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मंत्री अरुणा चौधरी, काम संभाल रहे पति अशोक चौधरी, अफसर को धमकाते दिखे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 23 Mar 2017 09:35 AM IST
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बेगम भईं कोतवाल, अब डर काहे का
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से पार्टी की दो महिला विधायकों को राज्यमंत्री का ओहदा देने के साथ ही प्रदेश की सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण और स्थानीय निकाय चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी सीटें देने का भले ही ऐलान कर दिया है, लेकिन महिलाओं के लिए शायद स्वतंत्र रूप से फैसले ले पाना अभी इतना आसान नहीं है। राज्यमंत्री अरुणा चौधरी ने अपना आफिस तो संभाल लिया है, लेकिन उनका सारा कामकाज उनके पति अशोक चौधरी कर रहे हैं।
शिक्षा राज्यमंत्री के आफिस में अरुणा चौधरी के साथ ही उनके पति की भी चेयर लग गई है और मातहत अधिकारी सभी फाइलें अशोक चौधरी के पास ही ले जा रहे हैं। फाइलों पर फैसला चौधरी ही ले रहे हैं। वहीं, अरुणा चौधरी खाली बैठी अपने पति को ही निहार रही हैं। आफिस में आने वाले सभी लोगों से डीलिंग, फोन काल व अन्य सभी काम मंत्री के पति ही संभाल रहे हैं।
अफसर को धमकाते दिखे चौधरी
बुधवार को शिक्षा मंत्री की आफिस का नजारा कुछ ऐसा था, मानो मंत्री अरुणा चौधरी नहीं बल्कि अशोक चौधरी हैं। पत्रकारों की उपस्थिति में ही अशोक चौधरी फोन पर किसी अफसर को धमका रहे थे। इसकी वीडियो रिकार्डिंग ‘अमर उजाला’ के पास है। अशोक चौधरी किसी महिला की नौकरी के बारे में फोन पर किसी अधिकारी से सिफारिश कर रहे हैं, लेकिन जब दूसरी ओर से अधिकारी ने संबंधित महिला के कामकाज को सब-स्टैंडर्ड बताते हुए असमर्थता जताई तो अशोक चौधरी ने कहा, ‘वह (महिला) पांच साल से काम कर रही हैं। अब सब-स्टैंडर्ड हो गईं? कोई बात नहीं, आप नहीं मान रहे तो ठीक है। किसी दिन हम आपके स्कूल में आकर देखेंगे कि कितना स्टैंडर्ड है?’ जाहिर है किसी अधिकारी को आदेश देने का अधिकार मंत्री को तो है, लेकिन मंत्री के रिश्तेदार भी यह काम करने लगें तो उस विभाग का क्या होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है। इस संबंध में अशोक चौधरी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
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शिक्षा राज्यमंत्री के आफिस में अरुणा चौधरी के साथ ही उनके पति की भी चेयर लग गई है और मातहत अधिकारी सभी फाइलें अशोक चौधरी के पास ही ले जा रहे हैं। फाइलों पर फैसला चौधरी ही ले रहे हैं। वहीं, अरुणा चौधरी खाली बैठी अपने पति को ही निहार रही हैं। आफिस में आने वाले सभी लोगों से डीलिंग, फोन काल व अन्य सभी काम मंत्री के पति ही संभाल रहे हैं।
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अफसर को धमकाते दिखे चौधरी
बुधवार को शिक्षा मंत्री की आफिस का नजारा कुछ ऐसा था, मानो मंत्री अरुणा चौधरी नहीं बल्कि अशोक चौधरी हैं। पत्रकारों की उपस्थिति में ही अशोक चौधरी फोन पर किसी अफसर को धमका रहे थे। इसकी वीडियो रिकार्डिंग ‘अमर उजाला’ के पास है। अशोक चौधरी किसी महिला की नौकरी के बारे में फोन पर किसी अधिकारी से सिफारिश कर रहे हैं, लेकिन जब दूसरी ओर से अधिकारी ने संबंधित महिला के कामकाज को सब-स्टैंडर्ड बताते हुए असमर्थता जताई तो अशोक चौधरी ने कहा, ‘वह (महिला) पांच साल से काम कर रही हैं। अब सब-स्टैंडर्ड हो गईं? कोई बात नहीं, आप नहीं मान रहे तो ठीक है। किसी दिन हम आपके स्कूल में आकर देखेंगे कि कितना स्टैंडर्ड है?’ जाहिर है किसी अधिकारी को आदेश देने का अधिकार मंत्री को तो है, लेकिन मंत्री के रिश्तेदार भी यह काम करने लगें तो उस विभाग का क्या होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है। इस संबंध में अशोक चौधरी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
