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MBBS Bond Policy: बीच का रास्ता निकालने में जुटे CM के रणनीतिकार, पॉलिसी पर पुर्नविचार शुरू
Fri, 25 Nov 2022 02:28 PM IST
भूपेंद्र सिंह
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 25 Nov 2022 02:28 PM IST
सार
बॉन्ड राशि 20 लाख रुपये और समयावधि 5 साल करने पर पुर्नविचार हो रहा है। देश के सभी राज्यों की बॉन्ड पालिसी का अध्ययन कर सूची तैयार की गई है।
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सीएम मनोहर लाल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा में एमबीबीएस बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ हो रहे आंदोलन के बीच अब सरकार इसका समाधान निकालने में जुट गई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की एसीएस और डीएमईआर निदेशक के विद्यार्थियों को मनाने में नाकाम रहने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने कमान संभाल ली है। मुख्यमंत्री के रणनीतिकारों ने पॉलिसी पर पुर्नविचार शुरू कर दिया है।
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देश के अन्य राज्यों की बॉन्ड पॉलिसी के अध्ययन के बाद उच्च अधिकारियों ने प्रदेश की बॉन्ड पॉलिसी में संशोधन करने का सुझाव दिया है। इसके तहत बॉन्ड राशि को 40 लाख से घटाकर 20 लाख रुपये और समय अवधि 7 साल से कम कर 5 साल किए जाने पर विचार करने को कहा है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लेना है।
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बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में 24 दिनों से प्रदेश के 4 मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थी पीजीआई रोहतक में मेडिकल के विद्यार्थी धरने पर बैठे हैं। इन्हें रेजिडेंट डॉक्टर्स का भी साथ मिल गया है। 48 घंटे के लिए ओपीडी बंद कर दी गई है और इमरजेंसी सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी गई है। मेडिकल कॉलेजों में बिगड़ते हालातों को देखते हुए अब मुख्यमंत्री कार्यालय सक्रिय हो गया है।
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मुख्यमंत्री कार्यालय के उच्चस्तरीय अधिकारियों ने तमाम राज्यों की पॉलिसी के अध्ययन के बाद पाया है कि हरियाणा की बॉन्ड पालिसी सभी राज्यों से सख्त है और इसमें समय अवधि और राशि सबसे अधिक है। सीएमओ अधिकारियों ने सभी राज्यों की बॉन्ड पॉलिसी की सूची तैयार कर मुख्यमंत्री मनोहर लाल को सौंप दी है, साथ ही अपने सुझाव भी दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक उच्च अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पॉलिसी को लेकर उच्चस्तर पर पुर्नविचार चल रहा है। जल्द इस आंदोलन को पटाक्षेप हो सकता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से भी सरकार नाराज
विद्यार्थियों का आंदोलन लंबा चलने से सरकार स्वास्थ्य अधिकारियों के रवैये से भी नाराज है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के एसीएस और डीएमईआर निदेशक का ढुलमुल रवैया भी जिम्मेदार माना जा रहा है। एक तो दोनों ही अधिकारियों ने 20 दिनों तक आंदोलनरत विद्यार्थियों से मुलाकात करने की जहमत नहीं उठाई।
जब मिले तो अधिकारियों का रवैया नकारात्मक रहा और वह विद्यार्थियों को विश्वास में नहीं ले पाए। 21 नवंबर को विद्यार्थी डीएमईआर निदेशक से मिले थे। 22 नवंबर को विद्यार्थी विभाग की एसीएस जी अनुुपमा से मिलने पहुंचे थे, लेकिन तीन घंटे तक उनसे मिलने ही इंकार कर दिया। जब उन्होंने न्यू सचिवालय के बाहर ही धरना शुरू किया तो मुलाकात की, इससे विद्यार्थियों का आक्रोश और बढ़ गया।
हरियाणा की बॉन्ड पॉलिसी सभी राज्यों से सख्त
अध्ययन में पाया गया है कि पालिसी के विरोध का असल का कारण ये है कि देश के सभी राज्यों से अधिक सख्त है। हरियाणा में 36.40 लाख रुपये की राशि है और बॉन्ड की अवधि 7 साल है। इसके अलावा, शेष राज्यों में 1 से लेकर 5 साल की अवधि है, जबकि राशि की 5 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये है। हरियाणा के बाद सबसे अधिक असम में 5 साल और 30 लाख रुपये, मेघालय में पांच साल और 25 लाख रुपये, छत्तीसगढ़ में 2 साल और 25 लाख रुपये का प्रावधान है।
दस राज्यों में बॉन्ड पॉलिसी नहीं
बिहार, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरला, मनीपुर, नागालैंड, मिजोरम, सिक्कम और पश्चिमी बंगाल में और एम्स में बॉन्ड पॉलिसी नहीं है
हरियाणा को छोड़ किसी राज्य में बैंक शामिल नहीं
देश के किसी भी राज्य में बॉन्ड पॉलिसी में बैंक की इनवालवमेंट नहीं है। केवल गुजराज में बैंक को गारंटीयर के तौर पर रखा गया है, शेष राज्यों में सरकार और एमबीबीएस विद्यार्थियों के बीच बांड भरा जाता है।
17 राज्यों में नौकरी की गारंटी
मेघालय, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडू, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, अंडेमान निकोबार, ईएसआई संस्थान, अरूणाचल प्रदेश, आसाम, छत्तीशगढ़, गोवा और गुजरात में (डिग्री के बाद 6 माह में) नौकरी की गारंटी है, जबकि हरियाणा की पालिसी में नौकरी की गारंटी नहीं है।