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स्पीड टेस्ट देने के इच्छुक युवाओं के लिए अहम खबर

Mon, 16 Feb 2015 04:14 PM IST
सुनील चौहान/अमर उजाला, धारूहेड़ा
सुनील चौहान/अमर उजाला, धारूहेड़ा Updated Mon, 16 Feb 2015 04:14 PM IST
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Medical Test Compulsion for SPEED Test in Haryana

फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट से शारीरिक दक्षता पास करने वाले खिलाड़ियों को इस बार नहीं बख्शा जाएगा। स्पोर्ट्स फिजिकल एक्सरसाइज इवेल्यूएशन एंड डवेलपमेंट (स्पीड) टेस्ट में इस बार चयनित होने वाले खिलाड़ियों को शारीरिक परीक्षा के साथ माइंड टेस्ट ही नहीं, मेडिकल टेस्ट से भी गुजरना पड़ेगा।

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इसका लक्ष्य खिलाड़ियों की मेडिकल जांच के साथ-साथ उम्र की भी जांच करना होगा। स्पीड के 4 साल के इतिहास में पहली बार चयनित खिलाड़ियों को मेडिकल टेस्ट से गुजरना पड़ेगा। अधिकारियों की मानें तो बार -बार आ रही जन्मतिथि की शिकायतों के चलते ही ऐसा निर्णय लिया गया है।
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इस बार स्पीड टेस्ट के तहत स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट ने नए मानक बनाते हुए कई परिवर्तन किए हैं। इसी के चलते अंतिम प्रकिया में स्किल टेस्ट जरूरी किया गया था, वहीं सही उम्र व मेडिकल जांच के लिए चयनियत खिलाड़ियों की इस बार मेडिकल टेस्ट लेने का भी निर्णय लिया गया है। गौरतलब है कि अब तक स्पीड के लिए चयनित खिलाड़ियों का मेडिकल टेस्ट नहीं लिया जाता था।

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फर्जी मिला बर्थ सर्टिफिकेट तो स्कॉलरशिप नहीं

Medical Test Compulsion for SPEED Test in Haryana

अगर किसी खिलाड़ी का चयन हो गया और बाद में की गई जांच में यह पता चलता है कि उसका बर्थ सर्टिफिकेट गलत था तो खिलाड़ी की स्कॉलरशिप बीच मे ही बंद कर दी जाएगी। इतना ही नहीं ऐसे विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी, ताकि फर्जीवाड़ा करने वालों पर रोक लगाई जा सके।

धारूहेड़ा व रेवाड़ी से मिल रही थीं शिकायतें
सूत्रों के मुताबिक खिलाड़ियों के गलत बर्थ सर्टिफि केट से संबंधित शिकायतें बार-बार मिल रही थीं। इसी के चलते चयनित खिलाड़ियों का मेडिकल टेस्ट लेने का निर्णय लिया गया। मेडिकल टेस्ट से खिलाड़ियों की फिटनेस के साथ ही उम्र की भी जांच की जाएगी। विभाग के अनुसार धारूहेड़ा व रेवाड़ी के कई बच्चों की इस तरह की शिकायतें मिली थी।

क्या है स्पीड टेस्ट
स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के मुताबिक स्पैट को साल 2010 से अच्छी प्रतिभाओं को खोजने के लिए शुरू किया गया था। इसके तहत चयनित 6 से 14 साल उम्र के बच्चों को स्कॉलरशिप के रूप में 1500 रुपये दिए जाते थे, जिसे स्पीड बनने के बाद बाद में बढ़ाकर दो हजार रुपए कर दिया गया था।

वहीं 15 साल से 19 साल के बच्चों को पहले दो हजार रुपए मासिक स्कॉलरशिप, जिसे बढ़ाकर 3 हजार रुपये कर दिया गया है। स्पैट 3 चरणों में आयोजित किया जाता था। लेकिन स्पीड पांच चरणों में आयोजित किया जा रहा है।

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