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72वें आजादी दिवस में छलका मिल्खा सिंह का दर्द, देश के युवाओं को दे डाली बड़ी सलाह

Wed, 15 Aug 2018 08:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 15 Aug 2018 08:14 AM IST
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Milkha Singh said Think of the first country living abroad
उड़न सिख मिल्खा सिंह
पूरा देश आज 72 वां आजादी दिवस मना रहा है। इस दौरान एथलीट मिल्खा सिंह का दर्द भी छलक पड़ा और उन्होंने देश के युवाओं को बड़ी सलाह दी है। आजादी के लिए कितनी कुर्बानियां देनी पड़ीं। उन लोगों को मेरा सलाम, जिनकी वजह से हम आजाद हिंदुस्तान में खड़े होकर चैन की सांस ले रहे हैं। शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, ऊधम सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे न जाने कितने क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। मैंने भी अपने देश को गुलामी से आजाद होते हुए देखा है। 
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मैं विदेश में रहने वाले उन सभी भारतीयों को संदेश देना चाहता हूं कि वह पहले अपने देश के बारे में सोचें। उन्हें इस बात का अहसास होना चाहिए कि उनके पूर्वजों ने किस मुश्किलों से भारत को अंग्रेजों से आजाद कराया था। आजकल की पीढ़ी देश को आजाद करने वालों को भूलती जा रही। मेरा अभिभावकों से अनुरोध है कि वे अपने बच्चों को देश के वीरों की गाथा सुनाएं ताकि नौजवानों में देशभक्ति की भावना बरकरार रहे।
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1948 में इंग्लैंड को उसी के घर में हराकर लहराया था तिरंगा : बलबीर सिंह सीनियर
मेरे पिता भ़ी क्रांतिकारी थे। मैं हमेशा उनसे देश को आजाद कराने की बातें सुनता था। वह हमेशा कहते थे कि एक दिन देश को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराना है। जब तक देश आजाद नहीं होगा, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। इन बातों को सुनकर ही मैं बड़ा हुआ हूं। यही वजह है कि 94 वर्ष की उम्र होने के बावजूद मेरे जेहन में हमेशा भारत का तिरंगा लहराता रहता है। ठीक उसी तरह से, जैसे आजादी के बाद 1948 में इंग्लैंड को उसी के घर में हराकर वहां पर तिरंगा लहराया था। 
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बात 1948 की है। पहली बार भारत ने ओलंपिक में हिस्सा लिया था और इंग्लैंड को उसके घर में जमकर पीटा था। मैं भी उस टीम का हिस्सा था। आज भी जब उस जीत को याद करता हूं तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। मेरी नजर में आजादी का मतलब है वतन में खुशहाली, राष्ट्रीय गान और तिरंगे का सम्मान और देश सेवा का जज्बा।   
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