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दुर्लभ पौधों से अब निःसंतानता पर जीत पाने की तैयारी, बचपन में ही पता चल जाएंगे बांझपन के लक्षण
Fri, 14 Jun 2019 02:38 PM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 14 Jun 2019 02:38 PM IST
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देश में एक ऐसी दवा बनाई जा रही है, जो बांझपन का इलाज करेगी। वहीं बचपन में ही इनफर्टिलिटी के लक्षणों का पता चल जाएगा और समय रहते उनका समाधान किया जा सकेगा। महिलाओं में नि:संतानता किसी भारी बोझ से कम नहीं है। यूं तो यह समस्या पुरुषों में भी पाई जाती है, लेकिन इस तकलीफ से जितनी मानसिक प्रताड़ना महिलाओं को होती है, उसका अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल है।
महिलाओं में इनफर्टिलिटी यानी नि:संतानता एक ऐसी तकलीफ है, जिसमें शारीरिक कष्ट से ज्यादा मानसिक तनाव महिला को झकझोर देता है। दिन भर तनावग्रस्त जिंदगी के चलते युवाओं में इनफर्टिलिटी (अनुर्वरता)की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। युवाओं ने करियर बनाने के चक्कर में इस कदर खुद को झोंक रखा है कि अत्यधिक तनाव के चलते वह इनफर्टिलिटी की जद में आ रहे हैं। इसके अलावा काम करने के अत्यधिक घंटे, अधिक वर्कलोड और जंक फूड का अत्यधिक सेवन भी इनफर्टिलिटी की बड़ी वजह है।
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महिलाओं में इनफर्टिलिटी यानी नि:संतानता एक ऐसी तकलीफ है, जिसमें शारीरिक कष्ट से ज्यादा मानसिक तनाव महिला को झकझोर देता है। दिन भर तनावग्रस्त जिंदगी के चलते युवाओं में इनफर्टिलिटी (अनुर्वरता)की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। युवाओं ने करियर बनाने के चक्कर में इस कदर खुद को झोंक रखा है कि अत्यधिक तनाव के चलते वह इनफर्टिलिटी की जद में आ रहे हैं। इसके अलावा काम करने के अत्यधिक घंटे, अधिक वर्कलोड और जंक फूड का अत्यधिक सेवन भी इनफर्टिलिटी की बड़ी वजह है।
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अभी तक देश में इस मर्ज की कोई साइंटिफिक दवा नहीं है, जबकि देसी दवाओं के रूप में मार्केट में कई तरह के प्रोडक्ट मौजूद हैं। वहीं अब केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के अधीनस्थ सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ द्वारा इनफर्टिलिटी पर विजय पाने की तैयारी की जा रही है। इसके निदान के लिए एक दवा पर रिसर्च की जा रही है।
रिसर्च टीम से जुड़े हरियाणा मूल के सीनियर साइंटिस्ट डॉक्टर राजेंद्र सिंह बताते हैं कि यह दवा दुलर्भ प्रजाति के पौधों से तैयार की जा रही है, जो इनफर्टिलिटी दूर करने में मददगार साबित होगी। देश में अभी तक इस रोग की वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कोई दवा नहीं है। लेकिन अब जो दवा तैयार की जा रही है, वह देश की पहली साइंटिफिक मेडिसिन होगी। रिसर्च दिसंबर 2019 तक पूरी हो जाएगी और अगले साल ये दवा मार्केट में उपलब्ध होगी। रिसर्च पूरी तरह आयुर्वेद पर आधारित है।
डीएनए मार्कर किट बताएगी इनफर्टिलिटी के लक्षण
इस दवा के अलावा एक और रिसर्च की जा रही है। इसके बाद बचपन में ही पता चल जाएगा कि बच्चे में इनफर्टिलिटी के लक्षण हैं या नहीं। रिसर्च के दौरान डीएनए एनालिसिस करके ऐसे इनफर्टिलिटी मार्कर चिह्नित किए जा रहे हैं, जो बचपन की स्टेज में ही इनफर्टिलिटी के लक्षण बता देंगे। रिसर्च के बाद डीएनए मार्कर किट तैयार की जाएगी, जिसमें बच्चे के सिर्फ ब्लड सैंपल की जरूरत होगी। रिसर्च का एक चरण पूरा हो चुका है और दूसरा चरण शुरू हो गया है। वर्ष 2022 तक यह रिसर्च भी पूरी हो जाएगी।
रिसर्च टीम से जुड़े हरियाणा मूल के सीनियर साइंटिस्ट डॉक्टर राजेंद्र सिंह बताते हैं कि यह दवा दुलर्भ प्रजाति के पौधों से तैयार की जा रही है, जो इनफर्टिलिटी दूर करने में मददगार साबित होगी। देश में अभी तक इस रोग की वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कोई दवा नहीं है। लेकिन अब जो दवा तैयार की जा रही है, वह देश की पहली साइंटिफिक मेडिसिन होगी। रिसर्च दिसंबर 2019 तक पूरी हो जाएगी और अगले साल ये दवा मार्केट में उपलब्ध होगी। रिसर्च पूरी तरह आयुर्वेद पर आधारित है।
डीएनए मार्कर किट बताएगी इनफर्टिलिटी के लक्षण
इस दवा के अलावा एक और रिसर्च की जा रही है। इसके बाद बचपन में ही पता चल जाएगा कि बच्चे में इनफर्टिलिटी के लक्षण हैं या नहीं। रिसर्च के दौरान डीएनए एनालिसिस करके ऐसे इनफर्टिलिटी मार्कर चिह्नित किए जा रहे हैं, जो बचपन की स्टेज में ही इनफर्टिलिटी के लक्षण बता देंगे। रिसर्च के बाद डीएनए मार्कर किट तैयार की जाएगी, जिसमें बच्चे के सिर्फ ब्लड सैंपल की जरूरत होगी। रिसर्च का एक चरण पूरा हो चुका है और दूसरा चरण शुरू हो गया है। वर्ष 2022 तक यह रिसर्च भी पूरी हो जाएगी।