कांट्रैक्ट महिला शिक्षकों को देना होगा पूरा मातृत्व अवकाश
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) प्रशासन ने एफिलिएटेड कॉलेजों में महिला शिक्षकों को नियमों के तहत मातृत्व नहीं देने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई करने का फैसला लिया है। पीयू सीनेट में इस मामले को लेकर काफी हंगामा हुआ था।
कई सीनेटर ने मामले में पीयू कुलपति से कार्रवाई की मांग की थी। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही पीयू सभी कॉलेजों को मैट्रिनिटी लीव के बारे में स्पष्ट निर्देश जारी करेगा। पीयू नियमों के तहत एफिलिएटेड कॉलेजों में रेगुलर महिला प्रोफेसर को 6 महीने और कांट्रैक्ट टीचर को 3 महीने की मैट्रिनिटी लीव मिलनी चाहिए।
छुट्टी के साथ ही टीचरों को पूरा वेतन भी मिलेगा। लेकिन, कई कॉलेज नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। अभी कई कॉलेज कांट्रैक्ट महिला टीचरों को एक महीने की छुट्टी दे रहें हैं। रेगुलर महिला टीचरों के लिए भी मैट्रिनिटी लीव में अलग-अलग नियम फोलो किए जा रहे हैं।
सेक्टर-36 स्थित देव समाज कॉलेज ऑफ एजुकेशन में असिस्टेंट प्रोफेसर और पीयू सीनेटर डॉ. नीरू मलिक ने प्राइवेट कॉलेजों में महिला टीचरों को पूरा मातृत्व अवकाश नहीं देने का मुद्दा सीनेट में उठाया था।
21600 से कम वेतन तो होगी कार्रवाई
पीयू कुलपति ने मामले को काफी गंभीरता से लिया और मामले में रजिस्ट्रार और कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन को कार्रवाई के निर्देश दिए। जानकारी के अनुसार, पीयू प्रशासन अब सभी कॉलेजों से मातृत्व अवकाश संबंधी एफिडेविट मांगेगा और साथ ही इस संबंध में सभी कॉलेजों को नोटिस भी जारी करेगा।
21600 से कम वेतन तो होगी कार्रवाई
पीयू प्रशासन ने अब कांट्रेक्ट असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर पर मनमाने ढंग से वेतन देने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। पीयू सीनेट में पारित प्रस्ताव के तहत कॉलेजों को कांट्रेक्ट टीचर्स को यूजीसी द्वारा निर्धारित न्यूनतम 21600 रुपये वेतन देना होगा।
उधर, कई सीनेटरों ने पंजाब के अधिकतर प्राइवेट कॉलेजों में कांट्रैक्ट शिक्षकों को 8 से 10 हजार वेतन दिए जाने का आरोप लगाया। मामले में कार्रवाई के लिए अब पीयू प्रशासन की ओर से कॉलेजों के लिए ऑनलाइन सिस्टम में कांट्रैक्ट टीचरों की भी पूरी डिटेल देने के निर्देश दिए है। ऐसे में कम वेतन देने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई होगी।
सीनेट चुनाव प्रचार के दौरान कई कॉलेजों में कांट्रैक्ट ही नहीं रेगुलर महिला टीचरों ने मैट्रिनिटी लीव पूरी नहीं दिए जाने की शिकायत की है। महिलाओं को नियमों के तहत छुट्टी मिलनी चाहिए। मामले को सीनेट में उठाया गया और पीयू कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। -डॉ. नीरू मलिक, सीनेटर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़।