कृषि कानून: केंद्र से बात करने को 29 किसान संगठन राजी, दिल्ली में सात सदस्यीय कमेटी करेगी वार्ता
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नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत 29 किसान यूनियनों ने दिल्ली बुलावे को आखिरकार स्वीकार कर लिया है। बुधवार को दिल्ली में कृषि मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल के साथ होने वाली बैठक में यूनियनों द्वारा गठित सात सदस्यीय कमेटी के सदस्य मुलाकात के लिए दिल्ली जाएंगे। चंडीगढ़ में मंगलवार को किसान भवन में हुई यूनियनों की तालमेल कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया। हालांकि किसान यूनियनों के सभी आमंत्रित सदस्य भी दिल्ली पहुंचकर बैठक में हिस्सा लेंगे।
भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने बैठक के बाद हुई पत्रकार वार्ता में कहा कि केंद्रीय सचिव से बात करने के लिए हमने सभी मुद्दों पर चर्चा कर मसौदा तैयार कर लिया है। जिसे दिल्ली में कृषि सचिव के साथ होने वाली बैठक में रखा जाएगा। भाकियू प्रधान ने यह भी कहा कि वह अपनी मांगों को केंद्रीय मंत्रियों के ही समक्ष रखेंगे, यह बात बैठक में उन्हें बता दी जाएगी।
आंदोलन के दौरान रेलवे ट्रैक खोलने पर उन्होंने जवाब दिया कि जब तक उनकी मांगों पर केंद्रीय स्तर पर कोई फैसला नहीं होता, तब तक रेल रोको आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि रेलवे ट्रैक खोलने को लेकर 15 अक्तूबर को होने वाली बैठक में फैसला किया जाएगा। दिल्ली में होने वाली बैठक में किसान केंद्र सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी और किसानों की जमीनों पर मंडरा रहे कारपोरेट जगत के खतरे पर यूनियनें चर्चा करेंगी।
ये सात किसान नेता दिल्ली में रखेंगे बात
तालमेल कमेटी की बैठक में दिल्ली में कृषि सचिव से वार्ता के लिए सात सदस्यीय कमेटी में बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ. दर्शन पाल, सतनाम सिंह सानी, जगजीत सिंह, जगमेल सिंह, सुरजीत सिंह और कुलवंत सिंह को शामिल किया गया है।
बाजवा को सुनाई दो टूक
किसान भवन में दिल्ली जाने को लेकर किसान तालमेल कमेटी की बैठक में कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा भी पहुंचे। जहां उन्होंने किसानों से वार्ता का प्रस्ताव रखा। कमेटी के पदाधिकारियों ने मंत्री को दो टूक जवाब दिया कि जब तक वह कृषि कानूनों को निष्क्रिय करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र नहीं बुलाएंगे, तब तक कोई वार्ता नहीं की जाएगी।
पांच नवंबर को देशभर में करेंगे चक्का जाम
किसान भवन में आयोजित बैठक में भाकियू प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि किसान अब अपने आंदोलन को देशव्यापी करने की तैयारी कर रहे हैं। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कुछ किसान जत्थेबंदियों की बैठक हुई है, जिसमें फैसला लिया गया है कि कृषि कानूनों के विरोध में पांच नवंबर को देशभर में चक्का जाम किया जाएगा। यह चक्का जाम सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक रहेगा।
किसानों से वार्ता हो गई है। सरकार ने किसानों के सामने अपना पक्ष रख दिया है। साथ ही आश्वासन दिया है कि सरकार उनके संघर्ष में साथ देती रहेगी। किसानों ने विधानसभा सत्र बुलाने की मांग रखी है। बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में विधानसभा सत्र बुलाने को लेकर फैसला किया जाएगा। तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, कैबिनेट मंत्री, पंजाब
पंजाब में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। किसान आंदोलन को समाप्त करने के लिए सरकार झूठ बोल रही है कि पंजाब में कोयला समाप्त हो गया है। सरकार चाहती है कि किसानों का आंदोलन अब समाप्त हो जाए लेकिन किसान अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। - बलबीर सिंह राजेवाल, प्रधान, भारतीय किसान यूनियन।