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शादी की छुट्टी पर आना था, नक्सली हमले में शहीद, सम्मान के साथ संस्कार
ब्यूरो/अमर उजाला, होशियारपुर(पंजाब)
Updated Thu, 21 Jul 2016 09:56 AM IST
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औरंगाबाद में नक्सलियों के हमले में होशियारपुर का रमेश कुमार शहीद
- फोटो : अमर उजाला
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बिहार के औरंगाबाद में सीआरपीएफ हेड क्वार्टर पर हुए नक्सली हमले में शहीद 10 जवानों में एक होशियारपुर का रमेश भी था। कमांडो रमेश कुमार का राजकीय सम्मान के साथ आज अंतिम संस्कार कर दिया गया। रमेश कुमार की सगाई हो चुकी थी और उनकी शादी होने वाली थी, जिसके लिए वह घर छुट्टी लेकर आने वाले थे।
जिले के गांव रणसौता का रमेश कुमार पुत्र बलदेव राम (28) के शहीद होने की खबर जब उसने परिजनों को मिली तो लोग उसके परिजनों को ढाढस बंधाने पहुंचने लगे। घर में उसकी विधवा मां कैलाश कौर और भाभी मौजूद थीं। रमेश के बड़े भाई नीरज कुमार भारतीय सेना में फिरोजपुर में तैनात है।
नीरज ने बताया का उसको भाई के शहीद होने का जैसे ही पता चला वह अपनी यूनिट से छुट्टी लेकर दोपहर को घर पंहुचा है। नीरज ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु हो चुकी है ओर बह दो भाई ओर तीन बहनें हैं जो सब शादीशुदा हैं ओर रमेश कुमार सबसे छोटा था जिसकी सगाई हो चुकी थी ओर जब उसने छुट्टी पर घर आना था तो उसके विवाह की तारीख़ निकलवानी बाकी थी।
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नीरज ने कहा कि चार वर्ष पहले सीआरपीएफ में भर्ती हुए भाई की कमी तो सारी उम्र पुरी नहीं होगी पर मुझे ओर मेरे परिवार को अपने भाई रमेश कुमार पर गर्व है कि उसने देश के लिए अपनी जान दी है।परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के लोग अब शहीद रमेश कुमार के पार्थिव शरीर की प्रतिक्षा कर रहे हैं।
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जिले के गांव रणसौता का रमेश कुमार पुत्र बलदेव राम (28) के शहीद होने की खबर जब उसने परिजनों को मिली तो लोग उसके परिजनों को ढाढस बंधाने पहुंचने लगे। घर में उसकी विधवा मां कैलाश कौर और भाभी मौजूद थीं। रमेश के बड़े भाई नीरज कुमार भारतीय सेना में फिरोजपुर में तैनात है।
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नीरज ने बताया का उसको भाई के शहीद होने का जैसे ही पता चला वह अपनी यूनिट से छुट्टी लेकर दोपहर को घर पंहुचा है। नीरज ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु हो चुकी है ओर बह दो भाई ओर तीन बहनें हैं जो सब शादीशुदा हैं ओर रमेश कुमार सबसे छोटा था जिसकी सगाई हो चुकी थी ओर जब उसने छुट्टी पर घर आना था तो उसके विवाह की तारीख़ निकलवानी बाकी थी।
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नीरज ने कहा कि चार वर्ष पहले सीआरपीएफ में भर्ती हुए भाई की कमी तो सारी उम्र पुरी नहीं होगी पर मुझे ओर मेरे परिवार को अपने भाई रमेश कुमार पर गर्व है कि उसने देश के लिए अपनी जान दी है।परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के लोग अब शहीद रमेश कुमार के पार्थिव शरीर की प्रतिक्षा कर रहे हैं।