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चंडीगढ़ः अब वाहनों पर बिना अनुमति विज्ञापन लगाया तो जुर्माना, दिल्ली की तर्ज पर बनी पॉलिसी

Fri, 08 Nov 2019 02:34 PM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 08 Nov 2019 02:34 PM IST
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ट्रांसपोर्ट सिस्टम - फोटो : File Photo
अब बिना अनुमति वाहनों पर विज्ञापन लगाया तो नगर निगम जुर्माना वसूलेगा। इस महीने अफसरों की बैठक के बाद मोबाइल व्हीकल पॉलिसी तैयार की जाएगी। पॉलिसी को एजेंडे के रूप में सदन की बैठक में लाया जाएगा। फिर गवर्नर की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद पॉलिसी के तहत जुर्माना लगाया जाएगा। चंडीगढ़ में वाहनों पर विज्ञापन लगाने के लिए फिलहाल कोई पॉलिसी नहीं है। पॉलिसी न होने पर यहां वाहनों पर विज्ञापन लगाने की अनुमति लेने की व्यवस्था ही नहीं है।
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बावजूद इसके बसों, टैक्सियों, रिक्शों पर विज्ञापन किया जा रहा है। इससे शहर को काफी घाटा भी हो रहा है। इसलिए दिल्ली की तर्ज पर एक पॉलिसी बनाई गई है, जिसके अंतर्गत पर वाहनों पर विज्ञापन के लिए चार्ज लगाए जाएंगे। पॉलिसी को लेकर इस माह ही बैठक हो जाएगी। बैठक के बाद पॉलिसी को एजेंडे केरूप में सदन की बैठक में लाया जाएगा। वहां से पास होने के बाद गवर्नर की स्वीकृति के लिए फाइल को भेज दिया जाएगा। वहां से स्वीकृत होने के बाद पॉलिसी बना दी जाएगी।
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पांच साल तक घूमती रही फाइल, पहली बार तय हुए रेट
साल 2014 में वाहनों पर विज्ञापन का टैक्स लेने के लिए प्रशासन को प्रस्ताव भेजा गया था। प्रशासन ने नगर निगम को इसमें पॉलिसी बनाने के निर्देश दिए। नगर निगम में एक कमेटी बनाई गई और इसकी पॉलिसी पर काम शुरू हुआ। उसके बाद तय हुआ कि पहले रेट तय किए जाएं, तब कोई पॉलिसी बनाई जा सकती है। फाइल इधर से उधर घूमती रही। कई कमेटियां भी बनीं, लेकिन रेट तय नहीं हो सके।
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2019 में आकर पहली बार वाहनों पर लगने वाले विज्ञापन केलिए रेट तय किए गए हैं। उसके बाद कमिश्नर केके यादव केनिर्देश पर स्पेशल कमिश्नर संजय कुमार झा के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई है, जिसमें ट्रैफिक एसएसपी, चीफ इंजीनियर निगम व प्रशासन, आर्किटेक्ट शामिल हैं। बैठक में अधिकारी पॉलिसी को लेकर अंतिम चर्चा करेंगे। उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

दिल्ली की तर्ज पर तैयार की गई है पॉलिसी

स्पेशल कमिश्नर ने बताया कि दिल्ली में किसी विवाद के कारण एक समय विज्ञापन पर रोक लगा दी गई थी। इसके लिए नगर निगम दिल्ली ने हाईकोर्ट में अपील कर दी। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाकर रिपोर्ट देने के लिए कहा था। उस रिपोर्ट के आधार पर वाहन विज्ञापन पॉलिसी तैयार की गई थी। इस पॉलिसी के आधार पर ही चंडीगढ़ ने भी तैयारी की है। प्रशासनिक अधिकारियों से इसमें आपत्तियां मांगी थीं। बैठक में पॉलिसी का भी निराकरण कर दिया जाएगा।

प्रति 50 स्क्वायर फुट के लिए वाहनों पर चार्ज
बिना लाइट वाला विज्ञापन- प्रति माह 8 हजार और सालाना 80 हजार रुपये लगेगा चार्ज। इससे ज्यादा विज्ञापन करने पर प्रति 50 स्क्वायर फुट के हिसाब से इतना ही लगेगा चार्ज। लाइट वाला विज्ञापन- प्रतिमाह 16 हजार और सालाना 16 लाख। इससे ज्यादा विज्ञापन करने पर प्रति 50 स्क्वायर फीट के हिसाब से प्रति माह 24 हजार और सालाना 24 लाख रुपये लगेगा चार्ज।

सिनेमा घरों का टैक्स में भी किए बदलाव
नए विज्ञापन रेटों के अनुसार अब सिनेमा घरों पर भी टैक्स घटा दिया गया है। नए रेट के अनुसार फिल्म के बीच में दिखाए जाने वाले विज्ञापन के लिए 3 हजार रुपये प्रति माह और 28 हजार 800 रुपये सालाना चार्ज देना होगा। इसके अलावा फिल्म के 15 हजार रुपये प्रति माह और 1 लाख 44 हजार सालाना चार्ज भी देना होगा। यह चार्ज प्रति स्क्रीन के हिसाब से लिए जाएंगे। पिछली बार गलती के कारण प्रतिदिन के हिसाब से सिनेमा घरों पर चार्ज लगाया जा रहा था। उसके हिसाब से सिनेमा घरों को सालाना 12 लाख रुपये तक का रेट तय किया गया था।

हॉट एयर गुब्बारे से विज्ञापन के रेट में भी बदलाव
नए विज्ञापन रेट के अनुसार अब हॉट एयर गुब्बारे से विज्ञापन करने के लिए 400 रुपये प्रति स्क्वायर फुट प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज देना होगा। सात दिन बाद यह चार्ज 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हो जाएगा।   

कई विज्ञापनों के रेट को किया गया दोगुना
नए विज्ञापन रेट में प्रशासन की ओर से रेट लगभग दोगुना किया गया है। हालांकि, सिनेमा घरों में विज्ञापन के रेट घटाए गए हैं। क्योंकि पहले रेट तय करने में गलती हो गई थी। दीवारों पर होर्डिंग व अन्य बिना लाइट वाले विज्ञापन के लिए 10 स्क्वायर फुट तक 2400 रुपये सालाना, 25 स्क्वायर फुट तक 4800 रुपये सालाना और उससे ऊपर विज्ञापन करने पर 6000 रुपये सालाना देना होगा।

इसी प्रकार विज्ञापन दाता का नाम, अनाउंसमेंट और डिस्प्ले करने पर प्रति 10 स्क्वायर फुट के लिए प्रति माह 1200 रुपये, 25 स्क्वायर फुट तक 2 हजार और उससे ज्यादा 2400 रुपये देना होगा।
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