर-18/19 और सेक्टर-17 के बस स्टैंड चौक की सूरत बदल गई है। दो दिन तक भरे ट्रैफिक के बीच इन तीनों चौक पर पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटा गया लेकिन अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। हरे पेड़ों को काटने के बाद अब निगम ने संबंधित कंपनी के खिलाफ डीडीआर दर्ज करा दी है। साथ ही एमओयू रद्द करने का फैसला किया है।
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शहर के कुछ चौक प्रशासन तो कुछ नगर निगम के अंतर्गत आते हैं। इन सभी चौक के रखरखाव के लिए अलग-अलग निजी कंपनियों और एनजीओ के साथ समझौता किया गया है। यही कंपनियां और एनजीओ चौक के रखरखाव और सौंदर्यीकरण का काम देखते हैं। इसके बदले में कंपनी चौक पर अपना एक छोटा नेम प्लेट लगाती है। जिन चौक पर युक्का के पेड़ काटे गए हैं, वह सभी पास्को (टाटा मोटर्स) कंपनी के पास हैं। ये चौक उन्हें कई साल पहले रखरखाव के लिए सौंपे गए थे। प्रूनिंग के नाम कंपनी के कर्मचारियों ने चौक पर लगे युक्का के पेड़ों को काट दिया। यह पेड़ 15 से 20 फीट और कुछ उससे भी ज्यादा बड़े थे।
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अमर उजाला की टीम ने मौके पर जाकर देखा तो पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा था। जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने चौक से सूखे पत्ते हटाने और साफ-सुथरा रखने के निर्देश दिए थे लेकिन एजेंसी के कर्मचारियों ने पेड़ ही काट दिए। हालांकि सवाल नगर निगम के हॉर्टिकल्चर विभाग अधिकारियों पर भी उठ रहे हैं। दो दिन तक चलती ट्रैफिक के बीच चौक पर 20 से ज्यादा पेड़ों को कुल्हाड़ी से काट दिया गया लेकिन उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। इतनी भारी संख्या में पेड़ काटे गए हैं कि चौक की सूरत बदल गई है। यहां से रोजाना आने-जाने वाले लोग भी हैरान हैं कि हरे-भरे पेड़ आखिर क्यों काटे गए।
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सिर्फ युक्का के ही पेड़ काटे गए, एक की कीमत एक लाख से ज्यादा
सभी चौक पर युक्का के ही पेड़ काटे गए हैं। बाकी पेड़ों को हाथ भी नहीं लगाया गया है। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ राहुल महाजन ने बताया कि जो पेड़ काटे गए हैं, वह बेहद कीमती हैं। युक्का के एक पेड़ की कीमत एक लाख रुपये से ज्यादा है। युक्का के पेड़ बहुत धीमी गति से बढ़ते हैं, इसलिए उनकी कीमत बहुत अधिक होती है। आमतौर पर यह पेड़ एक वर्ष में केवल 12-24 इंच ही बढ़ता है। हालांकि, यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे प्रजाति, जलवायु, मिट्टी और प्रकाश व्यवस्था। कुछ युक्का पेड़ की प्रजातियां दूसरों की तुलना में तेजी से बढ़ सकती हैं। उदाहरण के लिए युक्का एलोजेफिरा प्रजाति प्रति वर्ष 3 फीट तक बढ़ जाती है। युक्का के पेड़ की खासियत यह है कि इसके तने को अगर भी मिट्टी में लगा दिया जाए तो वह फिर से पनप जाता है और धीरे-धीरे पेड़ बन जाता है। महाजन ने बताया कि एक चौक के पास उन्होंने देखा कि एक एनजीओ के लोग काटे गए पेड़ों को ले जा रहे थे। इससे संदेह पैदा होता है कि कहीं जानबूझकर इन पेड़ों को तो नहीं काटा गया।
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