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Haryana News: मेडिकल कॉलेजों को चार साल बाद मिल सकेंगे स्थायी निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक, विभाग ने मांगे आवेदन

Wed, 08 Jun 2022 02:33 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 08 Jun 2022 02:33 PM IST
सार

कॉलेज निदेशक के लिए पीजी डिग्री के बाद 20 साल का टीचिंग व रिसर्च का अनुभव और पांच साल तक प्रोफेसर के तौर पर अनुभव होना जरूरी है। साथ ही राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की ओर से तय पेपर पब्लिश होने चाहिए।

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Medical colleges will get permanent director and medical superintendent after four years in Haryana
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के चार मेडिकल कॉलेजों को चार साल बाद अब स्थायी निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक मिल सकेंगे। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से चार निदेशकों और चार चिकित्सा निदेशकों के लिए आवेदन मांगे गए हैं। अहम बात ये है कि पहली बार सरकार की ओर से इन पदों के लिए नई योग्यता और नए नियम तय किए हैं। अब निदेशक खुद अपना कॉलेज चयन नहीं कर सकेंगे, बल्कि निदेशक पर चयन होने के बाद सरकार उनको किसी भी मेडिकल कॉलेज में भेज सकती है। 

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पिछले चार साल से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अस्थायी निदेशक और चिकित्सा निदेशक काम संभाल रहे हैं। इससे कॉलेज में कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। करनाल स्थित कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज, बीपीएस खानपुर मेडिकल कॉलेज सोनीपत, अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज, छैंसा (फरीदाबाद) और एसएचकेएम मेडिकल कॉलेज मेवात में कार्यकारी निदेशक काम कर रहे हैं। 
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इसी प्रकार, चिकित्सा अधीक्षकों के पद हैं। इसको लेकर सभी सरकारी मेडिकल कालेजों में कार्य प्रभावित हो रहे थे। कॉलेजों को स्थायी निदेशक देने के लिए चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की ओर से पहले दोनों पदों के लिए नई योग्यता और नए नियम तय किए हैं। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की मंशा है कि सभी कॉलेजों को सुचारु रूप से चलाने के लिए स्थायी निदेशक व चिकित्सा अधीक्षक हों। इसी को देखते हुए जल्द ही चयन प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।

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निदेशक के लिए 20 साल का अनुभव जरूरी

कॉलेज निदेशक के लिए पीजी डिग्री के बाद 20 साल का टीचिंग व रिसर्च का अनुभव और पांच साल तक प्रोफेसर के तौर पर अनुभव होना जरूरी है। साथ ही राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की ओर से तय पेपर पब्लिश होने चाहिए। इसी प्रकार, चिकित्सा अधीक्षक पद के लिए पांच साल तक 300 बेड के अस्पताल में बतौर एमएस का अनुभव या पांच साल तक क्लीनिकल विभाग में बतौर मुखिया का अनुभव हो। 10 साल तक प्रशासनिक अनुभव होना जरूरी है। निदेशक और चिकित्सा निदेशक के पद तीन साल के लिए होंगे। 

चिकित्सा निदेशक के लिए प्री मेरिट क्राइटेरिया अपनाया जाएगा
पहली बार चिकित्सा अधीक्षक पद के चयन के लिए लिए प्री मेरिट क्राइटेरिया अपनाया जाएगा। इसमें अभ्यर्थी के एमबीबीएस करियर में हासिल अंक, प्रोस्ट ग्रेजुएट में प्राप्त अंकों के साथ साथ अनुभव के आधार पर मेरिट बनेगी। साथ ही रिचर्स करने वाले के लिए 18 अतिरिक्त अंक रखे गए हैं। इस प्रकार से 50 अंक करियर के आधार पर आधारित मेरिट के होंगे और केवल 50 अंक का साक्षात्कार होगा।

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