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हजकां विधायकों की सदस्यता पर फैसला आज

Wed, 08 Oct 2014 10:14 PM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 08 Oct 2014 10:14 PM IST
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Membership of HJC MLAs, Decision today in high court

वर्ष 2009 में हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) बीएल की टिकट पर चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे पांच विधायकों की सदस्यता पर वीरवार को हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई की याचिका पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस के कानन की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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हरियाणा के मौजूदा विधानसभा चुनाव में यह फैसला विशेष महत्व रखेगा। कांग्रेस या हजकां में से किसी एक पर इस फैसले का प्रभाव निश्चित तौर पर पड़ेगा। हजकां प्रमुख समेत पार्टी के छह विधायक चुनाव जीते थे। इनमें असंध से जिले राम शर्मा, समालखा से धर्म सिंह छोक्कर, दादरी से सतपाल सांगवान, नारनौल से राव नरेंद्र सिंह और हांसी से विनोद भ्याणा हजकां के विधायक बने थे। इन पांचों विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था और जिले राम को छोड़कर बाकी चारों कांग्रेस की टिकट पर इस बार उन्हीं विधानसभा हलकों से भाग्य आजमा रहे हैं।
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कंबोपुरा के सरपंच करम सिंह की मौत के मामले में जिले राम शर्मा के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। कांग्रेस से उन्हें टिकट नहीं मिला था, वह आजाद प्रत्याशी के तौर पर असंध से मैदान में हैं। बिश्नोई ने विधानसभा स्पीकर के समक्ष इन विधायकों के खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई कर सदस्यता रद्द करने की याचिका दायर की थी।

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फैसले से हजकां या कांग्रेस को मिलेगी शक्ति

Membership of HJC MLAs, Decision today in high court

स्पीकर के पास यह मामला लंबे समय तक लटका रहा और पिछले साल स्पीकर कुलदीप शर्मा ने हजकां का कांग्रेस में विलय मानते हुए बिश्नोई की याचिका खारिज कर दी थी। इस दलील के साथ उनके कांग्रेस में आने को स्पीकर ने सही ठहराया था।

स्पीकर के इस फैसले के खिलाफ बिश्नोई ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बिश्नोई ने स्पीकर का फैसला रद्द करने की मांग करते हुए पांचों विधायकों की सदस्यता रद्द करने की गुहार लगाई थी। पैरवी में स्पीकर और विधायक अपने तर्क पर स्थिर रहे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।

वीरवार को इस मामले का निपटारा होने जा रहा है। यदि बिश्नोई की याचिका मंजूर होती है तो पांचों विधायकों को पांच साल तक सत्ता सुख हासिल करते हुए मिले वित्तीय लाभ लौटाने होंगे। इसके अलावा मौजूदा चुनाव में कांग्रेस की किरकिरी भी हो सकती है कि वह अल्पमत में ही सरकार चलाती रही।

विधायकों की सदस्यता रद्द होने की सूरत में हुड्डा सरकार अल्पमत की साबित होगी। ऐसे में बिश्नोई के हाथ नया मुद्दा लग सकता है और चुनाव में वह इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोडेंगे। दूसरी ओर, यदि बिश्नोई की याचिका खारिज हो गई तो फिर से चुनाव लड़ रहे इन पांच विधायकों के चेहरे खिल उठेंगे और उनके तरकश में एक और तीर आ जाएगा।

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