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फैसलाः किराए पर कोख देने-लेने वाली कर्मचारी को मिलेगा मातृत्व अवकाश, जानिए क्या है सरोगेसी

Wed, 19 Feb 2020 11:06 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 19 Feb 2020 11:06 AM IST
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Maternity Leave Facility for Surrogate Mothers, Indian Government Decision
फाइल फोटो
चंडीगढ़ में कमीशनिंग और सरोगेट मदर कर्मचारी को अब मातृत्व अवकाश दिया जाएगा। केंद्र सरकार के निर्णय के बाद अब यूटी प्रशासन ने भी इसे लागू कर दिया है। इसे लेकर सभी विभाग, बोर्ड, इंस्टीट्यूट, कॉरपोरेशन को आदेश जारी किए हैं।
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कमीशनिंग मदर अर्थात वह महिला कर्मचारी जो बच्चे को गर्भ धारण करने के लिए किसी अन्य महिला की सेवाएं लेती है और सरोगेट मदर अर्थात वह महिला कर्मचारी जो ऐसा करने के लिए अपनी कोख किराए पर देती है, दोनों को ही गर्भवती महिला कर्मचारियों के लिए लागू मातृत्व अवकाश के नियमों और शर्तों के आधार पर ही मातृत्व अवकाश दिया जाएगा।
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यदि किसी स्थिति में कमीशनिंग मदर और सरोगेट मदर दोनों कर्मचारी हैं तो दोनों को यह अवकाश दिया जाएगा। इस आधार पर कि वह एक कमीशनिंग मदर है और दूसरी इस आधार पर कि वह गर्भवती महिला है।
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क्या है सरोगेसी?
सरोगेसी एक महिला और एक दंपति के बीच का एक एग्रीमेंट है, जो अपना खुद का बच्चा चाहता है। सामान्य शब्दों में सरोगेसी का मतलब है कि बच्चे के जन्म तक एक महिला की ‘किराए की कोख’। आमतौर पर सरोगेसी की मदद तब ली जाती है जब किसी दंपति को बच्चे को जन्म देने में कठिनाई आ रही हो।

बार-बार गर्भपात हो रहा हो या फिर बार-बार आईवीएफ तकनीक फेल हो रही है। जो महिला किसी और दंपती के बच्चे को अपनी कोख से जन्म देने को तैयार हो जाती है उसे ‘सरोगेट मदर’ कहा जाता है।

दिल्ली में उठी थी पहली मांग, सरोगेट मां को नहीं दी थी स्कूल ने छुट्टी

वर्ष 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्रीय विद्यालय की एक टीचर ने पटीशन दायर की थी। महिला सरोगेसी के जरिए जुड़वां बच्चों की मां बनी थी, लेकिन उसे यह कहकर मातृत्व अवकाश नहीं दिया गया कि वह बच्चों की बायोलॉजिकल मां नहीं है। इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा।

याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि सरोगेसी के जरिए मां बनने वाली महिला कर्मचारी भी मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन करने की हकदार होगी। इसके बाद मंत्रालय ने सभी राज्यों को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करने को कहा। साल 2017 में मैटरनिटी लीव पर संशोधित बिल संसद में पास किया गया।

इसमें प्रेग्नेंट महिलाओं को 26 हफ्तों की छुट्टी देने का प्रावधान था, जो कि पहले 12 हफ्ते थी। गौरतलब है कि मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 के मुताबिक, देश की हर कामकाजी महिला को प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे की देखरेख के लिए छुट्टी मिलती है। इन दौरान उसे पूरी सैलरी देने का नियम है।
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