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Chandigarh News: प्राइवेट स्कूलों की बुक शॉप मोनोपोली पर मेयर सौरभ जोशी सख्त, प्रशासन को लिखा पत्र

Mon, 09 Mar 2026 01:39 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 09 Mar 2026 01:39 AM IST
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Mayor Saurabh Joshi strict on book shop monopoly of private schools, wrote a letter to the administration
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चंडीगढ़। शहर के प्राइवेट स्कूलों द्वारा किताबों और यूनिफॉर्म की खरीद को लेकर अभिभावकों को हो रही परेशानी का मुद्दा अब नगर निगम तक पहुंच गया है। चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए यूटी चंडीगढ़ के शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर इस पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से बड़ी संख्या में अभिभावक उनसे संपर्क कर रहे हैं और शिकायत कर रहे हैं कि कई प्राइवेट स्कूल अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें चुनिंदा दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इसके कारण अभिभावकों को न केवल परेशानी उठानी पड़ती है बल्कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
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उन्होंने कहा कि यह सर्वविदित है कि कई स्कूलों की किताबें केवल कुछ चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध करवाई जाती हैं। इससे एक तरह का एकाधिकार बन जाता है और अभिभावकों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। मेयर ने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस प्रकार की व्यावसायिकता और मनमानी स्वीकार नहीं की जा सकती।
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अभिभावकों को मजबूर करना ठीक नहीं


मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि अभिभावकों को मजबूर कर चयनित दुकानों से किताबें खरिदवाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है और इस प्रथा को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था सेवा का माध्यम है, व्यापार का नहीं। यदि कोई संस्था नियमों की आड़ में अभिभावकों का शोषण करती है तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मेयर जोशी ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि अभिभावकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए, ताकि किसी भी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर अभिभावक आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। इसके अलावा सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिए जाएं कि वे उन दुकानों या वेंडर्स की सूची शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराएं जहां उनकी किताबें और यूनिफॉर्म उपलब्ध हैं। शिक्षा विभाग इस सूची को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करे ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों को स्वतंत्र विकल्प मिल सके।


उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इन निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम चंडीगढ़ को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
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