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मिर्चपुर कांड में 20 लोगों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा, जानिए क्या हुआ था आठ साल पहले
आदेश दलाल, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
Updated Sat, 25 Aug 2018 09:29 AM IST
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फाइल फोटो
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हरियाणा के मिर्चपुर कांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जानिए आठ साल पहले मिर्चपुर में घटी घटनाक्रम के बारे में...
घटना 8 साल पुरानी है जब अप्रैल 2010 में हरियाणा के मिर्चपुर इलाके में 70 साल के दलित बुजुर्ग और उसकी बेटी को जिन्दा जिला दिया गया था।
इसके बाद गांव के दलितों ने पलायन कर लिया था। गौरतलब है कि दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने मिर्चपुर काड में दोषी ठहराए गए पंद्रह आरोपियों में से घर जलाने वाले तीन को उम्रकैद और आगजनी के पांच दोषियों को पांच-पांच वर्ष कैद समेत 20-20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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घटना 8 साल पुरानी है जब अप्रैल 2010 में हरियाणा के मिर्चपुर इलाके में 70 साल के दलित बुजुर्ग और उसकी बेटी को जिन्दा जिला दिया गया था।
इसके बाद गांव के दलितों ने पलायन कर लिया था। गौरतलब है कि दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने मिर्चपुर काड में दोषी ठहराए गए पंद्रह आरोपियों में से घर जलाने वाले तीन को उम्रकैद और आगजनी के पांच दोषियों को पांच-पांच वर्ष कैद समेत 20-20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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घटना हरियाणा में हुई थी लेकिन उसके बावजूद इस पूरे मामले की सुनवाई पहले दिल्ली की निचली अदालत और फिर दिल्ली हाईकोर्ट में हुई। ऐसा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुआ क्योंकि सुप्रीम कोर्ट को लगा कि दलितों से जुड़ें इस मामले की ठीक से सुनवाई हरियाणा में नहीं हो सकती और इस मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित करना आसान होगा अगर सुनवाई हरियाणा में ही हुई। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरियाणा सरकार ने इस पूरे मामले को सुनवाई के लिए दिल्ली में ट्रांसफर कर दिया था।
2011 में अपने फैसले में 82 आरोपियों को रोहिणी कोर्ट ने बरी कर दिया था। जबकि 15 को दोषी बताते हुए कोर्ट ने सजा सुनाई थी। मामले में कुल 97 लोग आरोपी थे। बाकी बचे दंगा भड़काने के 7 आरोपियों को डेढ़ साल की सजा मिली और एक वर्ष के प्रोबेशन पर 10-10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया था जबकि 82 आरोपियों को बरी कर दिया था।
2011 में अपने फैसले में 82 आरोपियों को रोहिणी कोर्ट ने बरी कर दिया था। जबकि 15 को दोषी बताते हुए कोर्ट ने सजा सुनाई थी। मामले में कुल 97 लोग आरोपी थे। बाकी बचे दंगा भड़काने के 7 आरोपियों को डेढ़ साल की सजा मिली और एक वर्ष के प्रोबेशन पर 10-10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया था जबकि 82 आरोपियों को बरी कर दिया था।