चंडीगढ़ के युवाओं का जज्बा: सबसे अंत में मिला था मौका... फिर भी टीकाकरण में निकले सबसे आगे
16 जनवरी को पूरे देश में टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाया गया। दूसरे चरण में फ्रंट वॉरियर्स और फिर 45 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण हुआ। सबसे अंत में युवाओं को मौका दिया गया था।
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कोरोना महामारी से बचाव के लिए बीते 16 जनवरी को टीकाकरण अभियान शुरू हुआ। सबसे पहले हाई रिस्क वाले लोगों को टीका लगाने की अनुमति दी गई। चार महीने के इंतजार के बाद युवाओं को टीका लगवाने का मौका मिला। 14 मई से 18 से 44 साल के बीच के लोगों को टीका लगना शुरू हुआ। अब स्थिति यह है कि इस वर्ग के लाभार्थियों ने अपने जज्बे से अन्य वर्गों को पछाड़ दिया है। मौजूदा समय में इनकी संख्या अन्य सभी वर्गों के लाभार्थियों से ज्यादा है। युवा वर्ग ने इस अभियान में सहभागिता से साबित कर दिया है कि उनमें भरपूर जोश और उत्साह है।
चौथे चरण में मिला मौका
16 जनवरी से शुरू हुए अभियान के पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाना शुरू किया गया। दूसरे चरण में प्रथम पंक्ति के कर्मचारियों को मौका दिया गया। तीसरे चरण में 45 से ज्यादा उम्र के लाभार्थियों को शामिल किया गया। 14 मई से 18 से 44 साल के लाभार्थियों को अभियान से जुड़ने का मौका मिला। उसके बाद भी इस वर्ग के लाभार्थियों को टीका लगवाने के लिए तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा। कभी स्लॉट बुकिंग की दिक्कत तो कभी टीके की कमी परेशानी बनी रही। इसके बावजूद उत्साह कम नहीं हुआ।
557947 में से 204554 लाभार्थी 18-44 आयु वर्ग के
अभियान में अब तक 557947 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। इसमें 18 से 44 साल के लाभार्थियों की संख्या 204554 है, जबकि 25503 हेल्थ केयर वर्करों ने पहली व 15667 ने दूसरी खुराक लगवाई है। अग्रिम पंक्ति के23179 लाभार्थियों को पहली व 15487 को दूसरी खुराक दी जा चुकी है। 45 से 60 साल केबीच के 125789 लाभार्थी को पहली व 24968 को दूसरी खुराक दी गई है। 60 साल से ज्यादा उम्र के 81669 को पहली व 39969 को दूसरी खुराक दी जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शहर में प्रतिदिन 6 से 7 हजार लाभार्थियों को टीका लगाया जा रहा है। इनमें लगभग 5 हजार से 55 सौ तक 18 से 44 साल के बीच के लाभार्थी शामिल हैं।
टीकाकरण अभियान में युवाओं का उत्साह सराहनीय है। वे बहुत तेजी से टीका लगवा रहे हैं। उनके उत्साह का ही नतीजा है, जो वे अभियान में सबसे पीछे होने के बावजूद परिणाम में सबसे आगे निकल रहे हैं। -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक