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बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी पर तीन दिन की रोक: पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने के लिए दी छूट

Tue, 25 Jan 2022 03:38 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 25 Jan 2022 03:38 PM IST
सार

बिक्रम मजीठिया के खिलाफ मोहाली में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में मजीठिया ने पहले मोहाली की जिला अदालत में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था।

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Mohali crime branch team Searched Akali Leader Bikram Majithia house in Amritsar
अमृतसर में बिक्रम मजीठिया के घर पहुंची पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

एनडीपीएस मामले में फंसे वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को गिरफ्तार करने के लिए पंजाब पुलिस को अभी तीन दिन का इंतजार करना होगा। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मजीठिया की जमानत याचिका तो खारिज कर दी लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए उनको गिरफ्तारी से तीन दिन की छूट दी है।

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हाईकोर्ट ने मजीठिया की जमानत संबंधी याचिका पर मंगलवार को विस्तृत आदेश जारी करते हुए कहा कि मजीठिया ने जमानत याचिका खारिज होने की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए 7 दिन की अनुमति मांगी थी। उन्होंने आग्रह किया था कि पंजाब में विधानसभा चुनाव का एलान किया जा चुका है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए उन्हें 7 दिन तक गिरफ्तारी से छूट दी जाए। 
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मजीठिया की 7 दिन की मोहलत की मांग को ठुकराते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें केवल 3 दिन की मोहलत दी और पंजाब पुलिस को आदेश दिया कि तब तक उन्हें गिरफ्तार न किया जाए। इस दौरान वह सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर सकते हैं। साथ ही मजीठिया को हिदायत दी कि इस अवधि के अंदर अपील दाखिल कर दी जाए नहीं तो यह अवधि खत्म होते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
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अपने विस्तृत आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार बनाम मोहम्मद नवाज खान और स्टेट ऑफ केरल बनाम राजेश व अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि एनडीपीएस की धारा 37 की स्थिति में जमानत नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि नशे के कारोबार मामले में एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट हाईकोर्ट में रखी है और इस मामले में कार्रवाई पर कोई रोक नहीं थी। ऐसे में यह दलील की सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में रहते एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है, आधारहीन है।

मजीठिया की दूसरी दलील थी कि यह मामला बेहद पुराना है और इतने समय बाद एफआईआर दर्ज करना सही नहीं है, इसे भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि देरी से दर्ज की गई एफआईआर भी याची को अग्रिम जमानत का हकदार नहीं बनाती है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची पर संगीन आरोप हैं और जमानत से जांच प्रभावित हो सकती है।


जांच में सहयोग न करना पड़ा भारी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अंतरिम जमानत के आदेश के बाद मजीठिया जांच में शामिल हुए थे। एसआईटी के अनुसार उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। जब उनके विवाह की फोटो और वीडियो मांगी गई तो उन्होंने देने से इनकार कर दिया। एसआईटी इसमें सह आरोपियों से उनके संबंध की पड़ताल करना चाहती थी। बाद में हाईकोर्ट में कहा गया कि मजीठिया फोटो और वीडियो सिर्फ आईजी या डीजीपी को देंगे, जांच अधिकारी को नहीं। हाईकोर्ट ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि याची जांच में सहयोग नहीं कर रहा था।

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