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नारियल तोड़कर मेयर ने शुरू किया सड़क मरम्मत का कार्य
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चंडीगढ़। जर्जर सड़कों से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। नगर निगम ने सड़कों की मरम्मत का कार्य सोमवार से शुरू कर दिया है। मेयर राजबाला मलिक ने नारियल तोड़कर सड़क निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। मेयर ने कहा कि जर्जर सड़कों को देखकर मुझे भी बुरा लगता था। अब जल्द पूरे शहर की सड़कों का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। उसकी गुणवत्ता का भी ध्यान रखा जाएगा।
शहर की जर्जर सड़कों केलिए आए दिन कहीं विपक्षी पार्टियां प्रदर्शन कर रहीं थीं तो कहीं लोग प्रशासक व एडवाइजर को पत्र लिखकर इस समस्या से निजात दिलाने की बात कह रहे थे। आखिरकार निगम ने सेक्टर 43 की वी 5 सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। इस मौके पर मेयर के साथ डिप्टी मेयर जगतार सिंह जग्गा और क्षेत्रीय पार्षद चंद्रवती शुक्ला भी मौजूद थीं। मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क की गुणवत्ता में कोई लापरवाही न हो। सड़क बनने के बाद कम से कम पांच साल चलनी चाहिए।
एडवाइजर के वादे को दो माह बीते, फंड मिला नहीं
एडवाइजर मनोज परिदा नवंबर में सड़क निर्माण कार्य बंद होने से दो दिन पूर्व नगर निगम पहुंचे थे। वहां उन्होंने सड़कों के लिए 62 करोड़ देने की घोषणा की थी। वहीं निगम को कुल 75 करोड़ देने का वादा किया था। हालंाकि, निगम और एडवाइजर दोनों को पता था कि सड़क अब नहीं बन सकती हैं। घोषणा के दो माह बाद भी अब तक प्रशासन की ओर से निगम को फंड उपलब्ध नहीं कराया गया है। ठेकेदारों का कहना है कि बकाया दीजिए तब काम करेंगे। ऐसे में प्रशासन की मंशा नहीं दिख रही कि वह सड़कों के निर्माण कार्य को लेकर गंभीर है।
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शहर की जर्जर सड़कों केलिए आए दिन कहीं विपक्षी पार्टियां प्रदर्शन कर रहीं थीं तो कहीं लोग प्रशासक व एडवाइजर को पत्र लिखकर इस समस्या से निजात दिलाने की बात कह रहे थे। आखिरकार निगम ने सेक्टर 43 की वी 5 सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। इस मौके पर मेयर के साथ डिप्टी मेयर जगतार सिंह जग्गा और क्षेत्रीय पार्षद चंद्रवती शुक्ला भी मौजूद थीं। मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क की गुणवत्ता में कोई लापरवाही न हो। सड़क बनने के बाद कम से कम पांच साल चलनी चाहिए।
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एडवाइजर के वादे को दो माह बीते, फंड मिला नहीं
एडवाइजर मनोज परिदा नवंबर में सड़क निर्माण कार्य बंद होने से दो दिन पूर्व नगर निगम पहुंचे थे। वहां उन्होंने सड़कों के लिए 62 करोड़ देने की घोषणा की थी। वहीं निगम को कुल 75 करोड़ देने का वादा किया था। हालंाकि, निगम और एडवाइजर दोनों को पता था कि सड़क अब नहीं बन सकती हैं। घोषणा के दो माह बाद भी अब तक प्रशासन की ओर से निगम को फंड उपलब्ध नहीं कराया गया है। ठेकेदारों का कहना है कि बकाया दीजिए तब काम करेंगे। ऐसे में प्रशासन की मंशा नहीं दिख रही कि वह सड़कों के निर्माण कार्य को लेकर गंभीर है।
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