किसानों की कचहरी: सभी दलों ने रखा अपना-अपना पक्ष, किसान नेताओं ने सुनाई खरी-खरी, कहा- चुनाव के चक्कर में बर्बाद न करें आंदोलन
चंडीगढ़ में शुक्रवार को पंजाब के 32 किसान संगठनों व छह राजनीतिक दलों के नेताओं ने बैठक की। बैठक में किसान नेताओं ने राजनीतिक दलों के नेताओं को खूब खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि चुनाव के चक्कर में किसान आंदोलन को बर्बाद न करें। बैठक में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल समेत छह दलों ने हिस्सा लिया। खास बात यह है कि किसानों ने भाजपा को बैठक का न्योता नहीं भेजा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार में जुटे राजनीतिक दलों को 32 किसान संगठनों के नेताओं ने खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि उनकी रैलियों के चक्कर में किसान आंदोलन कमजोर पड़ रहा है, इसलिए वह चुनाव की घोषणा तक रैलियों पर रोक लगाएं। किसानों की इस कचहरी में शिअद, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत छह राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया।
पंजाब के 32 किसान संगठनों ने भाजपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दलों के साथ बैठक का एलान किया था। इसी के तहत शुक्रवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-36 स्थित पीपल्स कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को किसान कचहरी का आयोजन किया। जिसमें पहले चरण में शिअद और दूसरे चरण में कांग्रेस और तीसरे चरण में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने हिस्सा लिया। इन दलों के अतिरिक्त शिअद- बसपा और लोक इंसाफ पार्टी ने भी किसान कचहरी में प्रतिभाग किया।
सभी दलों को किसान नेताओं ने आगाह किया कि चुनाव की घोषणा तक वह राज्य में चुनावी रैलियों और जनसंपर्क आदि न करें। चुनाव प्रचार के कारण गांवों में भाईचारा खराब हो रहा है, जिसका सीधा असर उनके आंदोलन पर पड़ रहा है। उन्होंने सियासतदारों को कहा कि अगर वह इन रैलियों पर जल्द ब्रेक नहीं लगाएंगे तो वह उनका उग्र विरोध जारी रखेंगे। मोगा और करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज और किसानों पर दर्ज हुए मुकदमों को लेकर भी किसान नेताओं ने राजनीतिक दलों को खरी-खरी सुनाई।
शिरोमणि अकाली दल ने यह रखा प्रस्ताव
शिअद ने किसान संगठनों के सामने अपना पक्ष रखा और कहा कि रैलियों के जरिए ही नेता जनता के बीच पहुंच पाते हैं, यदि वह रैलियां ही नहीं करेंगे तो जनता के बीच कैसे पहुंच पाएंगे। शिअद की ओर से विकल्प रखा गया कि किसान रैलियां जारी रखें, जब भी किसानों का कार्यक्रम होगा शिअद अपने सभी कार्यक्रमों को रद्द कर देगा। शिअद की ओर से प्रो. चंदूमाजरा और डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने बैठक में हिस्सा लिया।
सिद्धू बोले- कांग्रेस किसानों के साथ
किसानों की इस कचहरी में पार्टी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू, संगठन महासचिव परगट सिंह और कार्यकारी प्रधान कुलजीत नागरा के साथ पहुंचे। जहां उन्होंने हाल ही में हुई लाठीचार्ज की घटनाओं पर प्रति खेद प्रकट किया। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि कांग्रेस उनके साथ है और उनकी मांगों को वह आगे तक ले जाएंगे।
सत्ता में आते ही कृषि कानूनों के खिलाफ लाएंगे प्रस्ताव: आप
आम आदमी पार्टी की ओर से किसान विंग के प्रदेश अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां, विधायक अमन अरोड़ा और बलजिंदर कौर शामिल हुए। आप नेताओं ने किसान संगठनों को आश्वस्त किया कि उनकी पार्टी हमेशा से किसानों के साथ है और भविष्य में भी साथ रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार सत्ता में आते ही पंजाब में तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी।
क्यों लगानी पड़ी किसान कचहरी
किसान नेताओं के अनुसार मजबूरी में किसान कचहरी का आयोजन करना पड़ा। 32 किसान संगठनों के नेताओं का कहना है कि शिअद की चुनावी 'गल पंजाब' मुहिम के कारण किसान आंदोलन बर्बाद हो रहा है। गांवों में सियासत के कारण भाईचारे पर असर पड़ रहा है। पंजाब में एक बार फिर से आंदोलन को राज्य में मजबूत आधार देने के लिए चुनाव की घोषणा तक इन रैलियों पर तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाना अनिवार्य है।