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मौड़ मंडी ब्लास्ट: जांच से असंतुष्ट हाईकोर्ट, पंजाब सरकार को नई एसआईटी बनाने के निर्देश
Sat, 19 Oct 2019 11:41 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 19 Oct 2019 11:41 AM IST
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट वर्ष 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मौड़ मंडी में हुए बम ब्लास्ट केस की जांच से अंसतुष्ट है। इसलिए हाईकोर्ट ने इस समय जांच कर रही एसआईटी को भंग कर नए सिरे से एसआईटी गठित करने के पंजाब सरकार को आदेश दिए हैं। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) जांच की मांग को लेकर गुरजीत सिंह पातड़ां द्वारा एडवोकेट मोहिंदर जोशी के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
याचिका में बताया गया कि 2017 में पंजाब विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान मौड़ मंडी में कांग्रेसी उम्मीदवार हरमिंदर सिंह जस्सी की जनसभा के पास बम ब्लास्ट हुआ था। इसमें 6 लोगों की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे। इस मामले को लेकर गुरजीत सिंह पातड़ां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की जांच में कई खामियां बताई थीं। हाईकोर्ट को बताया गया था कि इस मामले की जांच के दौरान यह सामने आया था कि ब्लास्ट में इस्तेमाल होने वाली कार को डेरे में ही असेम्बल किया गया था। इस कार को किसके कहने पर बनाया गया था, इसका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है।
लिहाजा इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी जानी चाहिए और साथ ही मामले में डेरामुखी को भी पक्ष बनाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर एसआईटी का गठन किया गया था। अब हाईकोर्ट ने कहा कि एसआईटी अभी तक जांच में कुछ भी हासिल नहीं कर पाई है और जांच बेहद ही धीमी गति से चल रही है। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा एसआईटी की जांच से कुछ नतीजा निकलेगा, इसकी उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है। यह बेहद ही महत्वपूर्ण मामला है लिहाजा बेहतर होगा कि मौजूदा एसआईटी को भंग कर नए सिरे से गठित किया जाए।
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याचिका में बताया गया कि 2017 में पंजाब विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान मौड़ मंडी में कांग्रेसी उम्मीदवार हरमिंदर सिंह जस्सी की जनसभा के पास बम ब्लास्ट हुआ था। इसमें 6 लोगों की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे। इस मामले को लेकर गुरजीत सिंह पातड़ां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की जांच में कई खामियां बताई थीं। हाईकोर्ट को बताया गया था कि इस मामले की जांच के दौरान यह सामने आया था कि ब्लास्ट में इस्तेमाल होने वाली कार को डेरे में ही असेम्बल किया गया था। इस कार को किसके कहने पर बनाया गया था, इसका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है।
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लिहाजा इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी जानी चाहिए और साथ ही मामले में डेरामुखी को भी पक्ष बनाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर एसआईटी का गठन किया गया था। अब हाईकोर्ट ने कहा कि एसआईटी अभी तक जांच में कुछ भी हासिल नहीं कर पाई है और जांच बेहद ही धीमी गति से चल रही है। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा एसआईटी की जांच से कुछ नतीजा निकलेगा, इसकी उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है। यह बेहद ही महत्वपूर्ण मामला है लिहाजा बेहतर होगा कि मौजूदा एसआईटी को भंग कर नए सिरे से गठित किया जाए।
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