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अलर्टः चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में देरी से आएगा मानसून, तो अभी कई दिन झेलनी होगी गर्मी
Wed, 19 Jun 2019 02:54 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 19 Jun 2019 02:54 PM IST
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मानसून
- फोटो : फाइल फोटो
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केरल में मानसून करीब एक हफ्ते की देरी से पहुंचा है। इसलिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी मानसून देरी से ही आएगा। इन जगहों पर मानसून सबसे लेट पहुंचता है और सबसे जल्दी विदा भी हो जाता है। चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब में मानसून पहुंचने की तारीख 28 जून है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार मानसून देरी से आएगा। लेकिन उससे बड़ी चिंता की बात यह है कि यदि देरी हुई तो मानसून कम बरसता है। ऐसा दावा मौसम विभाग का है।
मौसम विभाग के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल ने बताया कि यदि मानसून देरी से पहुंचा तो बारिश में गिरावट के 90 फीसदी चांस होते हैं। साल 2016 में मानसून दो जुलाई को आया। तब बारिश में 46 फीसदी की कमी देखी गई। साल 2014 में मानसून ने एक जुलाई को एंट्री मारी तो बारिश में 58 फीसदी की कमी देखी गई। इसके विपरीत बीते साल मानसून सही वक्त पर आया तो बारिश में 19 फीसदी उछाल देखी गई। इसका मतलब साफ है कि मानसून तय समय पर नहीं पहुंचा तो बारिश पर संकट छा सकता है।
18 जून तक मानसून सेंट्रल भारत के कई हिस्सों में पहुंच जाना चाहिए था। इनमें मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार और यूपी के कई इलाके शामिल हैं, जबकि इस बार अभी तक मानसून महाराष्ट्र तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में इस बार चंडीगढ़ सहित हरियाणा व पंजाब में भी मानसून के कम से कम 10 से 12 दिन देरी से पहुंचने के आसार बन रहे हैं। साल 1987 में सबसे देरी से मानसून पहुंचा था। उस साल 27 जुलाई को मानसून पहुंचा और पूरे देश में जबरदस्त सूखा पड़ा था।
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मौसम विभाग के डायरेक्टर सुरेंद्र पाल ने बताया कि यदि मानसून देरी से पहुंचा तो बारिश में गिरावट के 90 फीसदी चांस होते हैं। साल 2016 में मानसून दो जुलाई को आया। तब बारिश में 46 फीसदी की कमी देखी गई। साल 2014 में मानसून ने एक जुलाई को एंट्री मारी तो बारिश में 58 फीसदी की कमी देखी गई। इसके विपरीत बीते साल मानसून सही वक्त पर आया तो बारिश में 19 फीसदी उछाल देखी गई। इसका मतलब साफ है कि मानसून तय समय पर नहीं पहुंचा तो बारिश पर संकट छा सकता है।
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18 जून तक मानसून सेंट्रल भारत के कई हिस्सों में पहुंच जाना चाहिए था। इनमें मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार और यूपी के कई इलाके शामिल हैं, जबकि इस बार अभी तक मानसून महाराष्ट्र तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में इस बार चंडीगढ़ सहित हरियाणा व पंजाब में भी मानसून के कम से कम 10 से 12 दिन देरी से पहुंचने के आसार बन रहे हैं। साल 1987 में सबसे देरी से मानसून पहुंचा था। उस साल 27 जुलाई को मानसून पहुंचा और पूरे देश में जबरदस्त सूखा पड़ा था।
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जून में 58 फीसदी बारिश की कमी
एक जून से लेकर 18 जून तक चंडीगढ़ में सिर्फ 23.9 एमएम बारिश दर्ज की गई है, जबकि अब तक 56.4 एमएम बारिश हो जानी चाहिए थी। बारिश में करीब 58 फीसदी की कमी रिकार्ड हुई है। पंजाब में 30 फीसदी और हरियाणा में 21 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। यदि पूरे देश की बात करें तो जून के महीने में 44 फीसदी बारिश की कमी रिकार्ड हुई है।
यह देखा गया है कि जब-जब मानसून देरी से आया है तो बारिश कम होने के चांस होते हैं। जिस तरह से हालात बन रहे हैं, उसके मुताबिक इस बार कुछ देरी हो सकती है। हालांकि मानसून के आगे बढ़ने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। फिलहाल हमें कुछ इंतजार करना होगा।
- सुरेंद्र पाल, निदेशक मौसम विभाग चंडीगढ़
यह देखा गया है कि जब-जब मानसून देरी से आया है तो बारिश कम होने के चांस होते हैं। जिस तरह से हालात बन रहे हैं, उसके मुताबिक इस बार कुछ देरी हो सकती है। हालांकि मानसून के आगे बढ़ने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। फिलहाल हमें कुछ इंतजार करना होगा।
- सुरेंद्र पाल, निदेशक मौसम विभाग चंडीगढ़