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आफिस में शिक्षा मंत्री के साथ ही लगाई गई है पति की चेयर
बेगम भईं कोतवाल, अब डर काहे का
- फोटो : File Photo
विधायकों की सिफारिश से होंगे तबादले : अरुणा
बुधवार को पत्रकारों ने जब शिक्षा राज्यमंत्री से उनके विभाग में तबादलों के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि जल्दी ही तबादलों के बारे में नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत पहले आवेदन करने वालों को पहले मौका मिलेगा और उसके बाद अन्य आवेदकों को सीट खाली होने पर ही तबादला दिया जाएगा। इसके साथ ही अरुणा चौधरी ने कहा कि तबादलों में विधायकों की सिफारिश पर भी ध्यान दिया जाएगा।
दस दिन बाद भी मंत्री ने नहीं की अफसरों के साथ बैठक
राज्यमंत्री अरुणा चौधरी ने शिक्षा विभाग का कामकाज तो संभाल लिया है, लेकिन करीब दस दिन बीत जाने के बाद भी अब तक उन्होंने विभाग के अफसरों के साथ कोई बैठक नहीं की है और न ही भावी रणनीति को लेकर कोई रूपरेखा तैयार की गई है।
मैं अपनी पत्नी के आफिस में तो जा ही सकता हूं। सारे काम उन्हीं को करने है और आदेश भी उनके ही चलेंगे। अभी नया-नया कार्यभार संभाला है, इसलिए मैं सिर्फ उनकी मदद कर रहा हूं। चार-पांच दिन में मैं खुद यहां आना बंद कर दूंगा, तब तक अरुणा अच्छी तरह कामकाज समझ लेंगी। इस आफिस में जिन लोगों से आजकल मिल रहा हूं, वे सभी हमारे हलके दीनानगर के हैं और दीनानगर से किसी के मंत्री बनने से बहुत उत्साहित हैं, हालांकि मैं ?उन्हें बार-बार कहता हूं कि वे इतनी दूर न आएं, अरुणा और मैं खुद दीनानगर जाकर सबसे मिलते रहेंगे।
अशोक चौधरी, राज्यमंत्री अरुणा चौधरी के पति और स्थानीय निकाय विभाग पंजाब के पूर्व अतिरिक्त निदेशक
बुधवार को पत्रकारों ने जब शिक्षा राज्यमंत्री से उनके विभाग में तबादलों के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि जल्दी ही तबादलों के बारे में नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत पहले आवेदन करने वालों को पहले मौका मिलेगा और उसके बाद अन्य आवेदकों को सीट खाली होने पर ही तबादला दिया जाएगा। इसके साथ ही अरुणा चौधरी ने कहा कि तबादलों में विधायकों की सिफारिश पर भी ध्यान दिया जाएगा।
दस दिन बाद भी मंत्री ने नहीं की अफसरों के साथ बैठक
राज्यमंत्री अरुणा चौधरी ने शिक्षा विभाग का कामकाज तो संभाल लिया है, लेकिन करीब दस दिन बीत जाने के बाद भी अब तक उन्होंने विभाग के अफसरों के साथ कोई बैठक नहीं की है और न ही भावी रणनीति को लेकर कोई रूपरेखा तैयार की गई है।
मैं अपनी पत्नी के आफिस में तो जा ही सकता हूं। सारे काम उन्हीं को करने है और आदेश भी उनके ही चलेंगे। अभी नया-नया कार्यभार संभाला है, इसलिए मैं सिर्फ उनकी मदद कर रहा हूं। चार-पांच दिन में मैं खुद यहां आना बंद कर दूंगा, तब तक अरुणा अच्छी तरह कामकाज समझ लेंगी। इस आफिस में जिन लोगों से आजकल मिल रहा हूं, वे सभी हमारे हलके दीनानगर के हैं और दीनानगर से किसी के मंत्री बनने से बहुत उत्साहित हैं, हालांकि मैं ?उन्हें बार-बार कहता हूं कि वे इतनी दूर न आएं, अरुणा और मैं खुद दीनानगर जाकर सबसे मिलते रहेंगे।
अशोक चौधरी, राज्यमंत्री अरुणा चौधरी के पति और स्थानीय निकाय विभाग पंजाब के पूर्व अतिरिक्त निदेशक